राजस्थान के चूरू जिले में एक नन्ही बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक और बेहद सख्त रुख अपनाया है। पोक्सो कोर्ट ने चार साल की मासूम बच्ची के साथ बर्बरता करने वाले आरोपी को अपनी जिंदगी की आखिरी सांस तक सलाखों के पीछे रहने का हुक्म दिया है। अदालत के इस कड़े निर्णय से क्षेत्र के निवासियों में संतोष की लहर है और लोगों ने न्यायपालिका के इस फैसले का खुले दिल से समर्थन किया है।
सिधमुख पुलिस स्टेशन क्षेत्र में हुई थी खौफनाक वारदात
मामले की शुरुआत साल 2025 में हुई थी, जब पीड़ित पक्ष ने न्याय के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 26 फरवरी 2025 को चूरू स्थित सिधमुख थाने में इस खौफनाक घटना की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। परिजनों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, उनकी चार वर्षीय छोटी बेटी अपने घर के बाहर खेल में व्यस्त थी। इसी दौरान 25 साल का आरोपी जयपाल कुम्हार वहां पहुंचा और बहला-फुसलाकर बच्ची को अपनी बातों में उलझा लिया। वह मासूम को सीधा अपने मकान पर ले गया, जहां उसने मानवीय संवेदनाओं को तार-तार करते हुए बच्ची के साथ जघन्य कृत्य किया। जब बच्ची के रोने और चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनकर परिवार वाले मौके पर पहुंचे, तब इस भयावह वारदात का भेद खुला। इसके तुरंत बाद परिजनों ने सिधमुख थाने पहुंचकर आरोपी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
पुराने रिकॉर्ड से खुला राज: पहले भी मासूम बालिका को बनाया था शिकार
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी जयपाल कुम्हार को तुरंत हिरासत में ले लिया। जांच अधिकारी ने मामले से जुड़े सभी साक्ष्य जुटाकर न्यायालय के समक्ष एक विस्तृत और प्रभावकारी आरोप-पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट में आरोपी से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए। जयपाल कोई पहली बार कानून नहीं तोड़ रहा था, बल्कि वह पहले से ही आपराधिक मानसिकता वाला व्यक्ति निकला। इससे पूर्व भी उसने एक अन्य 5 साल की मासूम बालिका के साथ इसी तरह की घिनौनी हरकत को अंजाम दिया था। उस पूर्ववर्ती मामले में भी अदालत ने उसे कसूरवार मानते हुए उम्रकैद का दंड दिया था।
अदालत का कड़ा संदेश: समाज में ऐसे अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं
मामले की अंतिम सुनवाई पूरी होने के पश्चात पोक्सो कोर्ट ने स्पष्ट माना कि अभियुक्त जयपाल कुम्हार एक आदतन अपराधी है। अदालत ने कहा कि मासूम बच्चों को निशाना बनाने वाले ऐसे दरिंदों को सामान्य समाज के बीच रहने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं दिया जा सकता। पत्रावली पर मौजूद गवाहों के बयानों और पुलिस द्वारा प्रस्तुत ठोस सबूतों का मुआयना करने के बाद न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी ठहराया। फैसले में कहा गया कि आरोपी का यह कृत्य अत्यंत वीभत्स और अक्षम्य है, इसलिए वह किसी भी प्रकार की छूट या हमदर्दी पाने का हकदार नहीं है। अदालत ने आदेश दिया कि दोषी को अपनी अंतिम सांस तक सलाखों के पीछे ही रहना होगा। इस कड़े फैसले से यह साफ संदेश मिलता है कि नन्हे बच्चों के खिलाफ हिंसा करने वालों को न्यायिक व्यवस्था कभी माफ नहीं करेगी।



















