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न्यूजीलैंड राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में अंबाला के पवन दीप सिंह ने जीता गोल्ड मेडलहरियाणा
19 सित॰ 2026, 5:30 pm (58 मिनट पहले)· 1

न्यूजीलैंड राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में अंबाला के पवन दीप सिंह ने जीता गोल्ड मेडल

अंबाला कैंट के लालकुर्ती निवासी पवन दीप सिंह ने ऑकलैंड में आयोजित न्यूजीलैंड राष्ट्रीय वुशू प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य और देश का मान बढ़ाया है।

अंबाला छावनी के लालकुर्ती क्षेत्र के निवासी पवन दीप सिंह ने विदेशी जमीन पर अपने खेल कौशल का शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्णिम सफलता हासिल की है। ऑकलैंड स्थित नैटबॉल स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता वुशू कुंग फू फेडरेशन ऑफ न्यूजीलैंड की ओर से आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान हासिल कर उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ अंबाला और पूरे हरियाणा का मान बढ़ाया है। उनकी इस ऐतिहासिक कामयाबी के बाद अंबाला स्थित उनके पैतृक आवास पर शुभकामनाएं देने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है।

रजत पदक से स्वर्ण पदक तक का शानदार सफर

पवन दीप सिंह के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह मुकाबला नया नहीं था। इससे पिछले वर्ष भी उन्होंने इसी राष्ट्रीय चैंपियनशिप में अपनी चुनौती पेश की थी, जहां उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। उस समय मिली सीख और अनुभव को आधार बनाकर उन्होंने अपनी कमियों को दूर किया और इस बार सीधे स्वर्ण पदक पर सटीक निशाना साधा। खेल के प्रति उनका समर्पण बचपन के दिनों से ही काफी गहरा रहा है। महज छह वर्ष की छोटी सी उम्र में उनका रुझान विभिन्न खेलों की ओर बढ़ने लगा था। परिवार ने भी उनकी इस प्रतिभा को पहचाना और आगे बढ़ने के लिए लगातार हौसला बढ़ाया। उनके पिता बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत रहे हैं और वह स्वयं भी फुटबॉल के बेहतरीन खिलाड़ी रह चुके हैं, जिससे घर में शुरू से ही खेल का एक सकारात्मक माहौल बना रहा।

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कोचिंग और फिटनेस से युवाओं को जोड़ने की मुहिम

भारत में रहते हुए पवन दीप सिंह ने वुशू को न सिर्फ अपनी साधना बनाया, बल्कि इसे औपचारिक करियर का रूप भी दिया। उन्होंने पटियाला स्थित राष्ट्रीय खेल संस्थान यानी एनआईएस से वुशू खेल में एक वर्ष का विशेष डिप्लोमा पूरा किया। इसके बाद अंबाला में रहते हुए उन्होंने अपनी खेल एकेडमी संचालित की और साथ ही एक स्कूल में कोच की जिम्मेदारी भी बखूबी संभाली। खेल मैदान पर अपनी सेवाएं देते हुए उनका मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को खेलों से जोड़ना और उन्हें नशे जैसी घातक सामाजिक बुराइयों से दूर रखना था। उन्होंने जमीनी स्तर पर कई युवा खिलाड़ियों को तराशने में अहम योगदान दिया।

विदेश में नौकरी की व्यस्तता और खेल का गहरा जुनून

साल 2023 में पवन दीप सिंह वर्क वीजा पर रोजगार के सिलसिले में न्यूजीलैंड गए थे। वर्तमान समय में वह ऑकलैंड शहर में निवास कर रहे हैं और वहां एक सुरक्षा कंपनी में पेट्रोलिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। विदेश में एक सुरक्षा अधिकारी की नौकरी काफी कठिन और व्यस्त दिनचर्या वाली होती है, परंतु व्यस्त काम के बावजूद उन्होंने वुशू के प्रति अपने समर्पण को कभी कम नहीं होने दिया। वह ड्यूटी के घंटों के बाद नियमित अभ्यास करते हैं, शारीरिक फिटनेस का कड़ाई से ध्यान रखते हैं और समय-समय पर आयोजित होने वाली प्रमुख खेल प्रतियोगिताओं में पूरे दम-खम के साथ उतरते हैं।

परिवार और स्थानीय लोगों में अपार खुशी की लहर

उनकी इस स्वर्णिम सफलता पर उनकी माता निर्मल कौर ने बताया कि उनका बेटा जब छठी कक्षा में पढ़ता था, तभी से वह खेलों के साथ पूरी निष्ठा से जुड़ गया था। जब वह वर्ष 2023 में रोजगार के लिए न्यूजीलैंड रवाना हुआ, तब भी उसने परिवार को भरोसा दिलाया था कि वह काम के साथ अपने खेल को हमेशा जारी रखेगा। अब गोल्ड मेडल जीतने के बाद से ही उनके घर पर रिश्तेदारों, पड़ोसियों और खेल प्रेमियों के बधाई संदेशों का तांता लगा हुआ है। उनके भाई परमजीत सिंह ने बताया कि पवन ने स्कूली दिनों से ही वुशू प्रतियोगिताओं में कई मेडल अपनी झोली में डाले हैं। वह जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में अपनी मजबूत पहचान पहले ही स्थापित कर चुके हैं। परमजीत के अनुसार, उनका भाई आजीविका के लिए विदेश गया, लेकिन खेल के प्रति उसका जुनून आज भी उसी शिद्दत से बरकरार है।

