हरियाणा के झज्जर जिले में एक असामान्य वैवाहिक समारोह उस वक्त चर्चा का विषय बन गया, जब हत्या और संगीन अपराधों में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे एक सजायाफ्ता कैदी ने कंबोडिया की रहने वाली अपनी जीवनसंगिनी के साथ हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। बादली क्षेत्र के रहने वाले मैनपाल ढिल्ला को इस वैवाहिक कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए अदालत द्वारा निर्धारित नियमों के तहत केवल 12 घंटे की पैरोल दी गई थी। विवाह का यह पूरा आयोजन दुलीना स्थित एक निजी फार्म हाउस में संपन्न कराया गया, जहां आम मेहमानों से अधिक संख्या खाकी वर्दी में तैनात सुरक्षाकर्मियों की देखने को मिली।
सख्त सुरक्षा घेरे और तय समय-सीमा में संपन्न हुईं वैवाहिक रस्में
मैनपाल ढिल्ला को सुबह लगभग 8 बजे जेल की चारदीवारी से कड़ी सुरक्षा निगरानी में बाहर लाया गया। कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक, उसे शाम 8 बजे तक वापस कारागार में आमद दर्ज करानी थी, जिसके चलते पूरा विवाह कार्यक्रम बेहद सधे और तय वक्त के अनुसार संचालित किया गया। फार्म हाउस के मुख्य द्वार से लेकर अंदरूनी मंडप तक पुलिस का सख्त पहरा बैठाया गया था। विवाह समारोह में सम्मिलित होने पहुंचे हर एक रिश्तेदार और मेहमान की गहन जांच की गई और उनकी पहचान का पूरा ब्योरा दर्ज किया गया। सुरक्षा कारणों के मद्देनजर मीडियाकर्मियों को फार्म हाउस के भीतर जाकर कवरेज करने की इजाजत नहीं दी गई।
निमंत्रण पत्र पर दर्ज समय-सारिणी के अनुरूप दोपहर 12 बजे मेहमानों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी, जिसके पश्चात दोपहर 2 बजे पारंपरिक घुड़चढ़ी की रस्म अदा हुई और ठीक दोपहर 3 बजे बारात आयोजन स्थल की ओर आगे बढ़ी। समारोह में पहुंचे तकरीबन 500 से 600 रिश्तेदारों और परिजनों के लिए विभिन्न प्रकार के पारंपरिक पकवानों का प्रबंध किया गया था। इस सीमित समय-सीमा में सभी पारंपरिक रस्मों को पूरा कराने के बाद मैनपाल को समय पर पुनः जेल पहुंचा दिया गया।
कंबोडिया से भारत पहुंची मेटाचान, बच्चों और परिवार की मौजूदगी
इस विवाह में वधू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली मेटाचान विशेष रूप से कंबोडिया से भारत आई हैं। पारंपरिक हरियाणवी अंदाज में सजी-धजी मेटाचान ने विवाह के दौरान शरारा-गरारा पहना हुआ था और वे परिवार की महिलाओं के साथ बेहद प्रसन्न दिखाई दीं। मेटाचान और मैनपाल के कुल चार बच्चे हैं, जिनके नाम बाहुबली, भगत, आस्था और वंदना हैं। मेटाचान अपने तीन बच्चों को अपने साथ भारत लेकर आई हैं, जबकि उनकी एक बेटी वर्तमान में कंबोडिया में ही मौजूद है। मेटाचान ने बताया कि वे अपनी उस बेटी के साथ नियमित तौर पर दूरभाष पर संपर्क बनाए हुए हैं और लगातार बातचीत करती रहती हैं।
विवाह के अवसर पर बातचीत करते हुए मेटाचान ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि उन्हें बहुत खुशी महसूस हो रही है तथा सब कुछ ठीक चल रहा है। उन्होंने बताया कि उनके अपने माता-पिता और परिजन भी इस रिश्ते से संतुष्ट हैं। मेटाचान ने स्पष्ट किया कि वे अपने पति मैनपाल और ससुराल पक्ष के सदस्यों के साथ पूरी आत्मीयता और खुशी से रहना चाहती हैं।
सासू मां रोशनी ने दिया पारंपरिक आशीर्वाद, आठ साल बाद बेटे से मिला परिवार
विवाह के दौरान मैनपाल की माता रोशनी अपनी विदेशी बहू को स्थानीय परिवेश और पारंपरिक परिधान में देखकर भावुक और आनंदित नजर आईं। रोशनी ने अपनी बहू मेटाचान को पारंपरिक हरियाणवी अंदाज में सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने खुशी साझा करते हुए कहा कि आज बहुत खुशी की बात है कि बहू घर आई है।
रोशनी ने यह भी बताया कि परिवार को तकरीबन 8 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद अपने बेटे मैनपाल से आमने-सामने मिलने का यह अवसर हासिल हुआ है, जिससे पूरे कुनबे में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कंबोडिया से आई मेटाचान बहुत जल्द उनके परिवार के तौर-तरीकों, भाषा और परिवेश के साथ पूरी तरह घुल-मिल जाएगी।
पैरोल जंप, कंबोडिया में फरारी और भारत वापसी का आपराधिक इतिहास
मैनपाल ढिल्ला का आपराधिक इतिहास काफी पुराना और गंभीर रहा है। वर्ष 2007 में बहादुरगढ़ सदर थाने में उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अवैध हथियारों के उपयोग तथा आपराधिक षड्यंत्र रचने के संगीन आरोपों में मुकदमा दर्ज हुआ था। इन मामलों में अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद वर्ष 2013 में मैनपाल को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अतिरिक्त भी वह दो अन्य आपराधिक मुकदमों में दोषी करार दिया जा चुका है।
आजीवन कारावास भुगतने के दौरान मैनपाल को 17 जुलाई 2018 को हिसार सेंट्रल जेल से छह सप्ताह की पैरोल पर रिहा किया गया था। हालांकि, पैरोल की मियाद समाप्त होने के उपरांत वह जेल वापस लौटने के बजाय फरार हो गया और अवैध रूप से सीमा पार कर विदेश चला गया। काफी समय बाद यह खुलासा हुआ कि वह कंबोडिया में छिपकर रह रहा है। कंबोडिया में फरारी के दिनों के दौरान ही उसकी मुलाकात मेटाचान से हुई थी, जिसके बाद दोनों साथ रहने लगे थे।
सीबीआई, रेड नोटिस और प्रत्यर्पण के जरिए हुई थी गिरफ्तारी
पैरोल तोड़कर भागे अपराधी को वापस लाने के लिए हरियाणा पुलिस के आग्रह पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सक्रियता दिखाई और 6 नवंबर 2024 को इंटरपोल के जरिए मैनपाल के खिलाफ रेड नोटिस जारी कराया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान और कंबोडियाई कानून प्रवर्तन अधिकारियों के सहयोग से 24 जुलाई 2025 को मैनपाल को कंबोडिया में गिरफ्तार कर लिया गया।
कंबोडिया में कानूनी औपचारिकताओं के निपटारे के करीब डेढ़ महीने बाद 2 सितंबर 2025 को सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उसे कंबोडिया से वापस भारत लाया गया। भारत लाए जाने के पश्चात उसे पुनः जेल भेजकर उसकी अधूरी सजा को पूरा कराया जा रहा है। इसी निरंतर सजा के बीच उसने अपनी शादी की रस्मों के लिए अदालत में गुहार लगाई थी, जहां से उसे 12 घंटे की अस्थायी पैरोल की अनुमति दी गई।



















