मेघालय के दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिले में वयस्कों को साक्षर बनाने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जा रही है। उल्लास वयस्क साक्षरता कार्यक्रम के तहत जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता घर-घर जाकर सर्वेक्षण कर रहे हैं। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य उन वयस्कों की पहचान करना है जो पढ़-लिख नहीं सकते और उन्हें बुनियादी शिक्षा तथा जीवन कौशल से जोड़ना है। कार्यकर्ता लोगों का पंजीकरण कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रहे हैं।
साक्षरता अभियान का राष्ट्रीय ढांचा और लक्ष्य
यह स्थानीय अभियान भारत सरकार के एक बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है। इसे नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम) के तहत लागू किया जा रहा है, जो साल 2022 से 2027 तक संचालित होना है। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन लोगों को शिक्षित करना है जो साक्षर नहीं हैं। इस आयु वर्ग पर ध्यान केंद्रित करके सरकार उन लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है जो बचपन में किसी कारणवश बुनियादी शिक्षा से वंचित रह गए थे।
जमीनी स्तर पर प्रयास और स्थानीय संपर्क
इस कार्यक्रम को धरातल पर उतारने के लिए शिक्षकों और समन्वयकों का एक मजबूत नेटवर्क सक्रिय है। जिले के 37 क्लस्टर रिसोर्स सेंटर्स के तहत तैनात क्लस्टर रिसोर्स सेंटर कोऑर्डिनेटर्स (CRCC) और वॉलंटियर टीचर्स (VT) गांवों का दौरा कर रहे हैं। ये कार्यकर्ता स्थानीय समुदायों के बीच जाकर शिक्षार्थियों की पहचान कर रहे हैं, उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक कर रहे हैं और फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी असेसमेंट टेस्ट (FLNAT) के लिए उनका पंजीकरण कराने में मदद कर रहे हैं। यह मूल्यांकन परीक्षा नए शिक्षार्थियों की प्रगति को मापने का काम करती है। यह संपर्क अभियान अगालग्रे, अंपाती, अराकगिट्टिम और मातालॉग्रे सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैले संकुल केंद्रों के तहत चलाया गया है।
सामुदायिक सहभागिता और जन जागरूकता कार्यक्रम
उल्लास अभियान की सफलता स्थानीय लोगों और वहां के पारंपरिक नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी पर टिकी है। इसके लिए आयोजकों द्वारा पारंपरिक ग्राम प्रधानों, जिन्हें नोकमा और गांवबूढ़ा कहा जाता है, के साथ बैठकें की जा रही हैं। इसके अलावा लोगों को जागरूक करने के लिए पर्चे बांटे जा रहे हैं और साक्षरता रैलियां निकाली जा रही हैं। इसी कड़ी में 9 सितंबर को बेतासिंग ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गोलदातग्रे गांव में नव-शिक्षार्थियों के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन लोगों का हौसला बढ़ाना था जिन्होंने हाल ही में पढ़ना-लिखना शुरू किया है।
युवाओं की भागीदारी और प्रशासनिक तालमेल
जिले के स्कूलों ने भी इस साक्षरता अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उल्लास साक्षरता पखवाड़े के तहत विभिन्न विद्यालयों के छात्रों ने साक्षरता रैलियों में हिस्सा लिया। इसके साथ ही बच्चों में रचनात्मकता बढ़ाने और जीवन भर सीखने की आदत को बढ़ावा देने के लिए प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। मुरचापानी और सलमानपरा संकुल केंद्रों के तहत ड्राइंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूली बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रशासनिक स्तर पर कार्यक्रम की समीक्षा करने और इसे मजबूत बनाने के लिए एक जिला स्तरीय समन्वय बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में उपायुक्त, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स (BDO), जिला स्कूल शिक्षा अधिकारी (DSEO), उप-जिला स्कूल शिक्षा अधिकारी (SDSEO) और ब्लॉक मिशन कोऑर्डिनेटर्स (BMC) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
साक्षरता के साथ व्यावहारिक जीवन कौशल पर ध्यान
उल्लास पहल का दायरा केवल बुनियादी अक्षर ज्ञान, लेखन और अंकगणित तक ही सीमित नहीं है। इसे वयस्कों के जीवन को बेहतर बनाने वाली एक व्यापक योजना के रूप में तैयार किया गया है। इसमें वयस्क शिक्षार्थियों को डिजिटल माध्यमों का उपयोग सिखाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि वे आज की डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रूप से भाग ले सकें। इसके अलावा उन्हें दैनिक जीवन के लिए आवश्यक व्यावहारिक कौशल भी सिखाए जा रहे हैं। इसका अंतिम उद्देश्य वयस्कों के लिए निरंतर सीखते रहने के अवसर पैदा करना है ताकि वे बदलते समय के साथ कदम से कदम मिला सकें।



















