देश के बड़े हिस्से में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है, जिसके कारण देश के विभिन्न राज्यों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। आने वाले समय में उत्तर, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश का सबसे व्यापक असर देखने को मिल सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने इस स्थिति को देखते हुए बिहार, पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय मैदानी क्षेत्रों और असम तथा मेघालय में अत्यधिक भारी वर्षा होने की चेतावनी जारी की है। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी तेज वर्षा के चलते आम जनजीवन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। दूसरी तरफ देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों यानी दिल्ली-एनसीआर में बादलों का डेरा बना रहेगा और रुक-रुक कर होने वाली बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मानसून को रफ्तार देने वाले तीन प्रमुख मौसमी सिस्टम
मौसम वैज्ञानिकों के विश्लेषण के अनुसार इस समय आसमान में कई ऐसे कारक एक साथ सक्रिय हैं जो मानसून की हवाओं को अत्यधिक शक्तिशाली बना रहे हैं। वर्तमान में मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति में सक्रिय है, जो श्रीगंगानगर से शुरू होकर हिसार, मेरठ, शाहजहांपुर, गोरखपुर, मुजफ्फरपुर और दक्षिण असम तक विस्तृत है। यह ट्रफ रेखा नमी से भरी हवाओं को मैदानी इलाकों की तरफ खींच रही है। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर सक्रिय एक पश्चिमी विक्षोभ और बिहार तथा बांग्लादेश के वायुमंडल में बना चक्रवाती परिसंचरण यानी साइक्लोनिक सर्कुलेशन इस मानसूनी तंत्र को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। इन तीनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव की वजह से अगले चौबीस घंटों के दौरान देश के कई राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश होने की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
पूर्वी भारत के राज्यों में बाढ़ और जलभराव की गंभीर आशंका
बिहार के अनेक जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का पूर्वानुमान लगाया गया है, जिससे वहां की नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी होने की आशंका है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय मैदानी इलाकों में भी लगातार तेज बारिश का दौर जारी रहने की बात कही गई है। इस निरंतर होने वाली वर्षा के कारण इन राज्यों के निचले इलाकों में पानी भरने, छोटी नदियों और नालों के उफान पर आने तथा स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसे हालात पैदा होने की गंभीर चुनौती सामने आ सकती है। ओडिशा और झारखंड में भी इस मौसमी हलचल का व्यापक असर दिखाई देगा, जहां गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने, तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है।
पूर्वोत्तर भारत में मूसलाधार बारिश का तांडव
पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए मानसूनी हवाएं यहां पूरी ताकत से बरसने को तैयार हैं। असम और मेघालय में कई क्षेत्रों के लिए बेहद भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे वहां बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। पर्वतीय राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी आकाशीय बिजली गिरने और अत्यधिक वर्षा होने की चेतावनी दी गई है। इन पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने और सड़क संपर्क टूटने की आशंका बनी रहती है, जिसके मद्देनजर स्थानीय प्रशासनों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन और मैदानी भागों में गरज-चमक
उत्तर भारत के राज्यों में भौगोलिक संवेदनशीलता के लिहाज से उत्तराखंड इस समय सबसे नाजुक स्थिति में है। मौसम विभाग ने इस पहाड़ी राज्य में लगातार मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी रखी है। पहाड़ों पर लगातार हो रही वर्षा के चलते विभिन्न क्षेत्रों में भूस्खलन होने, विशाल चट्टानों के खिसकने और अचानक आने वाली बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड का खतरा काफी बढ़ गया है। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विशेष तौर पर सतर्क रहने और मौसम साफ होने पर ही अपनी यात्रा को आगे बढ़ाने की सख्त सलाह दी गई है।
मैदानी इलाकों की बात करें तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून की मेहरबानी जमकर देखने को मिलेगी। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बलिया और वाराणसी सहित इसके आसपास के तमाम जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की प्रबल आशंका है, जिसके साथ ही भारी वर्षा भी दर्ज की जा सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश का सिलसिला लगातार जारी रहने की संभावना है।
दिल्ली-एनसीआर में सुहावना मौसम और तापमान की स्थिति
देश की राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोगों को सोमवार के दिन उमस भरी गर्मी से काफी हद तक राहत मिलने के आसार हैं। दिल्ली-एनसीआर में पूरे दिन आसमान में घने बादलों की आवाजाही लगी रहेगी और कई इलाकों में हल्की से लेकर मध्यम स्तर की बारिश होने की पूरी उम्मीद है। हालांकि लगातार और मूसलाधार बारिश होने की संभावना यहां थोड़ी कम है, लेकिन रुक-रुक कर होने वाली फुहारें वातावरण को ठंडा बनाए रखेंगी। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि आने वाले अगले सात दिनों तक दिल्ली के अधिकतम तापमान में कोई बहुत बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिलेगा। मानसून ट्रफ के असर से राजधानी का मौसम खुशनुमा रहेगा, हालांकि कुछ व्यस्त इलाकों में अचानक होने वाली तेज बारिश के कारण जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
मध्य और पश्चिम भारत में मानसूनी बादलों की सक्रियता
मध्य भारत के राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां लगातार जारी रहेंगी। इन क्षेत्रों के कुछ जिलों में आकाशीय बिजली गिरने और बादलों की तेज गर्जना होने की भी आशंका जताई गई है। पश्चिम भारत की बात करें तो गुजरात, सौराष्ट्र-कच्छ और मध्य महाराष्ट्र के हिस्सों में भी रह-रहकर मानसूनी फुहारें गिरती रहेंगी। इसके अतिरिक्त कोंकण और गोवा के तटीय क्षेत्रों में पंद्रह जुलाई से मानसूनी हवाओं के और अधिक तीव्र होने के स्पष्ट संकेत मिले हैं, जिससे वहां भारी बारिश का एक नया दौर शुरू हो सकता है।
दक्षिण भारत में अनोखा विरोधाभास, कहीं बारिश तो कहीं लू का प्रकोप
दक्षिण भारतीय प्रायद्वीप में मौसम के दो अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु के कई अंदरूनी हिस्सों में गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश होने का अनुमान है, वहीं दूसरी तरफ तटीय आंध्र प्रदेश में मानसून के सीजन के बावजूद भीषण लू यानी हीटवेव की स्थिति बनी रहने की आशंका है। इसके अलावा ओडिशा और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को गर्मी के साथ-साथ अत्यधिक उमस भरे मौसम का सामना करना पड़ेगा, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में तीस से पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की भी चेतावनी दी गई है।
समुद्री तटों पर उग्र हुआ मौसम, मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी
भारत के दोनों ओर स्थित समुद्री क्षेत्रों यानी अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में इस समय मौसमी गतिविधियां काफी उग्र हो चुकी हैं। अरब सागर में हवाओं की गति पैंतालीस से पचपन किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है, जिससे समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में भी पानी अशांत रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने इस उग्र होती स्थिति को देखते हुए मछुआरों को सलाह दी है कि वे अगले कुछ दिनों तक गहरे समुद्र में जाने से पूरी तरह परहेज करें ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।











