जापान के शहर आइची-नागोया में आयोजित हो रहे एशियन गेम्स 2026 के छठे दिन भारतीय दल ने पदकों की सूची में एक और सुनहरी कामयाबी जोड़ दी। निशानेबाजी की 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम प्रतियोगिता में हरियाणा के झज्जर जिले की रहने वाली युवा निशानेबाज सुरुचि इंद्र सिंह ने रेवाड़ी के साथी खिलाड़ी कमलजीत के साथ मिलकर सटीक निशाना साधा और देश की झोली में शानदार स्वर्ण पदक डाल दिया। इस महाद्वीपीय खेल प्रतियोगिता में भारतीय निशानेबाजों के सटीक प्रदर्शन की बदौलत भारत को इस बार का दूसरा स्वर्ण पदक हासिल हुआ है। इस जीत के साथ ही अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर दोनों युवा खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
सासरौली गांव में जश्न और परिजनों की खुशी
सुरुचि की इस बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि की खबर मिलते ही झज्जर स्थित उनके पैतृक गांव सासरौली में उत्सव जैसा माहौल बन गया। ग्रामीणों और परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे को पारंपरिक मिठाइयां खिलाकर अपनी खुशी जाहिर की। सुरुचि की मां सरोज देवी ने इस मौके पर कहा कि बेटी की कामयाबी ने पूरे परिवार का सीना चौड़ा कर दिया है और अपनी खुशी को शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि फाइनल मुकाबले के बाद सुरुचि से फोन पर बात हुई थी, जिसमें बेटी ने सबसे पहले उत्साह से पूछा कि क्या उन्होंने उसका मुकाबला टीवी पर देखा। क्वालिफिकेशन राउंड से लेकर फाइनल मुकाबले तक सुरुचि ने लगातार बेहद सधा हुआ और शानदार खेल दिखाया। जब बेटी जापान से देश वापस लौटेगी, तो दिल्ली एयरपोर्ट पर ढोल-नगाड़ों के साथ उसका भव्य स्वागत किया जाएगा और घर पहुंचने पर पारंपरिक तरीके से चूरमा खिलाया जाएगा।
कुश्ती के अखाड़े से शूटिंग रेंज तक का सफर
सुरुचि का जन्म 28 अप्रैल 2006 को झज्जर में हुआ था। उनके परिवार का पहले से ही खेलों से गहरा जुड़ाव रहा है। सुरुचि के पिता भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं, जहां उन्होंने 17 साल तक देश की सेवा की। ड्यूटी के दौरान गंभीर चोट लगने की वजह से उन्हें सेना की नौकरी समय से पहले छोड़नी पड़ी थी। पिता की दिली ख्वाहिश थी कि उनकी बेटी एक बेहतरीन पहलवान बने, इसलिए उन्होंने शुरुआत में सुरुचि को कुश्ती के अखाड़े में प्रशिक्षण के लिए भेजा था। हालांकि, अखाड़े में अभ्यास के दौरान सुरुचि को भी चोट लग गई थी। इस चोट के बाद परिवार ने तय किया कि वह अखाड़े से दूरी बनाकर दूसरे खेल को चुनें। इसके बाद महज 13 वर्ष की उम्र में सुरुचि ने निशानेबाजी का रुख किया और वहां अपनी लगन से पहचान बनानी शुरू की।
घर में तैयार की गई शूटिंग रेंज और भिवानी में कड़ा अभ्यास
सुरुचि भिवानी में स्थित गुरु द्रोणाचार्य शूटिंग अकादमी में मुख्य कोच सुरेश सिंह के कुशल मार्गदर्शन में अपनी तकनीक को लगातार निखार रही हैं। अकादमी के अलावा उन्होंने अपने अभ्यास में कोई रुकावट न आए, इसके लिए अपने भाई विशाल के साथ मिलकर घर पर ही एक शूटिंग रेंज तैयार कर ली। भाई विशाल ने बताया कि खेल प्रशिक्षण के लिए लगातार दूर आने-जाने में समय की काफी बर्बादी और परेशानी होती थी, इसलिए परिवार ने घर की चारदीवारी के भीतर ही अभ्यास रेंज का बेहतर प्रबंधन कर दिया। विशाल खुद भी अपनी बहन के साथ नियमित रूप से निशानेबाजी का कड़ा अभ्यास करते हैं। विशाल का कहना है कि उनकी बहन ने पूरे देश और परिवार का मान बढ़ाया है और आने वाली अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भी देश के लिए पदक जीतने का यह सिलसिला जारी रहेगा।
विश्व कप से एशियन गेम्स तक स्वर्णिम पदकों का सफर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रखने के बाद से ही सुरुचि ने लगातार शीर्ष मंचों पर शानदार प्रदर्शन किया है। वर्ष 2025 में ब्यूनस आयर्स में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। उसी वर्ष लीमा में हुए ISSF वर्ल्ड कप में उन्होंने व्यक्तिगत 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण जीतने के साथ ही 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में भी एक और स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसके बाद म्यूनिख में 2025 के ISSF वर्ल्ड कप में भी उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल में सोने पर कब्जा जमाया। दोहा में संपन्न 2025 ISSF वर्ल्ड कप फाइनल में सुरुचि ने 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण पदक हासिल करने के साथ-साथ 245.1 अंक का जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया था। वर्ष 2026 में भी उनका यह शानदार प्रदर्शन जारी रहा, जहां म्यूनिख ISSF वर्ल्ड कप में उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल का स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद नई दिल्ली में हुई 2026 एशियन शूटिंग चैंपियनशिप की 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था। अब एशियन गेम्स में मिला यह स्वर्ण पदक उनकी निरंतर मेहनत और लगन का जीवंत प्रमाण है।





















