अचल संपत्ति या भूखंड खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा आर्थिक फैसला होता है। इस प्रक्रिया में यदि जमीन की रजिस्ट्री जाली या फर्जी निकल जाए, तो खरीदार की गाढ़ी कमाई फंस जाती है और वह गंभीर कानूनी उलझनों में घिर सकता है। संपत्ति के बाजार में कई बार कूटरचित दस्तावेजों, फर्जी हस्ताक्षरों अथवा विक्रेता की गलत पहचान प्रस्तुत करके अवैध रजिस्ट्री करा ली जाती है। ऐसे किसी भी धोखे से स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए लेन-देन फाइनल करने से पूर्व जमीन के पुराने रिकॉर्ड और कागजात की बारीकी से पड़ताल करना बेहद आवश्यक है। फरीदाबाद के सेक्टर-12 कोर्ट में विगत पांच वर्षों से वकालत कर रहीं एडवोकेट कविता वर्मा ने इस संबंध में कानूनी बारीकियों और जरूरी जांच प्रक्रियाओं को साझा किया है।
सीटीसी से समझें रजिस्ट्री की असली कड़ी
सिविल विवादों और संपत्ति मामलों में रजिस्ट्री की वास्तविकता परखने का प्राथमिक चरण सीटीसी यानी सर्टिफाइड ट्रू कॉपी प्राप्त करना है। इसके तहत संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय से रजिस्ट्री से जुड़े मूल दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति निकलवाई जाती है। इस प्रमाणित प्रति के जरिए ही जमीन के मालिकाना हक के हस्तांतरण की पूरी ऐतिहासिक कड़ी या चेन को देखा जा सकता है। एडवोकेट कविता वर्मा के अनुसार, यदि सीटीसी उपलब्ध नहीं होती है या रिकॉर्ड में नहीं मिलती, तो उस रजिस्ट्री के आधार और मालिकाना हक के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं।
डिजिटल माध्यम से जमीन के रिकॉर्ड का सत्यापन
डिजिटल दौर में भूमि दस्तावेजों का ऑनलाइन सत्यापन करना काफी सुगम हो गया है। जमीन की रजिस्ट्री संबंधी जानकारियों की ऑनलाइन पड़ताल करने के लिए जमाबंदी पोर्टल (Jawabandi.in) का सहारा लिया जा सकता है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज समेत भूखंड से जुड़े अन्य राजस्व रिकॉर्ड भी जांचे जा सकते हैं। इससे खरीदार को जमीन के पुराने सौदों, पिछले लेन-देन और दर्ज स्वामित्व की स्थिति को समझने में स्पष्टता मिलती है।
जालसाजी के सामान्य तरीके और धोखाधड़ी के रूप
प्रॉपर्टी के सौदों में फर्जीवाड़ा कई अलग-अलग तरीकों से अंजाम दिया जाता है। इसमें जमीन के स्वामित्व की झूठी कड़ी दिखाना या जाली दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री कराना प्रमुख है। कई प्रकरणों में मूल भूमि स्वामी के फर्जी दस्तखत कर दिए जाते हैं, अथवा उसकी जगह किसी अन्य फर्जी व्यक्ति को असली मालिक बनाकर रजिस्ट्रार के समक्ष खड़ा कर दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, यदि खरीदार ने पिछले रिकॉर्ड की ठीक से छानबीन नहीं की है, तो एक ही जमीन को दोबारा किसी अन्य व्यक्ति को बेचने के मामले भी सामने आते हैं।
दस्तावेजों में विसंगति पकड़ने का तरीका
कागजात में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को उजागर करने के लिए सबसे पहले सीटीसी और म्यूटेशन का बारीकी से मिलान करना चाहिए। इसके पश्चात तहसील कार्यालय से जमीन की पूरी ऐतिहासिक कड़ी निकाली जाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जमीन का राजस्व रिकॉर्ड मूल रूप से कहां से शुरू हुआ और समय के साथ किन-किन व्यक्तियों के नाम पर अंतरित हुआ। तहसील से प्राप्त इस संपूर्ण रिकॉर्ड श्रृंखला का परीक्षण करने के उपरांत ही यह तय हो पाता है कि रजिस्ट्री पूरी तरह वैध है या उसमें कोई हेरफेर किया गया है।
सौदा पक्का करने से पहले आवश्यक दस्तावेज
किसी भी भूखंड के लिए अग्रिम भुगतान या अंतिम समझौता करने से पहले कुछ बुनियादी कागजात का भौतिक सत्यापन अनिवार्य है। खरीदार को संपत्ति की पूर्व रजिस्ट्री, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) या स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी (SPA) की प्रमाणित जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। इसके साथ ही दाखिल-खारिज अर्थात म्यूटेशन और जमीन की फर्द का मुआयना करना आवश्यक है। यदि मौके पर जमीन का मालिक स्वयं उपस्थित होने का दावा कर रहा है, तो उसके पहचान पत्रों की पुख्ता जांच भी की जानी चाहिए।
धोखाधड़ी होने की स्थिति में कानूनी उपचार
यदि किसी कारणवश फर्जी रजिस्ट्री का शिकार हो जाते हैं, तो पीड़ित पक्ष तुरंत दीवानी अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। कोर्ट से तत्काल प्रभाव से स्टे यानी स्थगन आदेश लिया जा सकता है, ताकि विवादित जमीन में किसी तीसरे पक्ष का हित न जुड़े और आगे की अवैध बिक्री रोकी जा सके। इसके अतिरिक्त, फर्जीवाड़ा प्रमाणित होने पर पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, सक्षम अदालत में सिविल वाद दायर किया जा सकता है और सूट फॉर इंजंक्शन दाखिल करके अपने अधिकारों की सुरक्षा की जा सकती है।





















