हरियाणा के फरीदाबाद जिले में दयालपुर गांव से सोतई गांव की ओर जाने वाली संपर्क सड़क पर सफर करना इन दिनों बेहद जोखिम भरा साबित हो रहा है। करीब 20 गांवों को आपस में जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण ग्रामीण मार्ग से हर दिन हजारों ग्रामीण, कामकाजी लोग और स्कूली बच्चे बसों में सवार होकर निकलते हैं। हालांकि, सड़क की खस्ताहाल स्थिति और मार्ग में पड़ने वाली एक पुरानी पुलिया के जर्जर ढांचे ने स्थानीय लोगों की चिंता काफी बढ़ा दी है। आजादी के समय के आसपास बनी यह पुलिया आज तक बुनियादी मरम्मत से महरूम है, जिसके चलते राहगीरों को हर पल किसी अनहोनी का डर सताता रहता है।
दशकों पुरानी पुलिया पर नहीं है कोई सुरक्षा घेरा
इस मार्ग पर स्थित पुलिया का निर्माण जिस नहर पर किया गया है, उसमें आगरा कैनाल से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है। ग्रामीणों के अनुसार यह पुलिया 50 साल से भी अधिक पुरानी हो चुकी है और निर्माण के बाद से अब तक इसकी कोई ठोस मरम्मत नहीं कराई गई है। पुलिया के दोनों छोर पर सुरक्षा के लिहाज से न तो कोई मजबूत लोहे की ग्रिल लगाई गई है और न ही कोई सुरक्षा दीवार या कंक्रीट की बाउंड्री बनाई गई है। सर्दियों के दिनों में जब इलाके में घना कोहरा छा जाता है और दृश्यता बेहद कम हो जाती है, तब यह खुला ढांचा गहरे खतरे का सबब बन जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुरक्षा घेरा न होने से यहां पहले भी कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं घट चुकी हैं।
कागजों में 22 फुट चौड़ी सड़क मौके पर आधी बची
स्थानीय निवासी बबलू हुड्डा के अनुसार यह डामर का काला पक्का रास्ता है, जिसे आधिकारिक दस्तावेजों में 22 फुट चौड़ा दर्ज किया गया है। जमीनी हकीकत यह है कि मौके पर इस सड़क की वास्तविक चौड़ाई सिमटकर केवल 11 फुट के आसपास ही रह गई है। संकरी सड़क होने के कारण जब सामने से कोई बड़ा वाहन या स्कूल बस आती है, तो वाहनों को किनारे निकालना मुश्किल हो जाता है। इस क्षेत्र में अब नई औद्योगिक कंपनियां और फैक्ट्रियां भी स्थापित होने लगी हैं, जिससे आने वाले दिनों में यहां भारी व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही और ज्यादा बढ़ने वाली है। ग्रामीणों की मांग है कि भविष्य के दबाव को देखते हुए प्रशासन जल्द से जल्द इस सड़क का चौड़ीकरण कराए और पुलिया के दोनों किनारों पर मजबूत बाउंड्री तैयार करे।
केएमपी जाम होने पर बनता है बल्लभगढ़ का वैकल्पिक रास्ता
स्थानीय निवासी आकाश ने इस मार्ग की रणनीतिक उपयोगिता बताते हुए कहा कि जब कभी मच्छगर गांव की तरफ जाने वाला रास्ता बंद होता है या वहां भीषण जाम की स्थिति बनती है, तो कुंडली मानेसर पलवल एक्सप्रेसवे यानी KMP से आने और जाने वाले वाहन बल्लभगढ़ की ओर निकलने के लिए इसी दयालपुर-सोतई मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में इस वैकल्पिक मार्ग पर अचानक भारी वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ जाता है। आगे का रास्ता भी काफी लंबे अरसे से बुरी तरह टूटा हुआ है और गड्ढों में तब्दील हो चुका है, लेकिन आज तक इसके नए सिरे से निर्माण की सुध नहीं ली गई है।
स्ट्रीट लाइट न होने से रात में पैदल चलना भी दूभर
ग्रामीण समय सिंह हुड्डा ने चेतावनी देते हुए बताया कि पुलिया की हालत इतनी कमजोर हो चुकी है कि यह किसी भी दिन अचानक भरभराकर गिर सकती है। उन्होंने कहा कि वह पिछले 50 वर्षों से इस ढांचे को लगातार जर्जर होते देख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई तकनीकी सुधार नहीं किया गया है। इसके अलावा पूरे रास्ते पर प्रकाश या स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। रात के घने अंधेरे में पैदल चलने वाले राहगीर या दोपहिया चालक अक्सर गड्ढों और बिना रेलिंग वाली नहर के मुहाने का अंदाजा नहीं लगा पाते, जिससे उनके सीधे नहर में गिरने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेकर नई पुलिया बनाने और मार्ग की मरम्मत करने की अपील की है।
























