दैनिक राशिफल 28 अक्टूबर: जानिए मेष से मीन राशि तक सभी जातकों के लिए कैसा रहेगा कल का दिनलिंकन में आकिब नबी की घातक स्विंग, चौथे दिन संकट में फंसी कीवी टीमसर्दियों में गाय और भैंस से चाहिए ज्यादा दूध, तो अभी से शुरू कर लें ये खास तैयारियांमहाराष्ट्र की पारंपरिक पूरन पोली: त्योहारों की मिठास और संस्कृति का अनूठा प्रतीक1 नवंबर को कर्क राशि में सजेगा चंद्र-मंगल योग, इन चार राशियों के जीवन में बरसेगी धन-दौलतलाइव: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार और एसआईआर के फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली, राहुल गांधी और कर्नाटक मतदाता सूची अपडेटकृति सेनन और वरुण धवन फिर मचाएंगे धमाल, अमर कौशिक संग अचानक मुलाकात ने बढ़ाई 'भेड़िया 2' की उम्मीदेंकरवा चौथ के मौके पर झटपट और लंबे समय तक टिकने वाला मेकअप चाहिए? ये 7 बेहतरीन किट्स बचाएंगी समय, कीमत मात्र ₹270 से शुरूकिस्मत के भरोसे नहीं बैठते इन 3 राशियों के लोग, मेहनत और लगन से खुद लिखते हैं अपनी तकदीरनितेश तिवारी की रामायण में शत्रुघ्न बने नितीश शर्मा, शार्प फीचर्स देख कार्तिक आर्यन से होने लगी तुलना
आंगन की सुंदरता बढ़ाने वाले मॉस रोज में छिपे हैं कई औषधीय गुण, बिना डॉक्टरी परामर्श इस्तेमाल से बचेंस्वास्थ्य
20 सित॰ 2026, 9:05 pm (37 दिन पहले)· 1

आंगन की सुंदरता बढ़ाने वाले मॉस रोज में छिपे हैं कई औषधीय गुण, बिना डॉक्टरी परामर्श इस्तेमाल से बचें

घरों और बगीचों में खिलने वाला मॉस रोज न केवल सजावट के काम आता है, बल्कि इसमें सूजन रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं। हालांकि किसी भी बीमारी या समस्या में इसका बिना चिकित्सकीय परामर्श इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

गोंडा के रिहायशी इलाकों के आंगनों और बगीचों में अक्सर चटक लाल, गुलाबी और कई आकर्षक रंगों के फूलों से सजा एक पौधा सरलता से देखा जा सकता है। वानस्पतिक जगत में पोर्टुलाका ग्रैंडिफ्लोरा और आम बोलचाल में मॉस रोज के नाम से पहचाना जाने वाला यह पौधा मुख्य रूप से सजावटी उद्देश्य से रोपा जाता है। अपनी सहज सुंदरता के अलावा यह वनस्पति अपने संभावित औषधीय गुणों के चलते भी आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों और पारंपरिक चिकित्सा चर्चाओं का विषय रही है।

वैज्ञानिक अध्ययन और सूजन रोधी प्रभाव

वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति के अनुसार इस पौधे के भीतर मौजूद प्राकृतिक तत्वों पर सूजन को कम करने वाले संभावित प्रभावों को लेकर शोध कार्य किए गए हैं। वैज्ञानिक परीक्षणों में इसके अर्क के भीतर मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों की बारीकी से पड़ताल की गई है। हालांकि इन वैज्ञानिक अध्ययनों का कतई यह अर्थ नहीं है कि शरीर में सूजन दिखने या कोई अन्य शारीरिक व्याधि होने पर सीधे इस पौधे का सेवन कर स्व-उपचार शुरू कर दिया जाए। किसी भी प्रकार की चिकित्सीय समस्या के समाधान के लिए योग्य चिकित्सक का मार्गदर्शन लेना अत्यंत अनिवार्य है।

ये भी पढ़ें

एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों की मौजूदगी

पोर्टुलाका ग्रैंडिफ्लोरा के रासायनिक संघटन में कुछ ऐसे यौगिक भी पाए गए हैं जो एंटीऑक्सीडेंट विशेषताओं से संपन्न हैं। शरीर के भीतर ऑक्सीडेटिव तनाव से उत्पन्न होने वाले दुष्प्रभावों के विरुद्ध कार्य करने में एंटीऑक्सीडेंट यौगिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वैज्ञानिक समुदाय इस पौधे के इन्हीं सक्रिय तत्वों के जैविक प्रभावों को समझने के लिए लगातार शोध में जुटा हुआ है।

