स्मार्ट ग्लास की दुनिया में खुद को नए सिरे से स्थापित करने के लिए स्नैप ने अपनी अगली पीढ़ी के संवर्धित वास्तविकता चश्मों की झलक पेश की है। कंपनी ने साल 2016 में अपने मूल स्पेक्टेकल्स के साथ इस बाजार में कदम रखा था, जो मेटा के इस क्षेत्र में आने से पूरे पांच साल पहले की बात है। हालांकि बाद के वर्षों में मेटा के रे-बैन और ओकले चश्मों ने उपभोक्ताओं के बीच भारी लोकप्रियता हासिल की, जबकि स्नैप के स्मार्ट वियरेबल्स चर्चा से कुछ हद तक बाहर रहे। अब कंपनी स्नैप स्पेक्स के साथ एक बड़ा तकनीकी बदलाव लाने की तैयारी में है, जो सामान्य कैमरे और वॉयस असिस्टेंट की सीमाओं से कहीं आगे निकलकर पूर्ण स्थानिक कंप्यूटिंग की सुविधा देता है। हाल ही में आयोजित स्नैपड्रैगन समिट में प्रदर्शित किए गए इस प्रोटोटाइप में भौतिक दुनिया के ऊपर सीधे डिजिटल ग्राफिक्स प्रोजेक्ट करने की क्षमता दिखाई गई।
हार्डवेयर डिजाइन और संतुलित वजन
काले पॉलीमर फ्रेम से तैयार किए गए स्नैप स्पेक्स में भारी-भरकम हार्डवेयर को काफी सलीके से समाहित किया गया है। इस पूरे सेटअप को संचालित करने के लिए दो अलग-अलग स्नैपड्रैगन प्रोसेसर लगाए गए हैं, जो सभी गणनाएं डिवाइस पर ही प्रोसेस करते हैं। चश्मे के सामने की तरफ दो हाई-रिज़ॉल्यूशन वाले फुल-कलर कैमरे दिए गए हैं, जो आसपास के वातावरण को ट्रैक करने का काम करते हैं। इसके अलावा इसमें 6डीओएफ (सिक्स डिग्रीज ऑफ फ्रीडम) हैंड ट्रैकिंग तकनीक मौजूद है, जिससे यूजर केवल अपने हाथों के इशारों से इंटरफेस को नियंत्रित कर सकता है। इस डिवाइस की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पूरी तरह स्टैंडअलोन है। इसे चलाने के लिए किसी तार, बाहरी फोन या अलग से जेब में रखने वाले प्रोसेसिंग पैक की आवश्यकता नहीं पड़ती।
इतनी तकनीक और इनबिल्ट बैटरी होने के बावजूद कंपनी ने इसके एर्गोनॉमिक्स पर खास ध्यान दिया है। लगभग 135 ग्राम वजन के साथ यह बेहद हल्के तो नहीं हैं, लेकिन इनका वजन फ्रेम पर समान रूप से वितरित रहता है। इससे चेहरे और नाक पर एकतरफा दबाव नहीं बनता और यह किसी भारी वीआर हेडसेट की बजाय सामान्य धूप के चश्मे जैसा अनुभव देता है। कंपनी के अनुसार, एक बार पूरा चार्ज करने पर यह डिवाइस लगभग चार घंटे का मिक्स्ड-यूज बैकअप देने में सक्षम है।
डिस्प्ले तकनीक और इलेक्ट्रोक्रोमिक ग्लास
स्नैप ने आसपास मौजूद लोगों के साथ सामाजिक संवाद बनाए रखने के लिए इसके लेंस को पारदर्शी रखा है, जिससे सामने वाले व्यक्ति को यूजर की आंखें साफ दिखाई देती हैं। वहीं अगर यूजर पूरी तरह अपने डिजिटल काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहे, तो इसमें इलेक्ट्रोक्रोमिक डिमिंग का फीचर दिया गया है। एक बटन या कमांड के जरिए लेंस तुरंत पारदर्शी से गहरे काले शेड में बदल जाते हैं, जो तेज रोशनी में काफी मददगार साबित होता है।
चश्मे का इन-बिल्ट डिस्प्ले बेहद चमकदार है और इसे लिक्विड क्रिस्टल ऑन सिलिकॉन यानी एलसीओएस तकनीक से तैयार किया गया है। तेज रोशनी वाले कॉन्फ्रेंस हॉल में भी इसका यूजर इंटरफेस और ऐप्स पूरी स्पष्टता के साथ दिखाई देते हैं। परीक्षण के दौरान 16 मिलियन रंगों के साथ यूट्यूब हाई-डेफिनिशन वीडियो स्ट्रीम करने पर विजुअल्स काफी शार्प नजर आए। इसका डिस्प्ले 51-डिग्री का फील्ड ऑफ व्यू देता है, जिससे आंखों के सामने एक बड़ी फ्लोटिंग स्क्रीन तैरती हुई महसूस होती है। यहां से यूजर जेस्चर के जरिए ऐप्स खोल सकते हैं, वीडियो देख सकते हैं या डिजिटल कंटेंट ब्राउज कर सकते हैं।
व्यावहारिक उपयोग और सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम
स्नैप इस हार्डवेयर को उपयोगी बनाने के लिए कई फर्स्ट-पार्टी और थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन्स तैयार कर रहा है। इसमें कला सिखाने वाले सॉफ्टवेयर से लेकर म्यूजिक ट्यूटर ऐप्स तक शामिल हैं। खेल प्रशिक्षण के एक लाइव डेमो में यह देखा गया कि गोल्फ खेलते समय चश्मा वास्तविक जमीन पर वर्चुअल गाइडलाइन बना देता है। खिलाड़ी को किस दिशा में शॉट लगाना चाहिए और गेंद का होल कहां स्थित है, वहां एक वर्चुअल झंडा दिखाई देने लगता है। इस तरह की संदर्भ-संवेदी क्षमताएं सामान्य स्मार्टफोन या कंप्यूटर पर संभव नहीं हैं।
कीमत और बाजार में उपलब्धता
इस प्रोटोटाइप को रोजमर्रा की जिंदगी में कितना उपयोगी माना जाएगा, इसका अंतिम फैसला बाजार में आने के बाद ही होगा। कंपनी की योजना इसे आगामी शरद ऋतु में आधिकारिक तौर पर रिलीज करने की है। हालांकि उन्नत हार्डवेयर और स्टैंडअलोन फीचर्स की वजह से इसकी कीमत काफी प्रीमियम रखी गई है। स्नैप स्पेक्स को 2,195 डॉलर के खुदरा मूल्य पर लॉन्च किया जाएगा, जो मुख्य रूप से डेवलपर्स और शुरुआती तकनीक प्रेमियों को ध्यान में रखकर तय किया गया लगता है।



















