मॉनसून के दिनों में मच्छरों के काटने से फैलने वाली बीमारियों, खासकर डेंगू के मामलों में अक्सर ब्लड प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगते हैं। ऐसी हालत में लोग घरेलू उपचार के तौर पर पपीते के पत्तों का काढ़ा पीना शुरू कर देते हैं। इस काढ़े को प्लेटलेट्स की संख्या सुधारने में काफी असरदार माना जाता है, मगर बिना सोचे-समझे या गलत तरीके से इसका सेवन स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुंचा सकता है। इसे पीने से पहले सही मात्रा, तैयारी की विधि और यह जानना बेहद जरूरी है कि किन मरीजों को इसके इस्तेमाल से पूरी तरह बचना चाहिए।
काढ़े में मौजूद पोषक तत्व और प्लेटलेट्स पर इसका असर
फरीदाबाद स्थित एकॉर्ड हॉस्पिटल की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अनु शर्मा बताती हैं कि पपीते की पत्तियों में पपैन नामक विशेष तत्व मौजूद होता है। यह तत्व शरीर के भीतर एक मजबूत एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। जब किसी व्यक्ति को डेंगू संक्रमण होता है या किसी अन्य कारण से उसके प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं, तब यह काढ़ा प्लेटलेट्स का स्तर बढ़ाने में मददगार साबित होता है। डॉ. शर्मा के अनुसार, जिन लोगों के शरीर में प्लेटलेट्स का स्तर गिर गया है, वे अपने चिकित्सक से परामर्श लेकर तय मात्रा में इसका काढ़ा पी सकते हैं। बारिश के दिनों में मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।
बड़ों के लिए काढ़ा तैयार करने की सही विधि
पपीते के पत्तों का काढ़ा घर पर बनाते समय साफ-सफाई और पानी की मात्रा का ध्यान रखना अनिवार्य है। डॉ. अनु शर्मा के अनुसार, सबसे पहले दो से तीन ताजे पपीते के पत्ते लें और उन्हें पानी से अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। इसके बाद इन पत्तों को चाकू से बारीक काट लें। अब एक बर्तन में लगभग 200 एमएल पानी लेकर उसमें कटी हुई पत्तियां डालें और हल्की आंच पर उबालें। जब उबलते हुए पानी की मात्रा घटकर आधी, यानी लगभग 100 एमएल रह जाए, तो गैस बंद कर दें। इस काढ़े को छन्नी से छान लें और दिन में सिर्फ एक बार पिएं। इसे केवल तब पीना चाहिए जब वास्तव में प्लेटलेट्स घटे हों।
किन लोगों को काढ़ा पीने से बचना चाहिए?
जिन लोगों के खून में प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य है या अधिक है, उन्हें पपीते के पत्ते का काढ़ा पीने की कोई आवश्यकता नहीं होती। इसके अलावा जिन व्यक्तियों को अक्सर पेट में अत्यधिक गैस बनने, एसिडिटी या उल्टी आने की समस्या रहती है, उन्हें भी इसके सेवन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। अत्यधिक मात्रा में या लंबे समय तक रोजाना यह काढ़ा पीने से पेट में तेज दर्द, गैस, गंभीर एसिडिटी और उल्टी की शिकायत हो सकती है। इसे कभी भी एक नियमित दैनिक ड्रिंक की तरह लंबे समय तक लगातार नहीं आजमाना चाहिए।
बच्चों के लिए खुराक और जरूरी सावधानियां
अगर बच्चों में प्लेटलेट्स की कमी हो जाए, तो उन्हें भी यह काढ़ा दिया जा सकता है, लेकिन उनकी खुराक बड़ों से बिल्कुल अलग और कम होनी चाहिए। बच्चों के लिए काढ़ा तैयार करने के वास्ते केवल एक पपीते का पत्ता लेकर साफ करें। इसे करीब 100 एमएल पानी में डालकर तब तक उबालें जब तक पानी घटकर लगभग 50 एमएल न रह जाए। इसके बाद काढ़े को छान लें। पपीते के पत्तों का स्वाद कड़वा होता है, इसलिए जब काढ़ा हल्का गुनगुना हो जाए तो उसमें स्वाद बेहतर करने के लिए मिश्री के कुछ दाने मिलाए जा सकते हैं। बच्चों को देते समय यह सुनिश्चित करें कि मात्रा सीमित रहे और केवल जरूरत पड़ने पर ही इसका सेवन कराया जाए।




















