मातृत्व को इस संसार का सबसे पावन और स्नेह से भरा अनुभव माना जाता है। एक जननी वह होती है जो अपनी संतान की रक्षा के लिए अपने प्राणों को भी संकट में डाल देती है। किंतु विचार कीजिए, जब वही मां अपनी ही कोख से जन्मी संतानों की संहारक बन जाए, तो इसे क्या कहा जाएगा? क्या कोई मां अपनी ही तीन निरीह जिंदगियों को अपने हाथों से समाप्त कर सकती है? यह प्रश्न न केवल अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है, बल्कि संपूर्ण समाज और चिकित्सा विज्ञान के समक्ष एक अत्यंत गंभीर एवं डरावना रहस्य उत्पन्न करता है।
मैसाचुसेट्स की वह विदारक शाम और सनसनीखेज घटना
यह विचलित कर देने वाली घटना जनवरी 2023 की है। अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य की निवासी लिंडसे क्लेन्सी व्यवसाय से एक लेबर एंड डिलीवरी नर्स थीं। इसका तात्पर्य यह है कि उनका दैनिक दायित्व ही जच्चा और बच्चा की स्वास्थ्य देखभाल करना था। उनके परिवार में उनके जीवनसाथी पैट्रिक क्लेन्सी और तीन अत्यंत प्रिय शिशु सम्मिलित थे, जिनमें 5 वर्ष की पुत्री कोरा, 3 वर्ष का पुत्र डावसन और मात्र 8 मास का सबसे छोटा शिशु कैलन थे। बाहरी दृष्टिकोण से यह एक अत्यंत प्रसन्नचित्त और आदर्श परिवार प्रतीत होता था।
किंतु 24 जनवरी 2023 की एक संध्या ने इस परिवार को सर्वदा के लिए तहस-नहस कर दिया। उस बेला लिंडसे ने अपने पति पैट्रिक को आवास से बाहर कुछ औषधियां और टेकअवे डिनर लाने के उद्देश्य से प्रेषित किया। पति के प्रस्थान करते ही लिंडसे ने कथित तौर पर एक एक्सरसाइज बैंड का उपयोग करते हुए अपने तीनों बच्चों का एक-एक करके गला घोंटकर प्राण अंत कर दिए। इसके उपरांत उन्होंने स्वयं भी जीवन लीला समाप्त करने के प्रयोजन से घर की दूसरी मंजिल की खिड़की से नीचे छलांग लगा दी।
इस छलांग में उनके प्राण तो बच गए, परंतु उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर क्षति पहुंचाई, जिसके परिणामस्वरुप वह कमर के निचले भाग से पैरालाइज्ड हो गईं। कुछ अंतराल पश्चात जब पति पैट्रिक अपने आवास पर लौटे, तो उन्हें घर के भीतर जो विहंगम दृश्य दिखाई दिया, उसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी। बालकों के मृत शरीर और रक्त से रंजित भयावह स्थिति ने संपूर्ण क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया।
अदालत के गलियारों में छिड़ा कानूनी संघर्ष
जब यह प्रकरण न्यायालय की देहरी तक पहुंचा, तो लिंडसे क्लेन्सी ने बालकों की हत्या के कृत्यों से कभी भी इनकार नहीं किया। परंतु इसके पश्चात जो विधिक और सामाजिक बहस प्रारंभ हुई, उसने प्रत्येक व्यक्ति को असमंजस में डाल दिया। क्या लिंडसे एक क्रूर हत्यारिन है या फिर किसी ऐसे मानसिक विकार की गिरफ्त में थी, जिसने उससे उसकी सोचने-समझने की शक्ति छीन ली थी?
बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि लिंडसे एक अत्यंत गंभीर मानसिक व्याधि पोस्टपार्टम साइकोसिस से पीड़ित चल रही थीं। संतानों के जन्म के उपरांत उन्हें भयंकर अवसाद, एंग्जायटी और अनिद्रा की बीमारी हो गई थी। चिकित्सकों द्वारा उन्हें अनेक प्रकार की प्रबल औषधियों का सेवन कराया जा रहा था, जिससे उनका मस्तिष्क सुन्न हो चुका था। इस घटना के घटित होने के समय वह वास्तविक संसार से पूर्णतया विच्छेद हो चुकी थीं और उन्हें डरावने मतिभ्रम हो रहे थे।
दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष का दृष्टिकोण यह था कि यह एक पूर्व नियोजित हत्या थी। उनका कथन था कि लिंडसे ने पूरी योजना के साथ अपने पति को घर से बाहर भेजा ताकि उन्हें बालकों पर वार करने का अवसर मिल सके। इस दीर्घकालिक ट्रायल के पश्चात, हाल ही में जूरी द्वारा किसी एक निश्चित निष्कर्ष पर न पहुँच पाने के कारण न्यायाधीश ने इस ट्रायल को मिस्ट्रयल घोषित कर दिया, जिसका अर्थ है कि यह कानूनी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है।
मनोवैज्ञानिक कारण और पोस्टपार्टम साइकोसिस का भयानक सच
यह सबसे बड़ा और अंतरात्मा को झकझोर देने वाला प्रश्न है कि कोई जननी ऐसा कदम कैसे उठा सकती है। मनोविज्ञान और न्यूरोलॉजी के विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई मां ऐसा मार्ग चुनती है, तो इसके पीछे सामान्य मनुष्य जैसी कोई व्यक्तिगत शत्रुता या निर्दयता नहीं होती, अपितु मस्तिष्क का पूर्ण रूप से अचेतन या असंतुलित हो जाना यानी साइकोटिक ब्रेक होता है। इसके मुख्य कारणों में शिशु के जन्म के पश्चात महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल स्तर में विशेषकर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन में अचानक भारी गिरावट आना सम्मिलित है। यह प्रसव के उपरांत उत्पन्न होने वाला एक दुर्लभ किंतु अत्यंत खतरनाक मानसिक आपातकाल है।
इस विकार की सबसे भयावह विशेषता यह है कि पीड़ित मां को अजीबो-गरीब भ्रम होने लगते हैं। कई बार उस बीमार जननी को यह आभास होने लगता है कि यह संसार अत्यधिक दुष्ट है अथवा उसकी संतानें किसी भारी विपत्ति में फंसने वाली हैं, और वह उन्हें सुरक्षित करने के लिए ही यह पग उठा रही है। उसका मस्तिष्क इस तथ्य को ग्रहण ही नहीं कर पाता कि वह क्या कर रही है। इसके अतिरिक्त, लगातार कई महीनों तक नींद का अभाव और गंभीर क्लिनिकल डिप्रेशन मस्तिष्क की बौद्धिक क्षमता और सही-गलत के चयन की शक्ति को पूर्ण रूप से नष्ट कर देते हैं।
महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी
लिंडसे क्लेन्सी की यह व्यथा कथा केवल एक अमेरिकी परिवार की विडंबना नहीं है, अपितु यह संपूर्ण विश्व के लिए एक गंभीर चेतावनी है। हमारे समाज में आज भी महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर संवाद नहीं किया जाता। गर्भावस्था के उपरांत उत्पन्न होने वाले बेबी ब्लूज अथवा डिप्रेशन को प्रायः यह कहकर टाल दिया जाता है कि यह तो समय बीतने के साथ स्वतः ठीक हो जाएगा, जो कि एक बड़ी भूल है।



















