सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं के मन में अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि इस परीक्षा को निकालने के लिए कई सालों की तपस्या और भारी-भरकम कोचिंग संस्थानों का सहारा जरूरी है। हरियाणा के रेवाड़ी जिले के एक छोटे से गांव से आने वाली सिमरन भारद्वाज ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही बेहद शांति से तैयारी शुरू की और अपने पहले ही प्रयास में प्रतिष्ठित संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर गुजरात कैडर में आईपीएस का पद हासिल किया। नए दौर की इस युवा अधिकारी की कामयाबी यह साबित करती है कि अगर रणनीति सही हो और इरादे मजबूत हों, तो किसी भी पृष्ठभूमि का व्यक्ति बड़ी से बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।
ग्वालियर से स्कूली शिक्षा और दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता
सिमरन भारद्वाज का शुरुआती जीवन और प्राथमिक शिक्षा मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में पूरी हुई। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली का रुख किया, जहां उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज से पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पत्रकारिता की पढ़ाई और कॉलेज के बौद्धिक माहौल ने उन्हें देश और दुनिया के समसामयिक घटनाक्रमों को गहराई से समझने का नजरिया दिया। इसी दौरान कॉलेज के दूसरे वर्ष में उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का दृढ़ संकल्प लिया। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी इस तैयारी को पूरी तरह निजी रखा। परिवार में उनके माता-पिता और भाई के अलावा बाहर किसी भी रिश्तेदार या दोस्त को इसकी खबर नहीं थी। जब परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित हुआ और उन्होंने 172वीं रैंक हासिल की, तब जाकर लोगों को उनके इस गुप्त मिशन के बारे में पता चला।
भाई का मजाक और मां का बरसों पुराना सपना हुआ सच
सिमरन के जीवन में कई ऐसे संयोग भी जुड़े, जिन्होंने उनके संकल्प को और मजबूत बनाया। एक पुराने प्रसंग को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार जब वह सुबह दौड़ लगा रही थीं, तब उनके भाई के एक परिचित ने उन्हें देखकर टिप्पणी की कि वह बिल्कुल किसी कमांडो की तरह दिखती हैं। इस पर उनके भाई ने हंसते हुए जवाब दिया कि यह उसकी बहन है और एक आईपीएस अधिकारी है। यह बात उस समय कही गई थी जब सिमरन ने यूपीएससी की मुख्य परीक्षा भी नहीं दी थी, लेकिन आगे चलकर यह मजाक पूरी तरह सच साबित हुआ। इसके साथ ही, वर्ष 2015 में जब वह दसवीं कक्षा में पढ़ रही थीं, तब उनकी मां ने अपनी निजी डायरी या इच्छा सूची में लिखा था कि वह अपनी बेटी को एक प्रतिष्ठित सिविल सेवक के रूप में देखना चाहती हैं। सिमरन ने अपनी लगन से अपनी मां के उस सपने को हकीकत में बदल दिखाया।
यूट्यूब पर टॉपर्स के विश्लेषण से तैयार की खुद की रणनीति
सिमरन का मानना है कि इतनी कठिन परीक्षा में सफलता केवल किस्मत के भरोसे नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए व्यवस्थित और आधुनिक स्मार्ट वर्क की आवश्यकता होती है। किसी परंपरागत ढर्रे पर चलने के बजाय उन्होंने खुद अपनी राह तैयार की। अपनी रणनीति बनाने के लिए उन्होंने यूट्यूब पर पिछले कुछ वर्षों के लगभग 40 से 50 सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कारों को बारीकी से देखा। उन्होंने इन टॉपर्स के अनुभवों, उनकी साझा रणनीतियों और गलतियों का गहरा विश्लेषण किया और फिर उन बातों को ध्यान में रखते हुए अपना खुद का टाइमटेबल और अध्ययन योजना तैयार की।
आईपीएस इल्मा अफरोज से मुलाकात ने बढ़ाई प्रेरणा
कॉलेज के दिनों में घटी एक और घटना ने उनके संकल्प को नई दिशा दी। कॉलेज में आयोजित एक भाषण प्रतियोगिता के दौरान उनकी मुलाकात चर्चित महिला आईपीएस अधिकारी इल्मा अफरोज से हुई थी। उस प्रतियोगिता में सिमरन को इल्मा अफरोज के हाथों पुरस्कार प्राप्त करने का अवसर मिला। इस दौरान दोनों के बीच हुई संक्षिप्त बातचीत ने सिमरन के मन में पुलिस सेवा में जाने की इच्छा को और तीव्र कर दिया। सही दिशा में किए गए मार्गदर्शन, योजनाबद्ध अध्ययन और खुद पर अटूट भरोसे के दम पर सिमरन भारद्वाज ने अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की और गुजरात कैडर की आईपीएस अधिकारी बनीं।



















