मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रिहाइशी क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित की जा रही व्यावसायिक गतिविधियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। सोमवार, 31 अगस्त को सुबह 9 बजे से नगर निगम की टीमों ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सीलिंग की कार्रवाई का आगाज किया। आवासीय कॉलोनियों में चल रहीं दुकानों, दफ्तरों और अन्य व्यावसायिक परिसरों पर यह सख्त कदम उठाया गया है। किसी भी तरह के विरोध या हंगामे की आशंका को देखते हुए प्रशासन की तरफ से चाक-चौबंद सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और पुलिस बल तैनात रखा गया है।
पहले चरण में 130 संपत्तियों पर होगी कार्रवाई
नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के पहले चरण में व्यापक स्तर पर संपत्तियों को चिह्नित किया गया है। शहर के 6 विधानसभा क्षेत्रों में फैले 16 अलग-अलग इलाकों में कुल 130 संपत्तियों को सील करने का लक्ष्य रखा गया है। निगम के आंकड़ों के अनुसार, भोपाल के रिहाइशी इलाकों में लगभग 62,000 व्यावसायिक संस्थान नियमों का उल्लंघन करके चलाए जा रहे हैं। अभियान से पहले नगर निगम ने ऐसे 8,264 प्रतिष्ठान संचालकों को आधिकारिक नोटिस जारी किए थे, जिसके बाद अब जमीन पर कार्रवाई की जा रही है। इस चरण में मुख्य रूप से आवासीय कॉलोनियों में चल रहे होटल, रेस्टोरेंट, कारखाने, गोदाम, पब, बार, जिम और मैरिज हॉल जैसे संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सर्वधर्म B सेक्टर से शुरुआत
सीलिंग की इस बड़ी कार्रवाई को अमलीजामा पहनाने के लिए नगर निगम के 500 से अधिक कर्मचारियों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 11 थानों की पुलिस टीमों को भी मौके पर तैनात रखा गया है। सोमवार सुबह कार्रवाई की शुरुआत हुजूर इलाके के सर्वधर्म B सेक्टर से हुई। यहाँ स्थित एक होटल के मालिक ने निगम की टीम के पहुँचते ही स्वयं अपना संस्थान बंद कर दिया। इसके बाद टीम ने कारगो कूरियर कंपनी पर कार्रवाई की, जहाँ संचालक को अपना सामान समेटने के लिए 10 मिनट का समय दिया गया और फिर परिसर को सील कर दिया गया। सर्वधर्म इलाके के कई अन्य व्यवसायियों ने भी नोटिस मिलने के बाद स्वयं अपनी दुकानें बंद कर लीं।
रहवासियों ने राहत जताई, दुकानदारों ने दर्ज कराया विरोध
नगर निगम के इस सख्त कदम पर स्थानीय निवासियों और व्यापारियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कॉलोनियों में रहने वाले लोगों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि आवासीय गलियों में दुकानें और दफ्तर खुलने से दिनभर यातायात बाधित रहता था। संकरी सड़कों पर गाड़ियाँ खड़ी होने के कारण स्कूल बसों और एम्बुलेंस तक का निकलना दूभर हो जाता था। दूसरी ओर, प्रभावित दुकान संचालकों ने अपनी चिंता व्यक्त की है। व्यापारियों का तर्क है कि वे नियमित रूप से नगर निगम को कमर्शियल टैक्स का भुगतान करते आ रहे हैं, ऐसे में बिना उचित विकल्प दिए उनके प्रतिष्ठानों को बंद कराना न्यायसंगत नहीं है।



















