दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में एक पीजी छात्रावास की इमारत ढहने और उसमें कई विद्यार्थियों की दुखद मृत्यु होने के बाद अब हरियाणा के फरीदाबाद स्थित पंडित जवाहर लाल नेहरू कॉलेज में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा हो गई हैं। सेक्टर-16 में बना यह प्रतिष्ठित सरकारी कॉलेज लगभग 50 वर्ष पुराना है और वर्ष 2016 में ही लोक निर्माण विभाग की ओर से इसे कंडम घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद जोखिम भरी इस पुरानी संरचना में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, जिससे विद्यार्थियों का जीवन लगातार संकट में बना हुआ है।
कॉलेज के मुख्य द्वार पर विद्यार्थियों का जोरदार प्रदर्शन
खस्ताहाल भवन की अनदेखी से नाराज सैकड़ों विद्यार्थी सोमवार सुबह संस्थान के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU), जिला प्रशासन तथा कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। लगभग सात हजार विद्यार्थियों वाले इस प्रमुख राजकीय महाविद्यालय की गणना शहर के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों में की जाती है। इतिहास में इस कॉलेज से कई जाने-माने मंत्री, जनप्रतिनिधि और सफल उद्योगपति शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, लेकिन वर्तमान समय में प्रशासनिक उदासीनता के कारण यहाँ अध्ययनरत छात्रों को रोजमर्रा की बुनियादी समस्याओं और जानलेवा परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
बजट की कमी और ठेकेदार के पीछे हटने से अटका नया निर्माण
जर्जर हो चुकी पुरानी इमारत के स्थान पर एक नई आधुनिक संरचना तैयार करने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2019 में छह मंजिला भवन के निर्माण की शुरुआत की थी। हालाँकि, वर्ष 2020 में फैली कोरोना महामारी के कारण निर्माण कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया। महामारी के बाद परियोजना में बजट की भारी कमी आ गई जिसके चलते काम की गति अत्यंत धीमी पड़ गई। परियोजना की अनुमानित लागत में दो बार वृद्धि की गई, लेकिन निर्माण प्रक्रिया में अत्यधिक देरी होने के कारण पहली निर्माण कंपनी ने आगे काम करने से इनकार कर दिया। अनुबंध समाप्त होने से नई इमारत का निर्माण बीच में ही अटक गया और छात्र नई सुविधा से वंचित रह गए।
पानी की किल्लत और बदहाल शौचालयों से जूझते विद्यार्थी
पुराने परिसर के भीतर मूलभूत सुविधाओं का अभाव विद्यार्थियों की परेशानी को कई गुना बढ़ा रहा है। प्रथम वर्ष के छात्र राहुल ने परिसर के आंतरिक हालातों पर चिंता जाहिर करते हुए बताया कि पुरानी बिल्डिंग में व्यवस्थाएं बेहद खराब हैं। पीने के पानी की उचित आपूर्ति न होने के कारण विद्यार्थियों को रोजाना बाहर से पैक्ड पानी की बोतलें खरीदनी पड़ती हैं। इसके अलावा शौचालयों की स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहाँ नियमित सफाई न होने से दुर्गंध और संक्रमण फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है। राहुल के अनुसार कई कक्षाओं की खिड़कियों के शीशे टूटे पड़े हैं, जबकि पीछे नई इमारत लगभग तैयार होने के बावजूद वहां कक्षाएं स्थानांतरित नहीं की जा रही हैं।
उखड़ता प्लास्टर, निकलते सरिये और बिजली बैकअप का अभाव
एक अन्य छात्र रवि, जो बीए प्रथम वर्ष में पढ़ाई करते हैं, ने परिसर के शैक्षणिक वातावरण और ढांचागत कमियों का ब्योरा दिया। रवि ने स्पष्ट किया कि उनकी कक्षा वाले कमरे में फिलहाल कोई बड़ी तात्कालिक समस्या नहीं है और अंदर बैठकर पढ़ाई हो रही है, लेकिन बाहर से देखने पर पूरी इमारत जर्जर दिखाई देती है। दीवारों का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ चुका है और लोहे के सरिये बाहर निकल आए हैं। रवि ने बताया कि जलापूर्ति बाधित होने पर पानी बाहर से लाना पड़ता है। गर्मी के मौसम में बिजली कटने पर कोई पावर बैकअप उपलब्ध न होने से पंखे बंद हो जाते हैं, जिससे उमस भरी कक्षाओं में बैठना दुष्कर हो जाता है।
छह महीने में नई इमारत में शिफ्टिंग की उम्मीद और प्रशासन का रुख
बीकॉम प्रथम वर्ष के छात्र साहिल मौर्य ने आशा व्यक्त की है कि आगामी छह महीनों के भीतर सभी कक्षाओं को पीछे बन रही नई इमारत में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। साहिल ने माना कि जिस कमरे में वह बैठते हैं वह ज्यादा जर्जर नहीं है, फिर भी पूरी बिल्डिंग काफी पुरानी हो चुकी है। इस पूरे मामले पर कॉलेज प्रशासन की ओर से शैलेश्वर कौशिक ने फोन पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि नई इमारत का लगभग 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष 10 प्रतिशत कार्य पूरा होते ही सभी विद्यार्थियों को नए और सुरक्षित परिसर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि वर्तमान में पठन-पाठन के लिए केवल पूर्णतः सुरक्षित कमरों का ही उपयोग किया जा रहा है।



















