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साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने गूगल क्रोम वेब स्टोर पर 700 से अधिक फर्जी वीपीएन एक्सटेंशन का किया पर्दाफाशगाइड
21 अग॰ 2026, 9:20 am (1 घंटे पहले)· 3

साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने गूगल क्रोम वेब स्टोर पर 700 से अधिक फर्जी वीपीएन एक्सटेंशन का किया पर्दाफाश

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने गूगल क्रोम वेब स्टोर पर 700 से अधिक फर्जी वीपीएन एक्सटेंशन की पहचान की है, जो नॉर्डवीपीएन और सर्फशार्क जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स का नाम भुनाकर यूज़र्स के ब्राउज़िंग डेटा को खतरे में डाल रहे हैं।

डिजिटल दुनिया में अपनी ऑनलाइन गतिविधियों को गोपनीय रखने के लिए यूज़र्स आमतौर पर वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी वीपीएन का सहारा लेते हैं। सामान्य स्थिति में जब कोई यूज़र बिना किसी सुरक्षा के इंटरनेट चलाता है, तो उसका आईपी एड्रेस, ब्राउज़िंग हिस्ट्री और कई तरह के मेटाडेटा इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर और नेटवर्क पर नजर रखने वालों के सामने खुले रहते हैं। एक सही वीपीएन इस पूरे नेटवर्क ट्रैफिक को एक मजबूत एनक्रिप्टेड सुरंग के जरिए सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाता है, जिससे गोपनीय जानकारी लीक नहीं होती। हालांकि, यह पूरी सुरक्षा प्रणाली इस बात पर टिकी होती है कि यूज़र अपने वीपीएन प्रदाता पर कितना भरोसा करता है। लेकिन यदि वीपीएन एक्सटेंशन खुद ही साइबर अपराधियों का बिछाया जाल बन जाए, तो प्राइवेसी की तलाश में निकला यूज़र सीधे हैकर्स के जाल में फंस जाता है और उसका पूरा डेटा चोरी हो जाता है।

प्राइवेसी टूल को सुरक्षा का सबसे बड़ा खतरा कैसे बनाते हैं साइबर अपराधी

साइबर सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, ब्राउज़र एक्सटेंशन के जरिए जासूसी करना और संवेदनशील डेटा चुराना हैकर्स के लिए एक आसान और खतरनाक हथियार बन चुका है। जब कोई यूज़र अपने ब्राउज़र में वीपीएन एक्सटेंशन इंस्टॉल करता है, तो वह उस ऐप को अपने पूरे वेब ट्रैफिक को पढ़ने, बदलने और रिडायरेक्ट करने की अनुमति दे देता है। एक वैध वीपीएन सेवा में यह डेटा सुरक्षित एनक्रिप्टेड सर्वरों से होकर गुजरता है। इसके विपरीत, फर्जी एक्सटेंशन एक हनीपॉट की तरह काम करते हैं। वे यूज़र्स के अनएनक्रिप्टेड पासवर्ड, वित्तीय जानकारी, पर्सनल मैसेज और ब्राउज़िंग पैटर्न को सीधे अपने फर्जी सर्वरों में रिकॉर्ड कर लेते हैं।

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इन फर्जी ब्राउज़र एक्सटेंशनों का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि ये यूज़र्स को सुरक्षा का झूठा अहसास दिलाते हैं। जब कोई यूज़र बैंकिंग पोर्टल एक्सेस कर रहा होता है या संवेदनशील जानकारियां दर्ज कर रहा होता है, तो उसे लगता है कि उसकी गतिविधि एनक्रिप्टेड है। इसी भरोसे का फायदा उठाकर साइबर अपराधी बैकग्राउंड में सारा डेटा एकत्र कर लेते हैं। ब्राउज़र एक्सटेंशन के स्तर पर होने वाली यह सेंधमारी ऑपरेटिंग सिस्टम के फायरवॉल और पारंपरिक एंटीवायरस सॉफ्टवेयर की पकड़ में भी आसानी से नहीं आती, जिससे नुकसान का खतरा और बढ़ जाता है।

