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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष की सख्त जेल, पॉक्सो कोर्ट ने दिए दैनिक सामाजिक कार्य के अनूठे आदेशराजस्थान
20 अग॰ 2026, 10:17 am (57 मिनट पहले)· 2

नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष की सख्त जेल, पॉक्सो कोर्ट ने दिए दैनिक सामाजिक कार्य के अनूठे आदेश

पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी को 20 साल के कठोर कारावास और 6,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा कोर्ट ने 21 वर्ष की आयु तक प्रतिदिन 5 घंटे सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्य करने के अनोखे आदेश दिए हैं।

पॉक्सो क्रम संख्या दो अदालत ने नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के एक मामले में दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अभियुक्त पर 6,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सजा सुनाने के साथ ही न्यायाधीश ने दोषी के शारीरिक, मानसिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास के लिए 21 वर्ष की आयु पूरी होने तक प्रतिदिन विशेष सामाजिक कार्य करने के अनोखे सुधारात्मक निर्देश जारी किए हैं।

अपहरण और पुलिस कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम

विशिष्ट लोक अभियोजक वीरेंद्र सिंह भाणावत द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह मामला 24 सितंबर 2024 का है। शहर के एक थाना क्षेत्र में रहने वाली नाबालिग लड़की को उसका नाबालिग दोस्त बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। आरोपी ने पीड़िता को तीन से चार दिनों तक अवैध बंधक बनाकर रखा और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर 25 सितंबर 2024 को मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को निरुद्ध किया और बाल सुधार गृह भेज दिया।

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किशोर न्याय बोर्ड से पॉक्सो कोर्ट में केस का स्थानांतरण

वारदात के समय आरोपी की उम्र 17 वर्ष से कम थी, जिसके कारण शुरुआती विधिक कार्रवाई किशोर न्याय बोर्ड में शुरू हुई थी। हालांकि, अपराध की गंभीर प्रकृति और आरोपी की आयु 16 वर्ष से अधिक होने के कारण किशोर न्याय बोर्ड ने मामले को वयस्क की भांति चलाने का निर्णय लिया। इसके बाद केस को पॉक्सो क्रम संख्या दो न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया। इस विशेष अदालत में 5 फरवरी 2025 से नियमित सुनवाई शुरू हुई। सभी गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने बुधवार को अपना अंतिम फैसला सुनाया।

सजा की अवधि और केंद्रीय कारागार में जाने की प्रक्रिया

अदालत का फैसला आने के समय दोषी की आयु 18 साल 19 दिन हो चुकी है। कोर्ट के आदेशानुसार, उसे तुरंत आम जेल नहीं भेजा जाएगा। दोषी को 21 वर्ष की उम्र पूरी होने तक किशोर सुधार गृह में ही रखा जाएगा। 21 साल की आयु प्राप्त कर लेने के बाद उसे 20 साल की शेष कठोर कैद की सजा काटने के लिए केंद्रीय कारागार में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

पुनर्वास के लिए प्रतिदिन करने होंगे 3 बड़े कार्य

अदालत ने दोषी के चरित्र सुधार और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाने के लिए 21 वर्ष की उम्र तक प्रतिदिन 5 घंटे समाज सेवा करने का निर्देश दिया है

  • शैक्षणिक विकास: दोषी को रोजाना 2 घंटे किसी मान्यता प्राप्त तकनीकी या शैक्षणिक संस्थान में उपस्थित होकर परामर्श और अध्ययन करना होगा।
  • पर्यावरण संरक्षण: प्रतिदिन 2 घंटे उपवन संरक्षक या संबंधित वन कार्यालय के दिशा-निर्देशों में पौधारोपण और पर्यावरण सेवा से जुड़े कार्य करने होंगे।
  • सामाजिक सेवा: प्रतिदिन 1 घंटा ‘अपना घर’ या किसी अन्य अधिकृत आश्रय स्थल में रहकर बुजुर्गों और मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों की देखभाल व सेवा करनी होगी।

सवाल-जवाब

अदालत ने दोषी को क्या मुख्य सजा सुनाई है?
अदालत ने दोषी को 20 साल के कठोर कारावास और 6,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
घटना कब और कैसे हुई थी?
24 सितंबर 2024 को एक नाबालिग लड़का अपनी नाबालिग सहेली को बहला-फुसलाकर ले गया था और 3-4 दिनों तक बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था।
मामला किशोर न्यायालय से पॉक्सो कोर्ट में क्यों स्थानांतरित किया गया?
घटना के समय आरोपी की उम्र 16 वर्ष से अधिक होने और अपराध की गंभीरता को देखते हुए किशोर न्याय बोर्ड ने मामले को वयस्क की तरह सुनवाई के लिए पॉक्सो कोर्ट स्थानांतरित कर दिया था।
दोषी को 21 साल की उम्र तक रोज कौन से 3 कार्य करने होंगे?
दोषी को रोजाना 2 घंटे तकनीकी या शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई, 2 घंटे पौधरोपण व पर्यावरण सेवा और 1 घंटा 'अपना घर' या आश्रय स्थल में बुजुर्गों व दिव्यांगों की सेवा करनी होगी।
दोषी की वर्तमान आयु क्या है और उसे कहां रखा जाएगा?
दोषी की वर्तमान उम्र 18 साल 19 दिन है। उसे 21 साल की उम्र तक किशोर सुधार गृह में रखा जाएगा और उसके बाद केंद्रीय कारागार भेजा जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·38 मिनट पहले

यह फैसला न्याय और सुधार के बीच संतुलन का एक अनूठा उदाहरण है। 16 वर्ष से अधिक आयु के किशोरों पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाने के कानूनी प्रावधान का यह मामला प्रशासनिक और विधिक हलकों में एक अहम मिसाल बनेगा। भविष्य में इस तरह के मामलों में सुधारवादी उपायों और सख्त सजा के समन्वय पर विधिक विशेषज्ञों की नजर रहेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·38 मिनट पहले

यह निर्णय दिखाता है कि न्याय व्यवस्था अब केवल दंड तक सीमित नहीं है, बल्कि गंभीर अपराध करने वाले 16 से 18 वर्ष के युवाओं की मानसिकता को बदलने पर भी जोर दे रही है। पॉक्सो मामलों में किशोर न्याय बोर्ड द्वारा वयस्क मानकर ट्रायल का यह प्रावधान समाज में यह कड़ा संदेश देता है कि गंभीर अपराधों पर कानूनी शिकंजा कसना जरूरी है, साथ ही 21 वर्ष की आयु तक सुधार गृह में रखकर पर्यावरण, शिक्षा और सेवा के कार्य करवाना एक दूरदर्शी विधिक कदम है जो भविष्य की आपराधिक प्रवृत्ति को रोकने में मददगार साबित हो सकता है।

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