हरियाणा के फरीदाबाद जिले के डीग गांव में एक गरीब परिवार का आशियाना प्रशासन के पीले पंजे की भेंट चढ़ गया। करीब 25 साल की मेहनत और एक-एक पैसे की बचत से खड़ा किया गया 12 लाख रुपये का नया मकान मात्र 20 मिनट की कार्रवाई में जमींदोज कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व लिखित नोटिस के बेघर कर दिया गया और पूरे गांव में से केवल उनके ही मकान को निशाना बनाया गया है।
बिना किसी लिखित नोटिस के अचानक चला बुलडोजर
पीड़ित रवि ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वह फरीदाबाद के डीग गांव के मूल निवासी हैं और जिस घर को तोड़ा गया है, वह उनका ही था। उनके अनुसार, इस जगह पर उनका परिवार पिछले 50 वर्षों से रहता आ रहा है। उनके दादा और परदादा के समय से ही इस जमीन पर उनका बसेरा था। रवि ने बताया कि उस दौर में जमीनें बहुत अधिक होती थीं और आबादी कम, इसलिए लोग आपसी सहमति से खाली जमीनों पर रहने लगते थे। उनके पास पिछले 25 वर्षों से सरकारी बिजली का मीटर भी लगा हुआ है, जिसका वे नियमित रूप से भुगतान कर रहे हैं। रवि का दावा है कि प्रशासन की ओर से उन्हें घर खाली करने या अतिक्रमण हटाने का कोई औपचारिक लिखित नोटिस नहीं दिया गया था। करीब 10 से 15 साल पहले केवल मौखिक रूप से यह सुनने में आया था कि यह जमीन पंचायती है। लेकिन अचानक एक शाम प्रशासन के लोग आए और मकान पर निशान लगाकर चले गए। अगले ही दिन सुबह लगभग 10 बजे भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनों के साथ अधिकारी वहां पहुंच गए और घर खाली करने को कह दिया।
गांव के सरपंच पर पुरानी राजनीतिक रंजिश का आरोप
पीड़ित परिवार ने इस कार्रवाई के पीछे गहरे राजनीतिक और व्यक्तिगत कारणों का आरोप लगाया है। रवि का कहना है कि उनके पूरे डीग गांव में लगभग आधे से अधिक मकान पंचायती जमीन पर ही बने हुए हैं। लेकिन प्रशासन ने पूरे गांव में किसी अन्य मकान को हाथ तक नहीं लगाया और केवल उनके मकान को मलबे में तब्दील कर दिया। रवि ने सीधे तौर पर गांव के वर्तमान सरपंच पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कार्रवाई पुरानी रंजिश के तहत की गई है। चुनाव के समय उनके परिवार ने सरपंच को वोट नहीं दिया था, और इसी चुनावी रंजिश का बदला लेने के लिए सुनियोजित तरीके से केवल उनके घर को निशाना बनाया गया। रवि के अनुसार, अगर यह सचमुच सरकारी जमीन खाली कराने की एक सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई थी, तो पूरे गांव में बने अन्य अवैध निर्माणों पर भी समान रूप से पीला पंजा चलना चाहिए था।
25 वर्षों की मेहनत और 12 लाख रुपये का नुकसान
रवि ने भावुक होते हुए बताया कि उनका परिवार बेहद सामान्य परिस्थितियों में जीवनयापन करता है। वे पशुपालन और छोटी-मोटी खेती करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। इस घर को बनाने के लिए उन्होंने पिछले 25 वर्षों तक अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा जोड़ा था। लगभग 12 लाख रुपये की लागत से यह मकान तैयार हुआ था। मकान का निर्माण कार्य पूरी तरह से लगभग 20 दिन पहले ही समाप्त हुआ था, हालांकि कुछ हिस्सों का काम लगभग दो महीने पहले ही पूरा हो चुका था। परिवार इस नए घर में रहने की खुशियां मना ही रहा था कि अचानक महज 20 मिनट के भीतर उनकी जिंदगी भर की मेहनत को प्रशासनिक बुलडोजर ने मलबे के ढेर में बदल दिया। ढाई सौ गज के इस परिसर में न केवल उनका सुंदर मकान था, बल्कि उनके मवेशियों के रहने के लिए बनाया गया बाड़ा भी पूरी तरह नष्ट कर दिया गया।
100 वर्षीय दादा बेघर, मलबे में दबा घरेलू सामान
इस कार्रवाई की सबसे दर्दनाक बात यह है कि घर में रहने वाले लगभग 30 सदस्यों का परिवार अब बेघर हो चुका है। रवि के पिता के तीन भाई हैं और परिवार में कुल सात भाई हैं, जो सभी इसी संयुक्त परिवार का हिस्सा थे। रवि के दादा की उम्र लगभग 100 वर्ष है और इस उम्र में भी वे इसी घर में रहते थे। इस बुजुर्ग को भी इस कड़कड़ाती धूप और खुले आसमान के नीचे रातें गुजारनी पड़ रही हैं। रवि ने बताया कि तोड़फोड़ के समय प्रशासन ने उन्हें अपने पशुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का भी पर्याप्त समय नहीं दिया। इस आपाधापी में उनकी एक गाय गंभीर रूप से घायल हो गई। पुलिस बल की मौजूदगी में घर के अंदर रखा कीमती सामान, राशन और पशुओं का शेड सब कुछ नष्ट हो गया। अब परिवार के सदस्य मलबे को हटाकर अपना बचा-कुचा सामान खोजने का प्रयास कर रहे हैं ताकि कुछ दैनिक उपयोग की चीजें बचाई जा सकें। पीड़ित परिवार का कहना है कि एक गरीब और असहाय परिवार के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।