सॉकेट की जांच का खुलासा: 737 फर्जी एक्सटेंशन और हजारों शिकार

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख रिसर्च फर्म सॉकेट की रिसर्च रिपोर्ट में गूगल क्रोम वेब स्टोर पर मौजूद फर्जी वीपीएन ऐप्स के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। सॉकेट की थ्रेट रिसर्च टीम ने क्रोम वेब स्टोर पर मौजूद 737 ऐसे संदिग्द्ध एक्सटेंशनों की गहन जांच की, जो वीपीएन और SOCKS5 प्रॉक्सी सर्वर की सुविधा देने का दावा कर रहे थे।

सॉकेट की जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि ये सभी 737 फर्जी एक्सटेंशन महज 40 डेवलपर अकाउंट्स द्वारा स्टोर पर पब्लिश किए गए थे। इन ऐप्स की फर्जी प्रकृति के बावजूद, क्रोम वेब स्टोर पर यूज़र्स ने इन्हें 75,486 से अधिक बार इंस्टॉल किया था। सॉकेट की टीम ने इनमें से 525 एक्सटेंशनों के सोर्स कोड का विस्तृत विश्लेषण किया, जो उस समय 58,318 एक्टिव क्रोम इंस्टॉलेशन का हिस्सा थे। बाकी बचे 212 एक्सटेंशनों को सॉकेट की जांच पूरी होने से पहले ही गूगल ने क्रोम वेब स्टोर से हटा दिया था।

तकनीकी जांच की बड़ी बातें: फर्जी सर्वर, ब्रांड कॉपी और नियम तोड़ने की चालाकियां

सॉकेट द्वारा 525 एक्सटेंशनों के कोड विश्लेषण में साइबर अपराधियों की कई गंभीर और चालाकी भरी तकनीकों का पर्दाफाश हुआ। इस जांच की मुख्य तकनीकी बातें इस प्रकार हैं

  • नामी ब्रांड्स की खुलेआम नकल: जांच किए गए 525 में से 274 एक्सटेंशनों ने दुनिया के 66 प्रतिष्ठित वीपीएन प्लेटफॉर्म्स के लोगो और ब्रांडिंग की नकल की थी। इनमें नॉर्डवीपीएन, सर्फशार्क, एक्सप्रेसवीपीएन, प्रोटॉन वीपीएन, साइबरगोस्ट और टनलबियर जैसे बड़े नाम शामिल थे।
  • सेंसरशिप रोधी ऐप्स को निशाना बनाना: दो एक्सटेंशनों ने विशेष रूप से एमनेशियावीपीएन और एंटीज़ैप्रेत जैसे टूल्स का रूप धारण किया था, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर इंटरनेट सेंसरशिप और सरकारी निगरानी से बचने के लिए किया जाता है।
  • फिक्स्ड प्रॉक्सी का इस्तेमाल: सभी विश्लेषित एक्सटेंशन यूज़र्स के ट्रैफिक को एक निश्चित SOCKS5 प्रॉक्सी पर भेज रहे थे। इनमें स्प्लिट टनलिंग या वेबसाइट के हिसाब से कंट्रोल करने की कोई सुविधा नहीं थी, यानी यूज़र की हर ऑनलाइन गतिविधि उसी एक संदिग्ध सर्वर से गुजर रही थी।
  • सुरक्षा फिल्टर से बचने की ट्रिक: कुल 104 एक्सटेंशनों में डीएनएस-ओवर-एचटीटीपीएस (DoH) इवेजन तकनीकों का इस्तेमाल किया गया था। स्पूफ़्ड डीएनएस रिकॉर्ड्स के जरिए इन ऐप्स ने क्रोम की स्वचालित सुरक्षा ब्लॉकलिस्ट को आसानी से चकमा दे दिया।
  • काल्पनिक प्रीमियम सर्वर: कई एक्सटेंशनों ने जापान, सिंगापुर, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और तुर्की में हाई-स्पीड प्राइवेट सर्वर देने का दावा करते हुए पेड सब्सक्रिप्शन बेचे। लेकिन जब सॉकेट के शोधकर्ताओं ने डीएनएस लुकअप चलाया, तो पता चला कि इन सर्वरों के होस्टनेम मौजूद ही नहीं थे, यानी ये सर्वर पूरी तरह से फर्जी थे।
  • बिना लाइसेंस जांच के पेमेंट: इन ऐप्स में प्रीमियम सब्सक्रिप्शन बेचने के बावजूद यह जांचने का कोई कोड ही नहीं था कि यूज़र ने वास्तव में भुगतान किया है या नहीं। पैसा लेने के बाद भी यूज़र्स को उसी फर्जी प्रॉक्सी पर छोड़ दिया जाता था।
  • पूरी तरह से फर्जी इंटरफेस: बुर्योंका वीपीएन नाम का एक एक्सटेंशन किसी भी सर्वर के जरिए ट्रैफिक रूट ही नहीं करता था। यह सिर्फ एक फर्जी यूजर इंटरफेस था जो कनेक्ट होने का नाटक करता था, जबकि यूज़र का डेटा पूरी तरह से असुरक्षित रहता था।
  • स्टोर नियमों को चकमा देने की साजिश: एक एक्सटेंशन के कोड में प्लेनटेक्स्ट कमेंट मिला, जिसमें लिखा था कि यदि क्रोम वेब स्टोर स्वचालित रूप से लिंक खोलने के कारण ऐप को खारिज करता है, तो वे टेलीग्राम बोट पर जाने का नोटिफिकेशन दिखा देंगे। इससे साबित होता है कि डेवलपर्स को नियमों के उल्लंघन की पूरी जानकारी थी और वे जानबूझकर जांच से बच रहे थे।

