अंबाला की रहने वाली बिम्पी रेखी ने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी को समाज के वंचित तबके के उत्थान का जरिया बना दिया है। वैवाहिक जीवन के 11 वर्षों तक संतान की प्रतीक्षा करने के बाद जब उनके घर बेटे की किलकारी गूंजी, तो पूरे परिवार ने इसे ईश्वर का विशेष उपहार माना। इसी भावना के साथ बेटे का नाम गुर्रहमत रखा गया। इसके कुछ समय बाद इसी नाम को आधार बनाकर एक सामाजिक संगठन की नींव रखी गई, जो आज जरूरतमंद बच्चों, किशोरियों और गरीब परिवारों के जीवन में रोशनी फैला रहा है।
गुरु की कृपा से शुरू हुआ समाजसेवा का सफर
लंबे इंतजार के बाद मिली खुशी को दूसरों की भलाई में बदलने की प्रेरणा बिम्पी को अपने परिवार से मिली। वह बताती हैं कि जब वर्षों की प्रार्थनाओं के बाद उनके बेटे का जन्म हुआ, तो उनके पति कंवरदीप रेखी ने उन्हें दीन-दुखियों की सेवा के लिए आगे बढ़ने का हौसला दिया। पति के इसी प्रोत्साहन के बाद लगभग छह वर्ष पूर्व ‘गुरु की रहमत’ संस्था को पंजीकृत कराया गया। शुरुआत में यह एक छोटा सा प्रयास था, लेकिन समय के साथ अन्य संवेदनशील लोग भी इस नेक मुहिम से जुड़ते चले गए और दायरा लगातार बड़ा होता गया।
चॉकलेट और साबुन बनाने के काम से जुटाती हैं संसाधन
इस पूरे सामाजिक मिशन की सबसे खास बात यह है कि इसके संचालन के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाने में बिम्पी खुद सबसे आगे रहती हैं। वह चॉकलेट और साबुन बनाने का घरेलू उद्यम चलाती हैं। इस व्यवसाय से होने वाली पूरी आमदनी को वह संस्था के सेवा कार्यों में लगा देती हैं। संस्था से जुड़े अन्य सहयोगी भी अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक और व्यावहारिक योगदान देते हैं, जिससे यह सेवा कार्य बिना किसी रुकावट के निरंतर आगे बढ़ रहा है।
सैकड़ों बच्चों की शिक्षा और ऑब्जरवेशन होम में कक्षाएं
संस्था का सबसे मुख्य ध्यान बच्चों को बुनियादी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर है। संगठन के प्रयासों से अब तक शहरी इलाकों के लगभग 450 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है। वहीं ग्रामीण अंचलों में लगभग 300 से 500 बच्चों तक शिक्षा की पहुंच बनाई गई है। बिम्पी अंबाला के ऑब्जरवेशन होम में भी 200 से अधिक बच्चों को नियमित रूप से पढ़ा रही हैं, जहां प्रतिदिन कक्षाएं संचालित की जाती हैं। बाल कल्याण समिति यानी सीडब्ल्यूसी अंबाला ने भी उनके इस निरंतर शैक्षिक प्रयास की आधिकारिक रूप से सराहना की है।
जूडो ब्राउन बेल्ट बिम्पी दे रहीं बेटियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण
ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को सामान्य पाठ्यक्रम के साथ अंग्रेजी भाषा, कला एवं शिल्प तथा बेकरी से जुड़े हुनर सिखाए जाते हैं। संस्था का विशेष जोर बालिकाओं और युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने पर है। अब तक 300 से अधिक ग्रामीण लड़कियों को क्राफ्ट, बेकरी और आत्मरक्षा का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। बिम्पी स्वयं जूडो में ब्राउन बेल्ट धारक हैं, इसलिए वह बालिकाओं को निडर बनाने और अपनी सुरक्षा खुद करने के लिए विशेष रूप से प्रेरित करती हैं। उनका उद्देश्य है कि लड़कियां हुनर सीखकर अपने पैरों पर खड़ी हों या स्वरोजगार शुरू करें। इसके अलावा अंबाला की कानूनी टीम के सहयोग से गांवों में महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष शिविर भी आयोजित किए जाते हैं।
गरीब बेटियों के विवाह और स्कूलों में सहायता
संस्था ने अब तक आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों की 7 से 8 बेटियों के विवाह में भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। इनमें कोरोना महामारी के दौरान पंजाब के दड़वा गांव की एक युवती का विवाह भी शामिल है, जो अंबाला से सटा इलाका है। उस युवती के पिता छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे और परिवार के पास शादी का खर्च उठाने का कोई साधन नहीं था। संस्था की टीम ने मौके पर पहुंचकर न केवल विवाह का पूरा प्रबंध कराया बल्कि कन्यादान की रस्म भी निभाई। संस्था का सेवा कार्य अंबाला के लहरसा, नगला, लोहसिंबली, सेंकती, बलाना, तेजां गांव और नया गांव तक फैला हुआ है, जहां के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले निर्धन बच्चों को कड़ाके की ठंड में गर्म कपड़े, जर्सी, मोजे और जूते बांटे गए हैं।
11 वर्षीय बेटे गुर्रहमत का पर्यावरण सेवा का सपना
वर्तमान में 11 वर्ष के हो चुके गुर्रहमत अपनी मां के इस सेवा अभियान से बेहद खुश और प्रेरित हैं। गुर्रहमत का कहना है कि संस्था उनके नाम पर बनी है और इसका मकसद गरीब परिवारों तथा बेसहारा बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देना है। वह भविष्य में इस संस्था के काम को और व्यापक स्तर पर ले जाना चाहते हैं। गुर्रहमत का सपना है कि बड़े होकर वह समाजसेवा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाएं। महिला सशक्तिकरण और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिम्पी को 2020 में ग्लोबल वूमेन इंस्पिरेशन अवार्ड और 2021 में राष्ट्रीय समाज सेवा रत्न अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।























