उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का तराई क्षेत्र अपनी प्राकृतिक वनस्पतियों, हरियाली और समृद्ध जैव विविधता के लिए विशेष पहचान रखता है। इस क्षेत्र के खेतों, घरों के बगीचों और क्यारियों में कई ऐसी दुर्लभ व औषधीय वनस्पतियां आसानी से उग आती हैं, जिनका उपयोग वर्षों से घरेलू तथा पारंपरिक उपचार प्रणालियों में होता रहा है। इन्हीं में से एक बेहद सामान्य लेकिन गुणकारी पौधा सदाबहार का है। अपने नाम के अनुरूप यह पौधा पूरे साल हरा-भरा बना रहता है और इसके आकर्षक फूल सहज ही हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं।
सदाबहार के फूल मुख्य रूप से गुलाबी, सफेद और कई अन्य मनमोहक रंगों में खिलते हैं। दिखने में बेहद आकर्षक होने के अलावा, इस पौधे को विभिन्न पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अत्यंत उपयोगी दर्जा हासिल है। आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में इस पौधे के फूल, पत्तियों और जड़ों का अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं के निदान के लिए विविध रूपों में उपयोग किया जाता रहा है।
पारंपरिक चिकित्सा में जड़, पत्तियों और फूलों का महत्व
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की अधीक्षक डॉ. ऋचा श्रीवास्तव के अनुसार, सदाबहार का पौधा पारंपरिक चिकित्सा दृष्टिकोण से बेहद गुणकारी साबित होता है। इस पौधे के अलग-अलग भागों यानी पत्तियों, फूलों और जड़ों को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से इस्तेमाल में लाया जाता है। हालांकि, इसे लेने की मात्रा और इस्तेमाल की विधि हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति व स्वास्थ्य के अनुसार पूरी तरह अलग हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयुर्वेद में विभिन्न औषधीय वनस्पतियों का चयन मरीज की व्यक्तिगत स्थिति और आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया जाता है, और सदाबहार भी इसी श्रेणी की एक महत्वपूर्ण वनस्पति मानी जाती है।
सिर दर्द और त्वचा की परेशानियों में कारगर नुस्खे
डॉ. ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि पारंपरिक नुस्खों के अनुसार, सिर दर्द की शिकायत होने पर सदाबहार की ताजी पत्तियों को पीसकर माथे पर लेप की तरह लगाने से आराम मिल सकता है। लेकिन यदि सिर में लगातार तेज दर्द बना रहे, तो केवल घरेलू उपचारों के भरोसे बैठने के बजाय डॉक्टर से विधिवत चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी होता है। इसके अतिरिक्त, त्वचा पर खुजली, कील-मुंहासे, फोड़े-फुंसियां होने या किसी कीड़े-मकोड़े के काटने पर सदाबहार की पत्तियों का ताजा रस या उसका लेप लगाना भी पारंपरिक रूप से काफी प्रचलित रहा है। चूंकि प्रत्येक व्यक्ति की त्वचा की संवेदनशीलता अलग होती है, इसलिए इसे सीधे इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के किसी छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर कर लेना चाहिए। अगर किसी भी प्रकार की जलन या एलर्जी के लक्षण दिखाई दें, तो इसका प्रयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए।
ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर के नियंत्रण में मददगार तत्व
सदाबहार की पत्तियों में विशेष प्रकार के अल्कलॉइड तत्व मौजूद होते हैं। यह घटक शरीर के भीतर प्राकृतिक इंसुलिन के निर्माण की प्रक्रिया को बढ़ावा देने में मदद करता है, जिससे रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है। सुबह के समय खाली पेट सदाबहार के फूल का सेवन करना काफी लाभकारी माना जाता है। इसके लिए सबसे पहले पौधे से दो ताजे फूल तोड़ें, उन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और फिर सुबह खाली पेट चबाकर सेवन करें। इसके अलावा, सदाबहार की पत्तियों में हाइपोटेंसिव गुण भी मौजूद होते हैं, जो शरीर में उच्च रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित बनाए रखने में मददगार साबित होते हैं।



