गूगल क्रोम वेब स्टोर की निगरानी प्रक्रिया में कहां हुई बड़ी चूक

इतनी बड़ी संख्या में फर्जी वीपीएन ऐप्स का क्रोम वेब स्टोर पर पाया जाना गूगल की स्वचालित ऐप समीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन फर्जी एक्सटेंशनों को बनाने के लिए किसी बहुत जटिल हैकिंग तकनीक की जरूरत नहीं थी। डेवलपर्स ने गूगल के रिव्यू सिस्टम की कमियों को समझने के लिए लगातार प्रयास किए और धीरे-धीरे समीक्षा प्रक्रिया को चकमा देना सीख लिया।

इससे पहले जून में साइबर सुरक्षा फर्म पलो आल्टो नेटवर्क के अध्ययन के बाद भी कई फर्जी एक्सटेंशन हटाए गए थे, लेकिन साइबर अपराधियों ने उसी तरीके को अपनाकर तुरंत नए डेवलपर अकाउंट बना लिए। क्रोम वेब स्टोर पर नया डेवलपर अकाउंट खोलने की फीस महज 5 डॉलर यानी लगभग 400 रुपये है। ऐसे में 40 डेवलपर अकाउंट बनाने और 700 से ज्यादा फर्जी ऐप्स पब्लिश करने में अपराधियों का खर्च 200 डॉलर से भी कम आया।

इसके अलावा, इनमें से ज्यादातर फर्जी वीपीएन ऐप्स को रूसी नागरिकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था जो क्षेत्रीय सेंसरशिप से बचने की कोशिश कर रहे थे। एक सीमित क्षेत्र के यूज़र्स को निशाना बनाने के कारण इन शिकायतों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुरंत ध्यान नहीं गया। जब गूगल के मॉडरेटर्स ने किसी एक्सटेंशन को फ्लैग भी किया, तो डेवलपर्स ने एक जैसी फर्जी प्राइवेसी दलीलें सबमिट करके अपने ऐप्स को दोबारा स्टोर पर लाइव करवा लिया।

हालांकि यह मामला शुरुआत में एक क्षेत्रीय खतरे जैसा लग सकता है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि क्रोम वेब स्टोर की सुरक्षा खामियां अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और भारत सहित दुनिया भर के यूज़र्स को प्रभावित कर सकती हैं। इससे पहले गूगल द्वारा जारी चेतावनी में एंड्रॉइड प्ले स्टोर पर मौजूद फर्जी वीपीएन ऐप्स के बारे में भी यूज़र्स को सतर्क किया गया था।

फर्जी वीपीएन से बचने और अपने ब्राउजर को सुरक्षित रखने के जरूरी उपाय

केवल आधिकारिक वेब स्टोर की समीक्षा प्रक्रिया पर निर्भर रहना अब सुरक्षा की गारंटी नहीं है। यूज़र्स को अपने ब्राउज़र में कोई भी सुरक्षा टूल इंस्टॉल करने से पहले खुद सावधानी बरतनी चाहिए। इन जरूरी सुरक्षा उपायों को अपनाएं

