मैदान पर तेज-तर्रार बल्लेबाजी के लिए मशहूर रहे पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और मौजूदा सांसद यूसुफ पठान इन दिनों एक ऐसी पारी में फंसे हैं, जहां रन नहीं, सवाल बढ़ रहे हैं। गुजरात के वडोदरा में सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे का यह विवाद अब गुजरात हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है और अदालत का रुख पठान के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है। दो जजों की बेंच ने साफ कर दिया है कि नाम और रसूख की आड़ में सरकारी संपत्ति पर बैठे रहने की छूट किसी को नहीं मिलेगी।
अदालत की सख्त चेतावनी: देरी पड़ेगी महंगी
सुनवाई के दौरान गुजरात हाई कोर्ट की डबल बेंच ने तल्ख लहजे में कहा कि इस जमीन पर साल 2014 से अवैध कब्जा बना हुआ है। बेंच ने दो टूक चेताया कि कोर्ट से जितना ज्यादा समय मांगा जाएगा, उतना ही भारी जुर्माना भी चुकाना पड़ेगा। यानी अदालत ने मामले को टालने की हर कोशिश पर पहले ही पहरा बैठा दिया है।
बचाव में 'नीति' का सहारा
यूसुफ पठान की ओर से पेश वकील ने अदालत से चार हफ्ते का अतिरिक्त समय मांगा। उनका तर्क है कि वे कोर्ट के सामने वह सरकारी नीति रखना चाहते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को सरकारी जमीन के आवंटन से जुड़ी है। यानी बचाव की रणनीति इसी नीति के इर्द-गिर्द बुनी जा रही है।
978 वर्ग मीटर का प्लॉट और 2014 में ठुकराया प्रस्ताव
पूरा विवाद वडोदरा के टंडलजा इलाके में मौजूद 978 वर्ग मीटर के एक कीमती प्लॉट से जुड़ा है। यह जमीन यूसुफ पठान ने अपने आवासीय इस्तेमाल के लिए मांगी थी। वडोदरा नगर निगम (VMC) ने इसे बाजार मूल्य पर देने का प्रस्ताव पास कर राज्य सरकार के पास भेजा था। लेकिन राज्य सरकार ने साल 2014 में यह कहते हुए प्रस्ताव खारिज कर दिया कि बिना सार्वजनिक नीलामी के इस तरह जमीन नहीं दी जा सकती।
प्रस्ताव खारिज, फिर भी बाउंड्री और मवेशियों का शेड
दिलचस्प बात यह है कि प्रस्ताव ठुकराए जाने के बावजूद प्लॉट पर बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी गई और मवेशियों के लिए शेड बना दिया गया, जिससे कब्जा कथित रूप से बना रहा। मामला तब गरमाया जब जून 2024 में वीएमसी ने तुरंत कब्जा हटाने का नोटिस थमाया। इसी नोटिस को चुनौती देने के लिए यूसुफ पठान हाई कोर्ट पहुंचे।
अदालत का तीखा सवाल: कब्जा सौंपा किसने?
पिछली सुनवाई में अदालत ने मामले की जड़ पर ही उंगली रखी थी। कोर्ट ने पूछा कि जब जमीन का आवंटन ही नहीं हुआ, तो इसका कब्जा आखिर मिला कैसे। बेंच ने साफ कहा कि उस अधिकारी का नाम बताया जाए जिसने यह कब्जा सौंपा — अदालत उसके खिलाफ भी जांच के आदेश देगी। इस सवाल ने सिर्फ पठान की नहीं, बल्कि उस पूरे तंत्र की भी पोल खोल दी जिसने वर्षों तक यह कब्जा चलने दिया।
'आप अनपढ़ नहीं हैं' — किराया और हर्जाना तो देना ही होगा
अदालत ने पठान के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने पर भी सख्त टिप्पणी की। बेंच ने कहा कि वे कोई अनपढ़ व्यक्ति नहीं हैं और उनके कद के क्रिकेटर से ऐसा बर्ताव अपेक्षित नहीं था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन उनके कब्जे में है, भले ही वे इसका इस्तेमाल न कर रहे हों, इसलिए उन्हें इसका किराया और हर्जाना चुकाना ही होगा।