इलाके के युवाओं के लिए बनी बड़ी प्रेरणा

क्षेत्र के पूर्व पार्षद नवीन यादव ने पवन दीप सिंह की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि लालकुर्ती के प्रतिभावान युवाओं ने पहले भी भिन्न-भिन्न खेलों में अपनी मेहनत से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। अब पवन दीप सिंह ने सुदूर न्यूजीलैंड में स्वर्ण पदक जीतकर इस पूरे क्षेत्र का गौरव सात समंदर पार पहुंचाया है। एक साधारण और छोटे से इलाके से निकलकर किसी युवा का अपनी निष्ठा और कठिन परिश्रम के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाना पूरे समाज के लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय है।

सवाल-जवाब

पवन दीप सिंह ने किस खेल और प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है?
उन्होंने वुशू कुंग फू फेडरेशन ऑफ न्यूजीलैंड द्वारा ऑकलैंड के नैटबॉल स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है।
पवन दीप सिंह मूल रूप से कहां के निवासी हैं?
वह हरियाणा के अंबाला कैंट स्थित लालकुर्ती क्षेत्र के रहने वाले हैं।
न्यूजीलैंड में पवन दीप सिंह क्या काम करते हैं?
वह 2023 में वर्क वीजा पर न्यूजीलैंड गए थे और वर्तमान में ऑकलैंड की एक सुरक्षा कंपनी में पेट्रोलिंग अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
क्या उन्होंने इससे पहले भी इस चैंपियनशिप में पदक जीता था?
हां, उन्होंने पिछले वर्ष भी इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था और तब उन्हें रजत पदक प्राप्त हुआ था।
पवन दीप सिंह के पास खेल से जुड़ी क्या शैक्षणिक योग्यता है?
उन्होंने एनआईएस पटियाला से वुशू खेल में एक वर्ष का डिप्लोमा किया है और भारत में खेल कोच के रूप में भी कार्य किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·3 मिनट पहले

पवन दीप सिंह की यह उपलब्धि महज़ एक खेल पदक नहीं, बल्कि एक प्रवासी भारतीय के रूप में उनके दृढ़ संकल्प और कार्य-संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण है। न्यूजीलैंड जैसे विकसित देश में सुरक्षा अधिकारी जैसी कड़ी और व्यस्त नौकरी करते हुए भी खेल के प्रति ऐसा समर्पण और राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना यह साबित करता है कि अनुशासन किसी भी भौगोलिक सीमा से बंधा नहीं होता। यह सफलता विदेशों में रह रहे हमारे युवाओं के लिए एक प्रेरणा है कि वे अपने पेशेवर संघर्षों के बीच भी अपनी कला और जुनून को जीवित रख सकते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 मिनट पहले

पवन दीप सिंह की यह सफलता केवल व्यक्तिगत खेल उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रवासी भारतीयों के उस मजबूत सामाजिक ताने-बाने को भी दर्शाती है जो विदेश में रहकर भी अपनी संस्कृति और अनुशासन को बनाए रखते हैं। एनआईएस पटियाला से प्रशिक्षण प्राप्त कर भारत में युवाओं को नशे से दूर रखने की उनकी पहल और अब न्यूजीलैंड में सुरक्षा अधिकारी के रूप में काम करते हुए चैंपियन बनना, यह रेखांकित करता है कि जमीनी स्तर का खेल प्रशिक्षण और सार्वजनिक नीति के तहत खेल को बढ़ावा देना किस प्रकार विदेशों में भी सकारात्मक परिणाम दे सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 मिनट पहले

पवन दीप सिंह की यह सफलता दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और खेल अनुशासन से कठिन परिस्थितियों पर भी विजय पाई जा सकती है। न्यूजीलैंड जैसे देश में सुरक्षा अधिकारी की व्यस्त और कठिन नौकरी के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना यह साबित करता है कि विदेशों में रह रहे हमारे युवा न सिर्फ अपनी आजीविका संवार रहे हैं, बल्कि देश की खेल प्रतिभा का परचम भी लहरा रहे हैं। उनका यह सफर युवाओं के लिए एक मजबूत प्रेरणा है।

Rohan Verma@rohan-verma·24 मिनट पहले

पवन दीप सिंह की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि यदि जमीनी स्तर पर युवाओं को सही खेल प्रशिक्षण और एनआईएस पटियाला जैसे संस्थानों की तकनीकी शिक्षा मिले, तो वे वैश्विक पटल पर असाधारण प्रदर्शन कर सकते हैं। अंबाला के एक छोटे से क्षेत्र से निकलकर ऑकलैंड तक का यह सफर न केवल प्रवासी भारतीयों की जीवटता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे खेल युवाओं को नशे जैसी सामाजिक कुरीतियों से दूर रखने का सबसे सशक्त माध्यम बन सकता है। आने वाले समय में ऐसे एथलीटों के अनुभवों का लाभ उठाकर स्थानीय स्तर पर खेल संस्कृति को और मजबूत किया जाना चाहिए।

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