आज के दौर में महानगरों में जिंदगी गुजारने वाले लोग सबसे ज्यादा तनाव के साए में जी रहे हैं। काम का भारी दबाव, घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों को संभालना, उम्र का बढ़ना और बीमारियों का डर, इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य की फिक्र, ये तमाम चीजें मिलकर एक ऐसा लंबा और कभी न खत्म होने वाला तनाव का चक्रव्यूह तैयार करती हैं जिससे चाहकर भी निकल पाना आसान नहीं होता। कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि इंसान को खुद भी यह एहसास नहीं हो पाता कि वह मानसिक तनाव से गुजर रहा है। एम्स ट्रेंड और कैलिफोर्निया के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट तथा हेपेटोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ सेठी का कहना है कि जब शरीर अत्यधिक तनाव झेल रहा होता है, तो वह किसी न किसी रूप में इसके संकेत जरूर देता है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि हम इन संकेतों को सही समय पर पहचानें और समझें।
तनाव की चपेट में होने के शारीरिक संकेत
सुबह नींद खुलने पर भी भारी थकान रहना: अगर कोई व्यक्ति रात को पूरे सात से आठ घंटे की नींद लेने के बाद भी सुबह उठकर खुद को थका हुआ महसूस करता है, तो यह तनाव का बड़ा लक्षण हो सकता है। लंबे समय तक तनाव की स्थिति बने रहने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर लगातार बढ़ा रहता है, जिसकी वजह से नींद बहुत हल्की हो जाती है और शरीर को गहरी नींद का वह सुकून नहीं मिल पाता जिसकी उसे असल में दरकार होती है। यहां सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि आप बिस्तर पर कितनी देर लेटे, बल्कि यह अधिक महत्वपूर्ण है कि आपकी शारीरिक रिकवरी कितनी बेहतर तरीके से हो पा रही है।
बार-बार बीमारियों की चपेट में आना: लंबे समय तक मानसिक तनाव का सीधा नाता शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में आने वाली गिरावट से जुड़ा होता है। जब कोई व्यक्ति लगातार तनाव में रहता है, तो उसका इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ने लगता है, शरीर पर लगे घावों को भरने में सामान्य से अधिक समय लगने लगता है, और तरह-तरह के संक्रमण होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। तनाव और प्रतिरक्षा तंत्र दोनों का आपस में बहुत गहरा संबंध है।
पेट के इर्द-गिर्द चर्बी का लगातार बढ़ना: लगातार तनाव झेलने वाले शरीर में कोर्टिसोल का स्तर ऊपर चढ़ जाता है। समय बीतने के साथ यह बढ़ा हुआ कोर्टिसोल पेट के हिस्से में फैट जमा होने का मुख्य कारण बन जाता है, खासकर तब जब इसके साथ पर्याप्त नींद न मिलने की समस्या और जरूरत से ज्यादा कैलोरी गटकने की आदतें भी जुड़ जाती हैं।
छोटी-छोटी बातें भूलने की बीमारी: क्या आपको अक्सर लोगों के नाम याद रखने में माथापच्ची करनी पड़ती है? क्या आप कभी किसी कमरे में सिर्फ इसलिए जाते हैं और फिर भूल जाते हैं कि आप वहां किस काम से आए थे? लंबे समय तक मानसिक तनाव की स्थिति में रहने से दिमाग की फोकस करने की शक्ति, एकाग्रता और पुरानी बातों को याद रखने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है। जब आपका मस्तिष्क हर वक्त किसी न किसी अंदरूनी तनाव से निपटने में उलझा रहता है, तो आपकी याददाश्त पर इसका प्रतिकूल असर पड़ना स्वाभाविक है।
अचानक बिना किसी कारण दिल की धड़कनें तेज होना: तनाव इंसान के शरीर के फाइट या फ्लाइट मैकेनिज्म यानी खतरे से तुरंत पार पाने वाले सिस्टम को एक्टिव कर देता है। इसके प्रभाव से दिल की धड़कन बहुत तेज होना, सीने में धड़कन महसूस होना या धड़कनों का अनियमित हो जाना, हथेलियों से पसीना छूटना और मांसपेशियों में कड़ापन आना जैसे लक्षण बार-बार सामने आ सकते हैं। ये बेहद गंभीर संकेत हैं जिन्हें केवल साधारण तनाव मानकर कभी भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि तुरंत डॉक्टर से पूरी जांच करवानी चाहिए।
पाचन तंत्र में गड़बड़ी और बदलाव: इंसान का पेट और उसका दिमाग लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं और आपस में संवाद करते हैं। लंबे समय तक मानसिक तनाव बना रहने से पेट फूलने की समस्या, कब्ज, दस्त और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम यानी IBS के लक्षण तेजी से गंभीर होने लगते हैं। कई बार आपके पेट की अंदरूनी स्थिति चीख-चीखकर यह बताती है कि आपका दिमाग किस तरह की मानसिक उलझनों और परेशानियों से दो-चार हो रहा है।
बार-बार कुछ मीठा या चटपटा खाने की इच्छा होना: पर्याप्त नींद न मिल पाना और लंबे समय तक तनाव का शिकार रहना हमारे शरीर के उन हार्मोन्स को सीधे तौर पर प्रभावित करता है जो भूख को नियंत्रित करते हैं, जिससे पेट भरा होने का अहसास कमजोर पड़ जाता है। ऐसे हालात में बहुत से लोगों को केवल भरपेट खाना खाने की ही लालसा नहीं रहती, बल्कि वे हाई कैलोरी और भारी मात्रा में चीनी वाली चीजों को खाने के लिए बेकाबू होने लगते हैं।
दिमाग का किसी भी वक्त शांत न बैठना: आप आखिरकार दिनभर की थकान के बाद अपने बिस्तर पर लेटते हैं, लेकिन आपका थक-हार चुका दिमाग अब भी दफ्तर और काम की उधेड़बड़ में लगा रहता है। लगातार बना रहने वाला यह तनाव आपके पूरे नर्वस सिस्टम को हमेशा हाई अलर्ट की खतरनाक स्थिति में अटकाए रखता है। ऐसे माहौल में शरीर और मस्तिष्क को मुकम्मल आराम देना तथा तनाव मुक्त होना बेहद कठिन हो जाता है।
