  • आधिकारिक वेबसाइट से लिंक लें: क्रोम वेब स्टोर या गूगल प्ले के सर्च बार में सीधे वीपीएन का नाम तलाशने के बजाय हमेशा वीपीएन प्रदाता की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और वहां दिए गए सीधे लिंक से ही एक्सटेंशन इंस्टॉल करें।
  • डेवलपर प्रोफ़ाइल की जांच करें: एक्सटेंशन इंस्टॉल करने से पहले स्टोर पर दिए गए डेवलपर अकाउंट की जांच करें। यह सुनिश्चित करें कि अकाउंट आधिकारिक कंपनी से जुड़ा है और डेवलपर के अन्य ऐप्स पर सुरक्षा संबंधी शिकायतें तो नहीं हैं।
  • आईपी एड्रेस की पुष्टि करें: वीपीएन चालू करने के बाद WhatIsMyIPAddress.com जैसी स्वतंत्र वेबसाइट पर जाकर अपना विजिबल आईपी एड्रेस चेक करें। यह सुनिश्चित करें कि वेबसाइट पर दिखने वाला आईपी एड्रेस वीपीएन ऐप के इंटरफेस में दिख रहे आईपी से मेल खाता है।
  • डीएनएस लीक टेस्ट चलाएं: वीपीएन कनेक्ट होने के बाद डीएनएस लीक चेक जांच के लिए browserleaks.com/dns पर जाएं। यदि टेस्ट रिजल्ट में आपका असली आईपी एड्रेस, वास्तविक लोकेशन या इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) की जानकारी दिखाई देती है, तो इसका मतलब है कि आपका वीपीएन काम नहीं कर रहा है और उसे तुरंत हटा देना चाहिए।

सवाल-जवाब

क्रोम वेब स्टोर पर कितने फर्जी वीपीएन एक्सटेंशन पाए गए?
साइबर सुरक्षा फर्म सॉकेट की जांच में 737 संदिग्ध वीपीएन एक्सटेंशन पाए गए, जिन्हें महज 40 डेवलपर अकाउंट्स द्वारा संचालित किया जा रहा था।
क्या ये फर्जी एक्सटेंशन असली वीपीएन ब्रांड्स की नकल कर रहे थे?
हां, 525 विश्लेषित एक्सटेंशनों में से 274 ने नॉर्डवीपीएन, सर्फशार्क, एक्सप्रेसवीपीएन और प्रोटॉन वीपीएन जैसे 66 प्रतिष्ठित सुरक्षा प्लेटफार्मों के लोगो और ब्रांडिंग की नकल की थी।
इन फर्जी वीपीएन ऐप्स ने गूगल की सुरक्षा जांच को कैसे चकमा दिया?
डेवलपर्स ने वेब स्टोर के रिव्यू पैटर्न का अध्ययन करके खामियों का फायदा उठाया, नए 5 डॉलर वाले डेवलपर अकाउंट्स बनाए और फ्लैग होने पर एक जैसी झूठी प्राइवेसी दलीलें सबमिट कीं।
क्या इन फर्जी वीपीएन ऐप्स के पेड सर्वर सच में काम करते थे?
नहीं, जापान, सिंगापुर, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और तुर्की में विज्ञापित प्रीमियम सर्वर वास्तव में मौजूद ही नहीं थे और उनके डोमेन नाम सिस्टम लुकअप में विफल रहे।
यूज़र्स कैसे पहचान सकते हैं कि वीपीएन एक्सटेंशन असली है या फर्जी?
वेब स्टोर में सर्च करने के बजाय हमेशा वीपीएन प्रदाता की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए सीधे लिंक से एक्सटेंशन इंस्टॉल करें और डेवलपर प्रोफ़ाइल की जांच करें।
वीपीएन इंस्टॉल करने के बाद उसकी सुरक्षा की जांच कैसे करें?
WhatIsMyIPAddress.com पर जाकर अपना आईपी पता जांचें और browserleaks.com/dns जैसी साइट पर जाकर सुनिश्चित करें कि आपकी डीएनएस क्वेरी एनक्रिप्टेड हैं।
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