फरीदाबाद को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिले एक दशक बीत चुका है, लेकिन इसके ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। सोतई गांव से बहबलपुर गांव को जोड़ने वाला मुख्य रास्ता बीते कई सालों से बदहाल अवस्था में पड़ा हुआ है। यह मार्ग केवल दो गांवों के बीच का संपर्क सूत्र नहीं है, बल्कि फतेहपुर बिल्लौच होते हुए पलवल तक जाता है और क्षेत्र के 20 से भी अधिक गांवों के निवासियों के आवागमन का मुख्य जरिया है। सड़क की मरम्मत न होने और जगह-जगह गिट्टी बिखरे रहने के कारण स्थानीय ग्रामीणों को रोजमर्रा की आवाजाही में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
दो वर्षों से अधूरा पड़ा है सड़क निर्माण का कार्य
सोतई गांव के स्थानीय निवासी आकाश तेवतिया का कहना है कि जब से उनके गांव को नगर निगम की सीमा के तहत शामिल किया गया है, तब से यहां की स्थितियां लगातार बिगड़ती चली गई हैं। आकाश तेवतिया के अनुसार जिस सड़क पर ग्रामीण निर्भर हैं, उस पर करीब दो साल पहले गिट्टी डाली गई थी। इसके बाद निर्माण कार्य को अधूर छोड़ दिया गया। समय बीतने के साथ अब वह गिट्टी उखड़कर सड़क पर फैल चुकी है। इस बिखरी हुई गिट्टी के कारण दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर जाते हैं और आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। सड़क की इतनी बुरी हालत हो चुकी है कि ग्रामीणों ने अब इस रास्ते से गुजरना कम कर दिया है।
सफाई व्यवस्था ध्वस्त, तालाब और नालियां ओवरफ्लो
गांवों में बुनियादी ढांचे का संकट केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। सोतई और आसपास के क्षेत्रों में जल निकासी और स्वच्छता की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। गांव का मुख्य जोहड़ यानी तालाब गंदे पानी से पूरी तरह भर चुका है और उसका पानी सड़कों पर ओवरफ्लो हो रहा है। स्थानीय निवासी संदीप कुमार बताते हैं कि गांव की नालियों की नियमित सफाई करने के लिए कोई सफाई कर्मचारी तैनात नहीं है। सफाई न होने से पूरे क्षेत्र में लगातार दुर्गंध फैली रहती है और मच्छर पनप रहे हैं। संदीप कुमार का मानना है कि जब तक गांवों का प्राथमिक विकास नहीं होगा, तब तक किसी भी शहर को कागजों पर स्मार्ट सिटी घोषित करने का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
नगर निगम विलय और राजनीतिक खींचतान का असर
किसान नेता बबलू हुड्डा ने इस बदहाली के पीछे प्रशासनिक और राजनीतिक वजहों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल के दौरान 24 गांवों को जबरन नगर निगम फरीदाबाद के दायरे में लाया गया था। ग्रामीणों का तर्क है कि जब तक गांवों में पंचायती व्यवस्था और सरपंच थे, तब तक स्थानीय स्तर पर विकास कार्य सुचारू रूप से होते थे। नगर निगम में शामिल होने के बाद न तो वार्ड पार्षद गांव की सुध ले रहे हैं और न ही निगम के अधिकारी धरातल पर कोई काम करवा रहे हैं।
विधायक की ग्रांट रोकने के आरोप से गरमाया मुद्दा
यह पूरा इलाका पृथला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां से कांग्रेस पार्टी के रघुवीर सिंह तेवतिया विधायक हैं। किसान नेता बबलू हुड्डा का दावा है कि विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया लगभग 70 हजार वोट हासिल करके चुनाव जीते थे और उन्होंने विधानसभा में भी इस सड़क तथा ग्रामीण समस्याओं का मुद्दा उठाया था। नियम के अनुसार विकास कार्यों के लिए प्रत्येक विधायक को सालाना एक करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया जाता है। हालांकि, आरोप लगाए जा रहे हैं कि मौजूदा सैनी सरकार की ओर से विपक्षी विधायक को पिछले तीन सालों से विकास अनुदान जारी नहीं किया गया है। बजट के अभाव में क्षेत्र के बुनियादी काम पूरी तरह रुके पड़े हैं।
ग्रामीण विकास के दावों और हकीकत में अंतर
वर्ष 2014 में फरीदाबाद को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल किया गया था और राष्ट्रीय स्तर पर 2047 तक विकसित भारत के निर्माण तथा 'सबका साथ, सबका विकास' जैसे नारों की बात की जाती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह हमेशा कहा करते थे कि देश के विकास का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है। देश की रक्षा करने वाले जवान और खेल मैदानों में पदक जीतने वाले खिलाड़ी अक्सर इन्हीं गांवों से आते हैं। इसके बावजूद, 20 गांवों को जोड़ने वाली इस प्रमुख सड़क की उपेक्षा प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है।


















