झारखंड के कोडरमा जिले में चिकित्सा सेवा क्षेत्र से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां एक जटिल हाई रिस्क प्रेगनेंसी से जूझ रही महिला को बड़ी शल्य चिकित्सा यानी सिजेरियन ऑपरेशन से बचाकर सुरक्षित उपचार प्रदान किया गया। धनबाद और रांची जैसे बड़े शहरों के प्रमुख अस्पतालों से केवल सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह मिलने के बाद निराश हुई महिला ने स्थानीय स्तर पर आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। कोडरमा स्थित शीला रानी हॉस्पिटल एवं बांझपन सेंटर में गोल्ड मेडलिस्ट स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अलंकृता मंडल सिन्हा ने हिस्टेरोस्कोपी विधि द्वारा महिला का सफल इलाज किया। गर्भाशय के भीतर मौजूद असामान्य रुकावट को दूरबीन तकनीक से हटाकर बिना किसी बड़े ऑपरेशन के मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (MTP) की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
गर्भधारण में जटिलता और बड़े शहरों में मिली निराशा
मामले के विवरण के अनुसार, कोडरमा की निवासी एक महिला के गर्भ में लगभग तीन महीने का असामान्य भ्रूण विकसित हो रहा था। चिकित्सकीय जांच और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से गर्भसमापन यानी MTP कराना अत्यंत आवश्यक हो गया था। हालांकि, जब महिला ने विभिन्न जांच रिपोर्ट दिखाई, तो गर्भाशय में एक असामान्य दीवार यानी सेप्टम होने की पुष्टि हुई। इस शारीरिक बनावट के कारण सामान्य प्रक्रियाओं द्वारा गर्भसमापन करना अत्यधिक जोखिम भरा माना जा रहा था।
इसी वजह से कोडरमा के अलावा धनबाद और रांची के कई नामचीन महिला चिकित्सकों ने मरीज को सिजेरियन ऑपरेशन करवाने का ही एकमात्र विकल्प बताया। चूंकि महिला पेट पर चीरा लगवाकर बड़ा ऑपरेशन करवाने के लिए मानसिक रूप से बिल्कुल तैयार नहीं थी, इसलिए वह अन्य सुरक्षित और गैर शल्य विकल्पों की तलाश में लगातार डॉक्टरों से परामर्श लेती रही। रांची और धनबाद में हर जगह से केवल ऑपरेशन का सुझाव मिलने के बाद महिला अत्यधिक मानसिक तनाव और निराशा के साथ अपने घर वापस लौट रही थी।
डिजिटल खोज से मिली नई उम्मीद और उपचार की योजना
वापसी के सफर के दौरान महिला ने हार न मानते हुए अपने स्मार्टफोन पर ही हाई रिस्क प्रेगनेंसी के आधुनिक इलाज की सुविधाएं तलाशना शुरू किया। ऑनलाइन खोज के दौरान उन्हें सामंतो काली मंदिर के समीप स्थित शीला रानी हॉस्पिटल और वहां उपलब्ध उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी मिली। इसके तुरंत बाद मरीज अपने पति और परिवार के सदस्यों के साथ अस्पताल पहुंची और डॉ. अलंकृता मंडल सिन्हा से विस्तृत परामर्श लिया।
डॉ. अलंकृता ने मरीज की संपूर्ण चिकित्सकीय जांच की और उनकी भावी प्रजनन क्षमता तथा शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक विशेष योजना बनाई। डॉक्टर ने पारंपरिक बड़े ऑपरेशन के बजाय हिस्टेरोस्कोपी के माध्यम से वेजाइनल सेप्टम सर्जरी करने का साहसिक निर्णय लिया। इस अत्याधुनिक दूरबीन विधि में गर्भाशय और वजाइना के बीच बनी असामान्य दीवार को बिना किसी बाह्य चीरे के दूरबीन उपकरणों की सहायता से सफलतापूर्वक हटा दिया गया। इसके तुरंत पश्चात MTP की प्रक्रिया भी सुरक्षित रूप से संपन्न कर ली गई।
