हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित दयालपुर गांव के बाशिंदे इन दिनों एक बेहद गंभीर और जानलेवा बुनियादी खतरे के साए में जीने को मजबूर हैं। गांव के एक व्यस्त रास्ते के ठीक मोड़ पर लगा हुआ बिजली का ट्रांसफार्मर बेहद खस्ताहाल स्थिति में पहुंच चुका है, जिससे हर समय बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। आसपास के कई इलाकों में बिजली वितरण निगम ने बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करते हुए पुराने खंभों को बदल दिया है, मगर दयालपुर गांव में इस संवेदनशील जगह पर स्थित क्षतिग्रस्त खंभे को जस का तस छोड़ दिया गया है। ट्रांसफार्मर से निकले खुले और नंगे बिजली के तार जमीन और रास्ते के बिल्कुल करीब लटक रहे हैं, जिससे राहगीरों, बच्चों और मवेशियों पर लगातार खतरा मंडराता रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार बिजली निगम को आगाह करने के बावजूद प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
तीखे मोड़ पर लगा ढांचा बन रहा हादसों का सबब
गांव के मुख्य रास्ते के बिल्कुल कोने और मोड़ पर इस भारी-भरकम बिजली ढांचे के लगे होने से रोजमर्रा का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मोड़ पर दृश्यता बाधित होने के कारण सामने से आने वाले वाहनों को अचानक मुड़ने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार वाहन चालकों को अनियंत्रित होने का खतरा रहता है, जिससे कभी भी कोई बड़ा सड़क हादसा हो सकता है। रास्ते से गुजरने वाले ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस उपकरण को यहां से हटाकर किसी खुली और सुरक्षित जगह पर स्थानांतरित नहीं किया गया, तो भविष्य में होने वाले किसी भी जान-माल के नुकसान की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि खुले तारों से फैलने वाले करंट के कारण पहले भी कई मूक पशु इसकी जद में आ चुके हैं। स्थानीय निवासी जगदीप हुड्डा के अनुसार ट्रांसफार्मर के खुले तारों से रिसते करंट की चपेट में आने से कई बच्चे बाल-बाल बचे हैं और उन्हें झटके लग चुके हैं। इतना ही नहीं, करंट लगने से एक बेजुबान कुत्ते की मौके पर ही मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि व्यस्त मोड़ पर इस तरह का खुला ढांचा लगाना पूरी तरह से गलत योजना का परिणाम है और इसे तत्काल यहां से हटाया जाना चाहिए।
शिकायतों के बाद भी महकमे ने नहीं ली सुध
बिजली निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारियों को औपचारिक तौर पर ज्ञापन सौंपने के बावजूद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। जगदीप हुड्डा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस गंभीर संकट को लेकर बिजली विभाग के संबंधित एसडीओ को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की गुहार लगाई थी। हालांकि, लंबे समय के बाद भी विभागीय स्तर पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया। विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि चंदावली से आगे गांव अटाली तक तो बिजली के पुराने और कमजोर खंभों को व्यवस्थित रूप से हटाकर नए खंभे लगा दिए गए, लेकिन दयालपुर गांव के इस टूटे हुए खंभे को बदलने की जहमत नहीं उठाई गई।
जिस खंभे पर ट्रांसफार्मर का पूरा वजन टिका है, वह नीचे से पूरी तरह दरक चुका है और किसी भी तेज आंधी या मामूली टक्कर में गिर सकता है। स्थानीय निवासी नानक सिंह हुड्डा ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि ट्रांसफार्मर के तार पूरी तरह नंगे पड़े हुए हैं, जिससे ग्रामीणों में हर पल डर का माहौल बना रहता है। उन्होंने जोर दिया कि बिजली विभाग को किसी अप्रिय घटना का इंतजार किए बिना फौरन इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की उठ रही मांग
गांव के अन्य निवासियों ने भी व्यवस्था की इस अनदेखी पर भारी रोष जताया है। स्थानीय निवासी अजय सिंह का कहना है कि ट्रांसफार्मर के आसपास नंगे तारों का जाल फैला हुआ है और आधार बना खंभा भी क्षतिग्रस्त है। अगर बरसात या सामान्य दिनों में भी इसमें शॉर्ट सर्किट होता है या खंभा धराशायी होता है, तो आसपास मौजूद आबादी पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ग्रामीण एकजुट होकर यह मांग कर रहे हैं कि आबादी और रास्ते की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इसे आबादी से दूर किसी सुरक्षित स्थल पर स्थापित किया जाए।
वहीं, स्थानीय नागरिक रोहतास ने बताया कि ट्रांसफार्मर की गलत लोकेशन ही सारी परेशानियों की मुख्य जड़ है। संकरे रास्ते के अंतिम छोर और मोड़ पर होने की वजह से यहां चौबीसों घंटे गाड़ियां, ट्रैक्टर और दोपहिया वाहन गुजरते रहते हैं। ऐसे में हमेशा वाहनों के खंभे से टकराने या तारों की चपेट में आने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग से त्वरित हस्तक्षेप की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि जनहित में इस ट्रांसफार्मर को तत्काल दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाना बेहद जरूरी है।





















