भारतीय पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा का परिचय देते हुए पैरा वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में दो पदक अपने नाम किए हैं। दक्षिण कोरिया के चांगवोन शहर में खेली जा रही इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल SH1 स्टैंडिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत रजत पदक (सिल्वर मेडल) जीता। इसके साथ ही, उन्होंने भारतीय टीम के साथ मिलकर देश के लिए स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) भी हासिल किया। उनकी इस दोहरी जीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है।
2028 पैरालंपिक के लिए हासिल किया देश का पहला कोटा
चांगवोन में मिली इस बड़ी सफलता के साथ ही मोना अग्रवाल ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। वह साल 2028 में आयोजित होने वाले अगले पैरालंपिक खेलों के लिए भारत को पहला शूटिंग कोटा दिलाने वाली देश की पहली महिला निशानेबाज बन गई हैं। पैरालंपिक खेलों में कोटा हासिल करना बेहद कठिन माना जाता है, क्योंकि इसके लिए दुनिया भर के चुनिंदा एथलीटों के बीच कड़ा मुकाबला होता है। मोना की इस उपलब्धि ने भारतीय खेल जगत को एक बड़ी राहत दी है और 2028 की तैयारियों के लिए एक मजबूत शुरुआत प्रदान की है।
SH1 कैटेगरी की बारीकियां और कड़ी स्पर्धा
पैरा-निशानेबाजी में खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमताओं के आधार पर विभिन्न श्रेणियां निर्धारित की जाती हैं। मोना अग्रवाल SH1 कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करती हैं, जो उन निशानेबाजों के लिए होती है जिन्हें अपने पैरों में कोई समस्या होती है लेकिन उनके हाथों की कार्यप्रणाली पूरी तरह से सामान्य होती है। इस वर्ग में निशानेबाज बिना किसी मैकेनिकल स्टैंड के अपनी राइफल का वजन खुद उठाते हैं। 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग स्पर्धा में स्थिरता, ध्यान और शारीरिक संतुलन की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। हवा के मामूली झोंके या दिल की धड़कन के जरा से उतार-चढ़ाव से भी निशाना चूक सकता है। ऐसी परिस्थिति में भी मोना ने अपने अनुभव और गजब के संतुलन का प्रदर्शन करते हुए पदक जीते।
निशानेबाजी में नया सफर और पेरिस में सफलता
मोना अग्रवाल के खेल सफर की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उन्होंने साल 2021 के अंत में ही इस खेल को अपनाया था। बेहद कम समय में इस स्तर पर पहुंचना उनकी असाधारण प्रतिभा और अटूट संकल्प को दर्शाता है। खेल की शुरुआत करने के बाद, उन्होंने अपनी फिटनेस की चुनौतियों को दूर करने और शूटिंग की आधुनिक तकनीकों को सीखने में दिन-रात एक कर दिया। उनकी इस मेहनत का पहला बड़ा परिणाम पेरिस पैरालंपिक 2024 में दिखा, जहां उन्होंने कांस्य पदक (ब्रॉन्ज मेडल) जीतकर इतिहास रचा था। उनकी इस शानदार सफलता के लिए भारत सरकार ने उन्हें खेल के प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया है।
जयपुर की एकेडमी और कोच योगेश शेखावत का सहयोग
मोना की इस सफलता की नींव राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित एकलव्य स्पोर्ट्स शूटिंग एकेडमी में रखी गई थी। वहां उनके कोच योगेश शेखावत ने उनके खेल को एक नया आयाम दिया। योगेश शेखावत ने न केवल मोना की तकनीक को सुधारा, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी बेहद मजबूत बनाया ताकि वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के तनावपूर्ण माहौल में अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें। कोच योगेश शेखावत के अनुसार, मोना की सबसे बड़ी ताकत उनकी मेहनत करने की क्षमता है। वह किसी भी शॉट की प्रक्रिया को तब तक दोहराती रहती हैं जब तक कि वह पूरी तरह से परिपूर्ण न हो जाए। पेरिस में ब्रॉन्ज और अब चांगवोन में सिल्वर जीतने के बाद, मोना का अंतिम लक्ष्य आगामी पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है।


















