फरीदाबाद के सोतई गांव में किसानों का आंदोलन अब छब्बीसवें दिन में प्रवेश कर चुका है। अपनी जमीन के अधिग्रहण के बदले मुआवजे की मांग को लेकर किसान दिन-रात धरने पर बैठे हुए हैं। इस बीच अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई, जहां नगर निगम फरीदाबाद की ओर से एक नई अर्जी दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। किसानों का आरोप है कि इस नए आवेदन के माध्यम से नगर निगम अपने पहले के जवाब में फेरबदल करने की कोशिश कर रहा है। किसानों का यह भी कहना है कि अभी तक मामले से जुड़े आवश्यक दस्तावेज भी अदालत में पेश नहीं किए गए हैं।
जेवर एयरपोर्ट के लिए हुआ था जमीन अधिग्रहण
इस पूरे विवाद की जड़ जेवर एयरपोर्ट के लिए किया गया जमीन का अधिग्रहण है। एडवोकेट राजकुमार भाटी के अनुसार, सोतई गांव से आए इन किसानों की जमीनों को जेवर एयरपोर्ट परियोजना के लिए अधिग्रहित किया गया था, लेकिन इसके एवज में इन्हें अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। मुआवजे की इसी राशि को पाने के लिए सभी प्रभावित लोग आंदोलन की राह पर हैं और लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
अदालत में किसानों ने रखी अपनी बात
सुनवाई के दौरान किसान अदालत में पेश हुए और अपनी फाइलों के साथ दस्तावेज प्रस्तुत किए। सरकारी नीतियों के अनुसार अदालत में पहुंचे इन बारह सेक्टरों के किसानों के पास अपनी जमीन के पूरे कागजात मौजूद हैं। राजस्व रिकॉर्ड में भी जमीन इन्हीं किसानों के नाम पर दर्ज है। इसके बावजूद तय समय पर मुआवजा राशि न मिलने के कारण सभी लोग गहरी परेशानी और मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं।
जमीनों के बढ़े हुए दामों से भारी वित्तीय नुकसान
किसान पक्षों का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में जमीनों के बाजार भाव तीन से चार गुना तक बढ़ चुके हैं, जबकि मुआवजा केवल एक गुना दर के हिसाब से आंका जा रहा है। इससे किसानों को भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है। समय पर भुगतान न मिलने के कारण किसानों में गहरा रोष व्याप्त है। अदालत में सुनवाई के दौरान किसानों का पक्ष विस्तार से सुना गया और मामले की त्वरित सुनवाई के निर्देश देने की मांग की गई।
भूख हड़ताल पर बैठने की थी तैयारी
किसान नेता बबलू हुड्डा ने बताया कि आज उनके धरने का छब्बीसवां दिन पूरा हो गया है। इससे पहले सभी ने मिलकर यह तय किया था कि आज का प्रदर्शन सोतई गांव के साथ-साथ न्यायाधीश के कक्ष के बाहर भी किया जाएगा। आज किसान भूख हड़ताल करने के इरादे से आए थे, लेकिन वकील के माध्यम से उनकी मुलाकात न्यायाधीश से हो गई, जहां उन्होंने अपनी सारी बातें खुलकर रखीं।
साल 2022 से मुआवजे का इंतजार
किसानों ने न्यायाधीश को बताया कि सरकार ने उनकी जमीन का अधिग्रहण साल 2022 में किया था और अब साल 2026 चल रहा है जो समाप्ति की ओर है। इस लंबे अंतराल के बाद भी उन्हें मुआवजे के नाम पर एक रुपया तक नहीं मिला है। किसानों का दावा है कि अधिग्रहित जमीन पूरी तरह से उनकी है और इसका एक भी सिंगल डॉक्यूमेंट न तो नगर निगम फरीदाबाद के पास है और न ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पास है।
साल 2022 और 2026 के रेट में जमीन-आसमान का अंतर
किसानों ने अदालत के समक्ष यह भी बात रखी कि साल 2022 और मौजूदा साल 2026 के जमीन के भावों में जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है। जो जमीन पहले एक एकड़ की कीमत रखती थी, आज वह केवल सौ गज के बराबर हो गई है। दूसरी तरफ से कोई ठोस गवाह या सबूत पेश नहीं किया जा रहा है, जिससे यह साफ साबित होता है कि जमीन के असली मालिक यही किसान हैं।
जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, धरना रहेगा जारी
सोतई गांव के निवासी कैलाश ने बताया कि गांव के सभी बुजुर्ग और युवा पिछले छब्बीस दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं और रोजाना अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। वे कोई भी अनुचित मांग नहीं कर रहे बल्कि अपनी ही जमीन का हक मांग रहे हैं। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिल जाता और सरकार उनकी बात मान नहीं लेती, तब तक यह शांतिपूर्ण धरना इसी तरह लगातार जारी रहेगा।




