मरीज का अनुभव और मानवीय दृष्टिकोण से देखभाल
सफल इलाज के बाद मरीज ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह सिजेरियन की खबर से काफी डरी हुई थी और कई शहरों का चक्कर लगाने के कारण पूरी तरह से थक चुकी थी। उन्होंने कहा कि शीला रानी हॉस्पिटल में केवल व्यावसायिक रूप से सर्जरी करने पर जोर नहीं दिया गया, बल्कि मरीज की व्यक्तिगत सुरक्षा, भावी सेहत और मानसिक स्थिति को प्राथमिकता दी गई।
मरीज ने भावुक होकर बताया कि इलाज के दौरान डॉ. अलंकृता ने केवल एक चिकित्सक की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि एक मां और बड़ी बहन की तरह उनका हौसला बढ़ाया और डर दूर किया। प्रक्रिया के बाद मरीज पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रही है और उन्हें किसी भी प्रकार का शारीरिक दर्द या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं है।
छोटे शहरों में आधुनिक हिस्टेरोस्कोपी तकनीक का विस्तार
इस केस के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. अलंकृता मंडल सिन्हा ने स्पष्ट किया कि मरीज के गर्भाशय में मौजूद सेप्टम के कारण सामान्य तरीके से गर्भसमापन करना संभव नहीं था। दूरबीन यानी हिस्टेरोस्कोपी से उस दीवार को साफ करने के बाद ही MTP को सुरक्षित रूप से अंजाम दिया जा सका। डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2018 में ही कोडरमा में हिस्टेरोस्कोपी जैसी जटिल चिकित्सा सुविधा की शुरुआत की थी।
शुरुआती दिनों में संसाधनों, अत्याधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की भारी कमी थी। इसके बावजूद उन्होंने निरंतर प्रशिक्षण और कौशल विकास के जरिए अपनी टीम और सुविधाओं को मजबूत बनाया। उनका मुख्य उद्देश्य यही है कि क्षेत्र के मरीजों को जटिल महिला रोगों और बांझपन के इलाज के लिए बेवजह रांची, धनबाद या देश के अन्य बड़े मेडिकल सेंटरों की तरफ न भागना पड़े।
किफायती इलाज, त्वरित रिकवरी और गर्भाशय बचाने में मददगार
आर्थिक पहलुओं पर बात करते हुए डॉ. अलंकृता ने बताया कि महानगरों और बड़े शहरों के अस्पतालों में हिस्टेरोस्कोपी कराने का खर्च औसतन 40,000 रुपये से 50,000 रुपये तक आ जाता है। वहीं कोडरमा जैसे स्थान पर इस अत्याधुनिक उपचार को मात्र 20,000 रुपये से 25,000 रुपये के किफायती बजट में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
चिकित्सकीय दृष्टि से हिस्टेरोस्कोपी केवल गर्भसमापन में ही नहीं, बल्कि गर्भाशय और वजाइना के अंदर मौजूद किसी भी प्रकार की असामान्य झिल्ली, गांठ, सेप्टम या अन्य जटिल समस्याओं की सटीक पहचान और बिना चीरा-फाड़ा इलाज में बेहद प्रभावी है। अनेक मामलों में यह तकनीक महिलाओं को बेवजह बच्चेदानी निकालने की बड़ी सर्जरी से बचा लेती है। इसके अतिरिक्त, इस प्रक्रिया के बाद मरीज को सामान्य परिस्थितियों में केवल एक से डेढ़ दिन ही अस्पताल में रुकना पड़ता है, जिससे उनकी त्वरित रिकवरी संभव होती है। शीला रानी हॉस्पिटल में वर्तमान में IUI, हिस्टेरोस्कोपी, TVS अल्ट्रासाउंड, IVF और लैप्रोस्कोपी जैसी तमाम आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।




