त्वचा की सामान्य परेशानियों में पारंपरिक उपयोग

पारंपरिक घरेलू और लोक चिकित्सा पद्धतियों में पोर्टुलाका की हरी पत्तियों का उपयोग त्वचा से जुड़ी हल्की-फुल्की दिक्कतों में किए जाने के संदर्भ मिलते हैं। अक्सर इन पत्तियों को पीसकर एक लेप तैयार किया जाता है और उसे त्वचा की सतह पर लगाया जाता है। मामूली खरोंच, छोटे कट अथवा हल्की चोट के मामलों में इस लेप को लगाने की लोक परंपरा रही है। इसके अतिरिक्त त्वचा पर महसूस होने वाली हल्की खुजली, सतही लालिमा और जलन के शमन हेतु भी कई इलाकों में इसका उपयोग देखा गया है। परंतु खुले घाव, गंभीर कटी-फटी त्वचा अथवा गहरे संक्रमण वाले स्थानों पर किसी भी वानस्पतिक लेप को लगाने से पूर्व विशेषज्ञ चिकित्सक की राय लेना आवश्यक माना गया है।

कीट दंश और आपातकालीन स्थितियां

कीट-पतंगों अथवा कीड़ों के काटने की स्थिति में भी पारंपरिक स्तर पर कुछ लोग इसकी पत्तियों का ताजा रस या पीसा हुआ लेप प्रभावित त्वचा पर लगाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे स्थानीय जलन और सामान्य सूजन में कुछ राहत मिल सकती है। इसके विपरीत यदि किसी व्यक्ति को मधुमक्खी अथवा किसी अन्य विषैले कीट के काटने के उपरांत सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने लगे, चेहरे पर सूजन उभर आए या पूरे शरीर में तीव्र एलर्जी फैल जाए, तो इसे एक गंभीर चिकित्सीय आपात स्थिति माना जाना चाहिए। ऐसे नाजुक क्षणों में किसी भी प्रकार के घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय अविलंब आपातकालीन चिकित्सा सेवा प्राप्त करनी चाहिए।

गले की तकलीफ और पाचन संबंधी पारंपरिक मान्यताएं

कुछ पारंपरिक उपचार प्रणालियों में पोर्टुलाका के पत्तों अथवा उसके निष्कर्ष का इस्तेमाल गले में होने वाली खराश और सूजन जैसी समस्याओं के लिए किए जाने के विवरण भी उपलब्ध हैं। इसके प्राकृतिक अवयवों में मौजूद सूजन रोधी संभावनाओं के कारण ही यह चर्चा में रहता है। इसके बावजूद यदि गले में तीव्र संक्रमण हो, टॉन्सिल की समस्या बढ़ गई हो या व्यक्ति तेज बुखार से पीड़ित हो, तो सिर्फ पौधे के उपयोग पर निर्भर रहना सर्वथा अनुचित और हानिकारक हो सकता है।

इसी प्रकार पारंपरिक चिकित्सा में पाचन प्रक्रिया को सुधारने और शरीर की आंतरिक सफाई के संदर्भ में भी ऐसे पौधों का उपयोग दर्ज है। कुछ धारणाओं में इसे लिवर की कार्यप्रणाली के लिए भी लाभप्रद माना जाता है। फिर भी शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने या लिवर की किसी भी विकृति को ठीक करने के किसी दावे को चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित उपचार के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। लिवर संबंधी जटिलताओं में विधिवत जांच और योग्य डॉक्टर का परामर्श ही एकमात्र सुरक्षित मार्ग है।

बिना विशेषज्ञ परामर्श सेवन से परहेज

यह वनस्पति भले ही दिखने में अत्यंत मोहक और सामान्य प्रतीत होती हो, लेकिन किसी भी पौधे की जड़ों, पत्तियों अथवा फूलों को प्राकृतिक औषधि मानकर सीधे चबाना अथवा खाना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। विशेष रूप से वे मरीज जो मधुमेह, रक्तचाप या किसी अन्य पुरानी बीमारी की नियमित दवाएं ले रहे हैं, उन्हें बिना किसी योग्य चिकित्सक की स्पष्ट सलाह के इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

सवाल-जवाब

पोर्टुलाका ग्रैंडिफ्लोरा या मॉस रोज क्या है?
यह आंगनों और बगीचों में लाल और गुलाबी फूलों वाला एक प्रमुख सजावटी पौधा है, जिसमें कुछ संभावित औषधीय गुण भी पाए जाते हैं।
वैज्ञानिक अध्ययनों में इस पौधे के कौन से गुण सामने आए हैं?
शोध में इसके अर्क में सूजन को कम करने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी और तनाव को घटाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुण देखे गए हैं।
पारंपरिक रूप से इसकी पत्तियों का इस्तेमाल किस लिए किया जाता रहा है?
पारंपरिक लोक चिकित्सा में इसकी पत्तियों का लेप बनाकर हल्की खरोंच, त्वचा की जलन, खुजली और कीड़े के काटने पर लगाया जाता है।
क्या कीड़े या मधुमक्खी के काटने पर केवल इस पौधे का लेप पर्याप्त है?
हल्की जलन में राहत मिल सकती है, लेकिन चेहरे पर सूजन, एलर्जी या सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है।
क्या लिवर की बीमारी या पाचन सुधारने के लिए इसका सेवन किया जा सकता है?
पारंपरिक उल्लेखों के बावजूद इसे प्रमाणित इलाज नहीं माना जा सकता, इसलिए लिवर की समस्या में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
किन लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए?
मधुमेह, उच्च रक्तचाप या किसी अन्य गंभीर बीमारी की नियमित दवा लेने वाले मरीजों को इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 दिन पहले

