दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर वर्षों से स्थित खेड़की दौला टोल प्लाजा को आखिरकार हटाने और शिफ्ट करने की आधिकारिक प्रक्रिया तेज हो गई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इस टोल प्लाजा को डिनोटिफाई करने की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसके बाद इसे मानेसर से आगे दिल्ली-जयपुर हाईवे पर स्थित कुकड़ोला गांव में स्थानांतरित किया जाएगा। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने मई 2025 में इस स्थानांतरण योजना को अपनी हरी झंडी दी थी। नए टोल प्लाजा के निर्माण पर कुल 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे पूरी तरह से आधुनिक तकनीक पर आधारित बनाया जाएगा।
खेड़की दौला से 12 किलोमीटर दूर कुकड़ोला में आकार लेगा नया प्लाजा
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और स्थानीय प्रशासन के बीच कई दौर की लंबी चर्चा के बाद कुकड़ोला के सेहरावन इलाके में नई जगह को अंतिम रूप दिया गया है। यह नया स्थान मौजूदा खेड़की दौला टोल प्लाजा से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। डिनोटिफिकेशन की प्रशासनिक और कागजी प्रक्रिया को पूरा करने में करीब तीन से चार महीने का समय लगेगा। इसके अलावा, नए स्थान पर टोल प्लाजा की जरूरी आधारभूत संरचना और मुख्य इमारत तैयार करने में लगभग चार से पांच महीने का वक्त लगने की संभावना है। पचगांव चौक के आसपास रोजाना 90 हजार से अधिक वाहनों की आवाजाही दर्ज की जाती है, जिसके कारण इस विशाल यातायात को संभालने के लिए काफी बड़े भूभाग की आवश्यकता महसूस की गई थी।
14 लेन का बूथलेस और मल्टी-लेन फ्री-फ्लो टोलिंग सिस्टम
कुकड़ोला में बनने वाला नया टोल प्लाजा पारंपरिक टोल बूथों से पूरी तरह अलग होगा। इसमें कुल 14 लेन बनाई जाएंगी, जो पूरी तरह से बूथलेस होंगी। इस नए टोल पर मल्टी-लेन फ्री-फ्लो टोलिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इस आधुनिक प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वाहनों को टोल का भुगतान करने के लिए एक सेकंड के लिए भी रुकना नहीं पड़ेगा। सेंसर और कैमरों की मदद से वाहन के गुजरते ही ऑटोमैटिक टोल कट जाएगा। यदि किसी वाहन के फास्टैग में पर्याप्त बैलेंस मौजूद नहीं रहता है, तो वाहन चालक को रोका नहीं जाएगा, बल्कि ऑटोमैटिक जुर्माने के साथ टोल राशि का चालान सीधे वाहन मालिक के पास भेजा जाएगा।
9 साल पुराना इंतजार और स्थानांतरण में हुई देरी के कारण
खेड़की दौला टोल प्लाजा को हटाने की मांग पिछले नौ वर्षों से लगातार उठ रही थी। वर्ष 2016 में बादशाहपुर में आयोजित एक जनसभा के दौरान स्थानीय नागरिकों की पुरजोर मांग पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस टोल प्लाजा को स्थानांतरित करने का सार्वजनिक ऐलान किया था। हालांकि, इस घोषणा के बावजूद यह मामला लगभग एक दशक तक अटका रहा। इस लंबी देरी के मुख्य कारणों में जमीन अधिग्रहण की समस्याएं, विभिन्न कानूनी विवाद, स्थानीय ग्रामीणों का कड़ा विरोध, वन विभाग से मंजूरी प्राप्त करने में लगने वाला समय और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का यह भी मानना है कि इस टोल प्लाजा के नए स्थान पर शिफ्ट होने से आसपास के अन्य टोल प्लाजा की फीस और शुल्क ढांचे पर भी असर पड़ सकता है।





















