गुजरात के वडोदरा शहर में साल 2024 में नवरात्रि उत्सव की रात एक 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के चर्चित मामले में अदालत ने बड़ा निर्णय दिया है। इस जघन्य अपराध में शामिल सभी पांचों आरोपियों को अदालत ने दोषी करार दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सी.एम. पवार ने मामले की सुनवाई करते हुए दोषियों को ठहराए गए अपराधों पर सजा की अवधि तय करने के लिए 25 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है। इस फैसले के बाद पीड़िता और उसके परिवार को लंबे समय से चले आ रहे न्यायिक इंतजार के बाद राहत की उम्मीद दिखी है।
वडोदरा अदालत का निर्णय और विधिक धाराएं
मामले की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक नयन सुखड़वाला ने अदालत की कार्यवाही के संदर्भ में जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत ने आरोपियों के कृत्य को गंभीर श्रेणी में मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की सख्त धाराओं के तहत सभी पांचों को दोषी पाया है। अदालत ने पाया कि आरोपियों ने न केवल गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया बल्कि सबूतों को नष्ट करने और डकैती जैसे जघन्य अपराध भी किए। कानूनी प्रावधानों के तहत इन गंभीर धाराओं में कड़ी सजा का प्रावधान मौजूद है, जिसकी घोषणा 25 अगस्त को की जाएगी।
4 अक्टूबर 2024 की रात घटी वारदात
अभियोजन पक्ष की ओर से पेश विवरण के अनुसार यह दर्दनाक घटना 4 अक्टूबर 2024 को नवरात्रि के त्योहार के दौरान घटी थी। उस रात पूरा वडोदरा शहर पारंपरिक गरबा आयोजनों के जश्न में डूबा हुआ था और लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर मौजूद थे। उसी दौरान 16 वर्षीय पीड़िता रात लगभग 11 बजे शहर के लक्ष्मीपुरा इलाके में अपने बचपन के दोस्त से मुलाकात करने गई थी। मुलाकात के बाद रात करीब 12 बजे वे दोनों स्कूटी पर सवार होकर भयली इलाके के रास्ते लौट रहे थे। इसी बीच सुनसान सड़क पर दोपहिया वाहन से जा रहे पांच युवकों ने उन्हें रोक लिया और घेर लिया।
बंधक बनाकर प्रताड़ना और आपराधिक भूमिका
आरोपियों ने हमला करते हुए पीड़िता के साथ मौजूद उसके पुरुष मित्र को बंधक बना लिया ताकि वह किसी सहायता के लिए न पुकार सके। इसके बाद तीन आरोपियों ने किशोरी के साथ बारी-बारी से रेप किया। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि बाकी दो आरोपी घटनास्थल पर लगातार मौजूद थे और वे पीड़िता तथा उसके मित्र को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। कानून के सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि गैंगरेप जैसे गंभीर मामलों में केवल मूकदर्शक बने रहने वाले या सहायता करने वाले लोग भी अपराध के लिए उतने ही जिम्मेदार होते हैं। अभियोजक नयन सुखड़वाला ने कहा, "अदालत ने 'समान आशय' को ध्यान में रखते हुए सभी पांचों को दोषी पाया।"
25 से 30 वर्ष की उम्र के दोषियों की पहचान
अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए पांचों व्यक्तियों की उम्र 25 से 30 वर्ष के बीच है। अभियोजन पक्ष के अनुसार दोषियों के नाम मुमताज, अजमल, मुन्ना बंजारा, सैफ और शाहरुख हैं। इन पांचों को अदालत ने समान आपराधिक मंशा साझा करने के आधार पर सभी आरोपों में बराबर का दोषी माना है। इस मामले में पुलिस ने जांच के बाद विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके आधार पर सत्र अदालत ने नियमित सुनवाई पूरी की।
विश्वामित्री नदी की तलाशी और मजबूत साक्ष्य
अदालत के इस फैसले तक पहुंचने में ठोस तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों ने मुख्य भूमिका निभाई। घटना के दौरान आरोपियों ने पीड़िता का मोबाइल फोन छीन लिया था और साक्ष्य मिटाने के इरादे से उसे विश्वामित्री नदी में फेंक दिया था। पुलिस प्रशासन और दमकल विभाग की टीमों ने नदी के पानी में मोबाइल की सघन खोजबीन की थी, लेकिन फोन बरामद नहीं हो सका। इसके बावजूद अदालत ने परिस्थितियों और गवाहों के आधार पर यह साबित माना कि फोन लूटा गया था और उसे नदी में फेंका गया था।
इसके अतिरिक्त अभियोजन पक्ष ने कुल 26 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले थे, जिनमें से 3 कैमरों की रिकॉर्डिंग में आरोपी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे। अदालत ने इन फुटेज को मजबूत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया। अभियोजक नयन सुखड़वाला ने बताया कि पीड़िता और उसके पुरुष मित्र के विस्तृत बयान अदालत के लिए दो प्रमुख प्रत्यक्ष साक्ष्य बने। साथ ही वारदात के तुरंत बाद पीड़िता ने अपने भाई और मां को पूरी आपबीती बताई थी, जिनके बयानों ने भी अभियोजन के पक्ष को अदालत में पूरी तरह मजबूत किया।



