यह खबर केवल वनस्पति के गुणों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिना डॉक्टर की सलाह के स्व-उपचार (सेल्फ-मेडिकेशन) के गंभीर कानूनी और स्वास्थ्य जोखिमों को रेखांकित करती है। अनधिकृत वानस्पतिक प्रयोग से होने वाली शारीरिक क्षति कई बार गंभीर आपराधिक लापरवाही या उपभोक्ता सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य नियमों के अंतर्गत आती है, इसलिए पारंपरिक नुस्खों को आजमाने से पहले कानूनी और चिकित्सीय सीमाओं को समझना आवश्यक है।

Tanvi Desai@tanvi-desai·36 दिन पहले

डिजिटल मीडिया और ओटीटी पर आज कल होम गार्डनिंग और नेचुरल वेलनेस से जुड़े लाइफस्टाइल शो काफी ट्रेंड कर रहे हैं। मॉस रोज जैसी सुंदर और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित सामग्री दर्शकों को बहुत आकर्षित करती है। लेकिन एक डिजिटल मीडिया पत्रकार के नाते मैं मानती हूँ कि ऐसे वीडियो या शो बनाते समय मेकर्स को चिकित्सा चेतावनियों को प्रमुखता से दिखाना चाहिए। विजुअल मीडिया में सिर्फ खूबसूरती दिखाने के बजाय, दर्शकों को बिना डॉक्टरी सलाह के इसके उपयोग से बचने के प्रति जागरूक करना जरूरी है, ताकि स्व-उपचार के खतरों को रोका जा सके।

Divya Reddy@divya-reddy·36 दिन पहले

तन्वी की बात को आगे बढ़ाते हुए, मैं शिक्षा के क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण पहलू जोड़ना चाहूंगी। स्कूलों और विश्वविद्यालयों के जीव विज्ञान पाठ्यक्रमों में मॉस रोज जैसी स्थानीय वनस्पतियों के व्यावहारिक अध्ययन को शामिल किया जाना चाहिए। इससे न केवल छात्रों में शोध और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वे पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक परीक्षणों के अंतर को भी समझ सकेंगे। हमारी शिक्षा नीति को छात्रों में यह जागरूकता पैदा करनी चाहिए कि किसी पौधे के औषधीय गुणों के अकादमिक अध्ययन का अर्थ सीधे स्व-उपचार करना नहीं है। शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी वैज्ञानिक साक्षरता और गंभीर मूल्यांकन की क्षमता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।

Nyra Kaif@nyra-kaif·36 दिन पहले

आजकल घरों में पौधे लगाने और उनसे घरेलू नुस्खे (DIY) आजमाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया के प्रभाव में लोग बिना सोचे-समझे प्राकृतिक पौधों को सीधे अपनी त्वचा या सेहत पर इस्तेमाल करने लगते हैं। यह रिपोर्ट हमारे इसी आधुनिक लाइफस्टाइल ट्रेंड के एक संवेदनशील पहलू को रेखांकित करती है। मॉस रोज जैसी सजावटी वनस्पतियों को सिर्फ उनके लुक के लिए सराहना चाहिए, न कि बिना डॉक्टरी परामर्श के उन्हें चिकित्सा का साधन मान लेना चाहिए। हमें 'ऑर्गेनिक लिविंग' के नाम पर बढ़ रहे इस सेल्फ-मेडिकेशन के जोखिमों को समझना होगा।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·36 दिन पहले

प्राकृतिक और समग्र उपचार पद्धतियों में हर पौधे की अपनी विशिष्ट ऊर्जा और कंपन होती है। मॉस रोज जैसे सुंदर सजावटी पौधे मुख्य रूप से हमारे परिवेश में सकारात्मकता और सौंदर्य का संतुलन बनाने के लिए होते हैं। इस बाहरी ऊर्जावान प्रभाव को बिना सोचे-समझे सीधे शारीरिक चिकित्सा में बदल देना एक बड़ी भूल है। बिना योग्य मार्गदर्शन और तत्वों के सही संतुलन के पौधों का अनियंत्रित उपयोग शरीर के प्राकृतिक स्वास्थ्य को बिगाड़ सकता है। आध्यात्मिक और समग्र कल्याण के लिए हमें प्रकृति के नियमों और विशेषज्ञों की सलाह का सम्मान करना चाहिए।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp