फरीदाबाद के सेक्टर 56 और आसपास के इलाकों में मानसून की बारिश राहत के बजाय स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ी आफत बनकर आई है। क्षेत्र में स्थित कचरा डंपिंग यार्ड से उठने वाली तीव्र दुर्गंध ने रिहाइशी कॉलोनियों के वातावरण को अत्यंत विषैला बना दिया है। जैसे ही बारिश की बूंदें सड़ते हुए कचरे पर पड़ती हैं, वहां से निकलने वाली असहनीय बदबू हवा के साथ तेजी से आसपास की बस्तियों तक फैल जाती है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोगों के लिए घरों के भीतर भोजन करना, पानी पीना और यहां तक कि सामान्य रूप से सांस लेना भी दूभर हो गया है। परेशान निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे बड़े पैमाने पर सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
बारिश के पानी और हवा ने बिगाड़े हालात
बारिश के बाद डंपिंग यार्ड का कचरा भीगने से दुर्गंध कई गुना बढ़ गई है। तेज हवाओं के कारण यह बदबू सेक्टर 56, रामनगर और नजदीकी कॉलोनियों के कोने-कोने तक पहुंच रही है। गर्मी से बचाव के लिए लगाए गए कूलर और पंखे भी अब बेअसर साबित हो रहे हैं, क्योंकि वे बाहर की बदबूदार हवा को कमरे के अंदर खींच लेते हैं। ऐसे में निवासियों को खिड़की और दरवाजे बंद करके घुटन भरे माहौल में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस दूषित आबोहवा का शिकार बन रहे हैं।
स्वास्थ्य संकट और बीमारियों का बढ़ता खौफ
डंपिंग यार्ड की वजह से क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से पैर पसार रही हैं। छोटे बच्चों के गले में संक्रमण और खराश की शिकायतें सामने आ रही हैं, जबकि बड़ों को निरंतर सिरदर्द और सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के कारण कई परिवारों को बार-बार अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। निवासियों ने आशंका जताई है कि यदि इस कचरे के ढेर का त्वरित निस्तारण नहीं किया गया, तो मानसून के मौसम में हैजा, उल्टी-दस्त और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा इस पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले सकता है।
सरकारी मंजूरी और टैक्स जमा करने के बावजूद नर्क जैसी जिंदगी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पूरी तरह वैध और अप्रूव्ड इलाका है। वर्ष 2016 में इस कॉलोनी की नींव रखी गई थी और बीते 10 वर्षों में लगभग 200 से अधिक लोगों की प्रॉपर्लीज की रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। निवासी नगर निगम फरीदाबाद (MCF) के सभी टैक्स, विकास शुल्क और बिजली-पानी के बिल समय पर जमा कर रहे हैं। वर्ष 2023 में जब कचरा डालना शुरू हुआ था, तब अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थाई है। लेकिन 3 साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसके अलावा बंधवाड़ी कचरा निस्तारण केंद्र के बंद होने से सारा दबाव इसी सेक्टर 56 के डंपिंग यार्ड पर आ गया है। इस समय आसपास के करीब 15,370 घरों में रहने वाले लगभग 1,00,000 (1 लाख) लोग इस लापरवाही का दंश झेल रहे हैं।
निवासियों की व्यथा और जनप्रतिनिधियों पर वादाखिलाफी का आरोप
क्षेत्र के निवासियों ने प्रशासन और स्थानीय नेताओं के रवैये पर भारी रोष व्यक्त किया है। रामनगर की रहने वाली मीना, जो पिछले 3 सालों से इस संकट को झेल रही हैं, उनका कहना है कि अधिकारी हर बार केवल जुबानी आश्वासन देते हैं। मीना ने सवाल उठाया, "जब यहां डंपिंग यार्ड बनाना था तो इस कॉलोनी को बनाया ही क्यों गया।" उन्होंने बताया कि बदबू के कारण भोजन करना असंभव हो गया है और बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।
इसी तरह 9 वर्षों से यहां रह रहीं रिंकी मिश्रा ने बताया कि जब भी लोग अधिकारियों के दफ्तर जाते हैं, तो हर बार कचरा हटाने की बात कही जाती है। रिंकी मिश्रा के शब्दों में, "जब अधिकारियों के पास जाते हैं तो बोलते हैं कि हटा देंगे, लेकिन लिखित में कुछ नहीं देते।" उनका कहना है कि इस कचरे की बदबू से हर वक्त सिर में दर्द रहता है और स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है।
देव आशीष सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि पिछले 3 वर्षों से यह कचरा स्थल आसपास के वातावरण को जहरीला बना रहा है। देव आशीष सिंह ने स्पष्ट किया, "बदबू इतनी ज्यादा है कि कूलर और पंखे तक नहीं चला पाते, क्योंकि वे बदबू अंदर खींच लेते हैं।" उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो भयानक बीमारियां फैलने का डर बना रहेगा।
गीता नामक महिला निवासी ने जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर आक्रोश जताते हुए कहा कि लोग चुनाव में वोट देकर नेताओं को जिताते हैं, लेकिन जीतने के बाद सुनवाई बंद हो जाती है। कई बार चक्का जाम करने के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला। गीता ने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर नेताओं और प्रशासन ने जल्द इसका समाधान नहीं किया तो फिर हम खुद तय करेंगे कि कैसे समाधान होगा।"
नेताओं को अंतिम अल्टीमेटम और उग्र आंदोलन की चेतावनी
कॉलोनी के निवासी विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि 10 साल पुरानी इस अप्रूव्ड कॉलोनी को पिछले 3 वर्षों में नगर निगम और नेताओं ने नर्क में तब्दील कर दिया है। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक, वार्ड पार्षद, मेयर और मंत्री से सीधे सवाल करते हुए अपने वादे पूरे करने की मांग की। विनोद कुमार शर्मा ने अपनी बात रखते हुए कहा, "विधायक, पार्षद, मेयर और मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि अपना वादा पूरा करो और डंपिंग यार्ड हटाओ।" उन्होंने याद दिलाया कि जनप्रतिनिधि अब तक कम से कम 6 बार डंपिंग यार्ड हटाने का वादा कर चुके हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदला। निवासियों ने साफ कर दिया है कि अगर डंपिंग यार्ड को तुरंत नहीं हटाया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति ऐसी बन जाएगी कि किसी भी नेता या अधिकारी को सेक्टर 55 के पुल से नीचे उतरने नहीं दिया जाएगा।



















