हरियाणा कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी और कलह एक बार फिर खुलकर धरातल पर आ गई है। सिरसा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने अपनी ही पार्टी की वरिष्ठ नेता और स्थानीय सांसद कुमारी सैलजा के खिलाफ सोशल मीडिया के जरिए सीधा मोर्चा खोल दिया है। इस पूरे सियासी घमासान का मुख्य केंद्र आठ अक्तूबर से शुरू होने जा रहे कांग्रेस के लोकतंत्र बचाओ अभियान के तहत की गई संगठनात्मक नियुक्तियां हैं। सिरसा जिले में अभियान का प्रभार पूर्व मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह को सौंपे जाने के बाद सेतिया ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर दी है।
सलाह-मशविरे की कमी और नियुक्तियों पर उठाए तीखे सवाल
गोकुल सेतिया ने संगठनात्मक फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यदि उन्हें उचाना का प्रभारी बनाया जाता, तो क्या वहां से चुनाव लड़ने वालों से राय नहीं ली जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि सिरसा जिले में प्रभारी और प्रधान ने स्थानीय कांग्रेस विधायक से कोई सलाह-मशविरा करना जरूरी नहीं समझा। सेतिया का दावा है कि सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा के उचाना जाने के चंद दिनों के भीतर ही यह नियुक्ति तय हुई। उनका तर्क है कि कुमारी सैलजा पार्टी की वरिष्ठ नेता होने के साथ-साथ इलाके की सांसद भी हैं, इसलिए उनकी सहमति के बिना ऐसा फैसला संभव नहीं हो सकता। विधायक ने सीधे तौर पर कहा कि सांसद को उनसे क्या परेशानी है, इस बात का खुलकर खुलासा किया जाना चाहिए।
पुराने चुनावों की कड़वाहट और विश्वासघात के आरोप
विधायक गोकुल सेतिया ने सांसद पर पार्टी के साथ विश्वासघात करने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने पुराने घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान सांसद ने अपने करीबी साथी को उनके पक्ष में बैठाने का कोई प्रयास नहीं किया था। इसके अलावा, नगर परिषद चुनाव में भी उनके तमाम साथी कांग्रेस के आधिकारिक प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में डटे रहे और सांसद ने इन सब बातों पर आंखें मूंदे रखीं। सेतिया ने कहा कि पार्टी के अंदर उनके विरोधियों को लगातार जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पिछली चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए, क्योंकि उनकी नजर हर एक गतिविधि पर बनी हुई थी।
चौधरी बीरेंद्र सिंह के साथ राजनीतिक खींचतान
आठ अक्तूबर से शुरू होने वाले लोकतंत्र बचाओ अभियान के लिए चौधरी बीरेंद्र सिंह को सिरसा का प्रभारी बनाया गया है, जिसे लेकर गोकुल सेतिया ने असंतोष जताया है। सेतिया ने कहा कि बुजुर्ग होने के नाते वह बीरेंद्र सिंह का आदर करते हैं, लेकिन उनके बीच स्पष्ट राजनीतिक मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि बीरेंद्र सिंह को यह भली-भांति ज्ञात है कि उनके साथ पुरानी राजनीतिक खींचतान है। सेतिया ने दो-टूक कहा कि अगर इसके बावजूद उन्हें राजनीतिक पंगा लेने में रुचि है, तो सिरसा में उनका स्वागत है। प्रभारी पद पर चौधरी बीरेंद्र सिंह की ताजपोशी से खुद को आहत बताते हुए विधायक ने कहा कि वे पीठ पीछे वार करने में विश्वास नहीं रखते, बल्कि सीना ठोककर राजनीति करते हैं।



















