आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय क्रिकेट टीम को मिली हार के बाद क्रिकेट गलियारों में बड़ा प्रशासनिक बवाल खड़ा हो गया है। टीम प्रबंधन और बोर्ड द्वारा आगामी समीक्षा बैठक से पहले ध्यान भटकाने की रणनीति बनाई जा रही है। भारतीय टीम के स्वदेश लौटते ही सपोर्ट स्टाफ के दो प्रमुख सदस्यों पर कार्रवाई का फैसला लिया गया है। सहायक कोच रयान डेस्कोटे और फील्डिंग कोच टी दिलीप का अनुबंध आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इस कदम पर पूर्व सेलेक्टर सबा करीम ने कड़ी आपत्ति व्यक्त की है और भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की जवाबदेही पर सीधे सवाल खड़े किए हैं।
सपोर्ट स्टाफ की बलि और बोर्ड का रुख
जैसे ही भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ ने भारत की धरती पर कदम रखा, बोर्ड द्वारा त्वरित निर्णय लेते हुए सहायक कोच रयान डेस्कोटे और फील्डिंग कोच टी दिलीप के अनुबंध समाप्त करने की बात सामने आई। पूर्व सेलेक्टर सबा करीम के अनुसार, यह कदम समीक्षा बैठक से पहले फैंस और मीडिया का ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया है। बोर्ड यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि हार के बाद कड़े कदम उठाए गए हैं, जबकि वास्तव में निचले स्तर के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। सबा करीम ने इस परिपाटी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब भी टीम हारती है, तो मुख्य कोच की कुर्सी हमेशा सुरक्षित रहती है और सारा दोष सहायक कर्मचारियों पर मढ़ दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक ऐसा चलता रहेगा और कोई सामने आकर हेड कोच से सवाल क्यों नहीं पूछता।
गौतम गंभीर की भूमिका और जवाबदेही पर सवाल
पूर्व सेलेक्टर ने सीधे हेड कोच गौतम गंभीर को निशाने पर लेते हुए स्पष्ट किया कि मैदान पर टीम के खराब प्रदर्शन की प्राथमिक और पूरी जिम्मेदारी मुख्य कोच की होती है। सबा करीम ने तर्क दिया कि यदि जीत की स्थिति में श्रेय लेने के लिए मुख्य कोच सबसे आगे आते हैं, तो हार के समय सपोर्ट स्टाफ को जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गौतम गंभीर अपने सपोर्ट स्टाफ से सही तरीके से काम लेने में असमर्थ रहे हैं। सबा करीम का मानना है कि यदि हेड कोच अपने स्टाफ की क्षमताओं का उचित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, तो यह उनकी अपनी बड़ी विफलता है। इसलिए किसी अन्य व्यक्ति को बचाने के लिए दूसरों पर जिम्मेदारी डालने के बजाय सबसे पहले हेड कोच को ही उनके पद से हटाया जाना चाहिए।
फुटबॉल से तुलना और ड्रेसिंग रूम का असुरक्षित माहौल
भारतीय क्रिकेट में मुख्य कोच को बचाने के ढर्रे पर गहरी चिंता जताते हुए सबा करीम ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल में चाहे राष्ट्रीय टीम हो या कोई क्लब, टीम का खेल खराब होने पर सबसे पहले मुख्य कोच का इस्तीफा होता है। इसके विपरीत, हमारे क्रिकेट सिस्टम में मुख्य कोच को बचाने के लिए हर संभव पैंतरा अपनाया जाता है। कई बार कोच को बरकरार रखने के लिए कप्तान तक बदल दिए जाते हैं, लेकिन कोच अपनी जगह पर बना रहता है। पूर्व सेलेक्टर ने ध्यान दिलाया कि यह कोई अकेली हार नहीं है, क्योंकि वर्ल्ड कप को छोड़कर भारतीय टीम लगभग हर फॉर्मेट में लगातार हार का सामना कर रही है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि मुख्य कोच के सही ढंग से काम न कर पाने के कारण आज ड्रेसिंग रूम के अंदर हर खिलाड़ी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।


















