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विदेश जाने के बजाय हरियाणा में रुके साहिल सपरा, लाखों का पैकेज छोड़कर शुरू की सस्ती दवा और मुफ्त किताबों की सेवाहरियाणा
6 अक्तू॰ 2026, 2:31 pm (1 घंटे पहले)· 0

विदेश जाने के बजाय हरियाणा में रुके साहिल सपरा, लाखों का पैकेज छोड़कर शुरू की सस्ती दवा और मुफ्त किताबों की सेवा

मल्टीनेशनल कंपनी में न्यूट्रीशन ऑफिसर रहे 34 वर्षीय साहिल सपरा ने कॉर्पोरेट करियर त्यागकर हरियाणा में जरूरतमंदों के लिए लागत मूल्य पर दवाइयां और छात्रों के लिए ओपन बुक बैंक शुरू किया है।

जहां आज अधिकांश युवा भारी वेतन और विदेश में बसने के सपने देखते हैं, वहीं हरियाणा के 34 वर्षीय साहिल सपरा ने एक बिल्कुल अलग राह चुनकर समाज सेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया है। किसान पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले साहिल के परिवार के कई सदस्य विदेशों में अच्छी नौकरियों पर पदस्थ हैं और एनआरआई हैं। उनके भाई कनाडा सहित अन्य देशों में कार्यरत हैं, जिसके चलते साहिल के सामने भी विदेश जाकर आकर्षक करियर बनाने का पूरा विकल्प मौजूद था। इसके बावजूद उन्होंने भारत में ही रहकर जमीनी स्तर पर जरूरतमंद लोगों की मदद करने का फैसला लिया।

मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ सेवा की राह

मूल रूप से फतेहाबाद जिले के टोहाना निवासी साहिल सपरा ने फार्मेसी की पढ़ाई पूरी की थी। अपनी उच्च शिक्षा के दम पर उन्होंने नेस्टले जैसी नामी मल्टीनेशनल कंपनी में न्यूट्रीशन ऑफिसर के पद पर काम किया। इस नौकरी में उन्हें लाखों रुपये का वेतन और शानदार कॉर्पोरेट जीवन मिल रहा था। हालांकि, उनके मन में हमेशा से समाज के वंचित तबके के लिए कुछ सार्थक करने की तीव्र इच्छा बनी हुई थी। अंततः उन्होंने साल 2019 में अपनी लाखों रुपये की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पूरी तरह जनकल्याण के कार्यों में उतर गए। वह अपनी निजी कमाई और पारिवारिक संपत्ति से मिलने वाली आय को पूरी तरह इन सामाजिक पहलों के संचालन में लगा रहे हैं।

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तेरा तेरा फाउंडेशन से लागत मूल्य पर दवाइयां

साल 2019 में समाज सेवा की शुरुआत करते हुए साहिल ने 'तेरा तेरा फाउंडेशन' की नींव रखी। इस संस्था के जरिए उन्होंने विभिन्न शहरों में 'रेट टू रेट' मेडिकल सेवा शुरू की, जिसका मूल उद्देश्य मरीजों तक न्यूनतम मूल्य पर आवश्यक दवाइयां पहुंचाना है। इस पहल की खासियत यह है कि जो दवा बाजार में सामान्य तौर पर ढाई सौ रुपये की मिलती है, वह यहां जरूरतमंदों को महज 30 रुपये के आसपास उपलब्ध कराई जाती है। वर्तमान में यह सस्ती मेडिकल सेवा अंबाला, करनाल, सिरसा और फतेहाबाद समेत हरियाणा के कई प्रमुख जिलों में संचालित हो रही है। इस सेवा का दायरा बढ़ाते हुए अब कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में भी नए केंद्र शुरू करने की तैयारी चल रही है। साहिल का स्पष्ट कहना है कि किसी भी व्यक्ति के लिए गंभीर बीमारी के समय दवाइयों की ऊंची कीमत इलाज में बाधा नहीं बननी चाहिए।

अंबाला में ओपन बुक बैंक और मुफ्त स्टेशनरी

सस्ती दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद साहिल ने शिक्षा के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाया है। अंबाला के सेक्टर-10 स्थित गुरुद्वारा साहिब में चल रहे औषधि केंद्र के साथ उन्होंने जरूरतमंद बच्चों के लिए एक 'ओपन बुक बैंक' स्थापित किया है। इस बुक बैंक में दो अलग-अलग अलमारियां रखी गई हैं, जिनमें से एक में पाठ्यक्रम से जुड़ी स्कूली किताबें और दूसरी में धार्मिक पुस्तकें व्यवस्थित की गई हैं। यह व्यवस्था किसी भी तरह की औपचारिक सदस्यता या फीस से पूरी तरह मुक्त है। कोई भी बच्चा यहां आकर अपनी जरूरत की किताब ले जा सकता है और अपनी कक्षा पूरी होने के बाद उसे वापस रखकर अगली कक्षा की पुस्तकें प्राप्त कर सकता है। जिन परिवारों के पास हर साल नई किताबें खरीदने का बजट नहीं होता, उनके लिए यह व्यवस्था एक बड़ा संबल बन रही है। इसके साथ ही साहिल ने छात्रों के लिए मुफ्त कॉपियों और पेन की भी व्यवस्था की है ताकि धन की कमी किसी की पढ़ाई न रोक सके।

युवाओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का आह्वान

साहिल इस पूरे सेवा कार्य को गुरु नानक देव जी का आशीर्वाद और संगत का निरंतर सहयोग मानते हैं। उनका कहना है कि इस कठिन राह पर उन्हें अपने परिवार और स्थानीय संगत दोनों का पूरा समर्थन मिला है। वर्तमान सामाजिक परिवेश पर चिंता व्यक्त करते हुए साहिल रेखांकित करते हैं कि आज समाज में आपसी विवाद और नशे जैसी गंभीर समस्याएं युवाओं को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में युवाओं को गलत रास्तों से हटाकर फिटनेस, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जोड़ना बेहद जरूरी है। उनका युवाओं को स्पष्ट संदेश है कि वे खुद पहल करें और अपनी कमाई या कीमती समय में से जितना भी संभव हो सके, समाज के उत्थान के लिए अवश्य योगदान दें।

सवाल-जवाब

साहिल सपरा कौन हैं और उन्होंने कौन सी नौकरी छोड़ी थी?
साहिल सपरा हरियाणा के फतेहाबाद जिले के टोहाना के रहने वाले हैं, जिन्होंने साल 2019 में नेस्टले कंपनी में न्यूट्रीशन ऑफिसर की लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर समाज सेवा शुरू की।
तेरा तेरा फाउंडेशन के मेडिकल केंद्रों पर दवाइयां किस दर पर मिलती हैं?
इस संस्था के केंद्रों पर दवाइयां लागत मूल्य यानी रेट टू रेट दी जाती हैं, उदाहरण के तौर पर बाजार में 250 रुपये की मिलने वाली दवा यहां लगभग 30 रुपये में मिल जाती है।
वर्तमान में यह सस्ती दवा सेवा हरियाणा के किन जिलों में चल रही है?
यह सुविधा वर्तमान में अंबाला, करनाल, सिरसा और फतेहाबाद में संचालित हो रही है, जबकि कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में इसे जल्द शुरू करने की तैयारी है।
अंबाला में ओपन बुक बैंक की क्या व्यवस्था है?
अंबाला सेक्टर-10 गुरुद्वारा साहिब में संचालित इस बुक बैंक में बिना किसी शुल्क या सदस्यता के बच्चे स्कूली और धार्मिक किताबें ले सकते हैं तथा मुफ्त कॉपी-पेन भी प्राप्त कर सकते हैं।
साहिल सपरा अपनी समाज सेवा का खर्च कैसे उठाते हैं?
साहिल अपनी खुद की कमाई और पारिवारिक संपत्ति से होने वाली नियमित आय का उपयोग इन सभी सामाजिक व जनकल्याणकारी सेवाओं को चलाने में करते हैं।
साहिल सपरा ने युवाओं के लिए क्या संदेश दिया है?
उन्होंने युवाओं से नशे और विवादों से दूर रहकर फिटनेस, शिक्षा और समाज सेवा से जुड़ने तथा अपनी कमाई व समय का कुछ हिस्सा समाज को देने का आग्रह किया है।
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टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·5 मिनट पहले

लाखों का पैकेज छोड़कर समाज सेवा करना अच्छी बात है, पर बिना किसी बड़े फंड या सरकारी मदद के यह मॉडल लंबे समय तक कैसे टिकेगा? निजी संपत्ति और बचत भी एक दिन खत्म हो ही जाती है।

Ravikash Gupta@ravikash·24 मिनट पहले

ढाई सौ रुपये की दवा सिर्फ़ तीस रुपये में मिलना अपने आप में बड़ी बात है। काश ऐसी व्यवस्था हर शहर में हो जाती।

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 मिनट पहले

रविकेश जी, बिल्कुल सही कहा आपने। ऐसी पहल सचमुच बहुत कम देखने को मिलती है।

Rohan Verma@rohan-verma·45 मिनट पहले

लाखों का पैकेज छोड़कर ऐसे ज़मीनी काम में उतरना वाकई हिम्मत का काम है, आज के दौर में ऐसा सोचना भी बहुत बड़ी बात है। पर एक बात समझ नहीं आई कि इतनी कम कीमत पर दवाइयां देने के बाद उनका फाउंडेशन आगे लंबे समय तक इस खर्च को कैसे संभाल पाएगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·44 मिनट पहले

रोहन भाई, 250 रुपये की दवाई सीधे 30 रुपये में मिलना वाकई चौंकाने वाला आंकड़ा है।

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