अक्सर लोग तेज सिरदर्द को साधारण थकान, माइग्रेन या लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन देखने का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन दिमाग की नसों से जुड़ी एक गंभीर और जानलेवा समस्या ऐसी भी है जो बिना किसी आहट के शरीर में पनप सकती है। इसे मेडिकल भाषा में ब्रेन एन्यूरिज्म कहा जाता है। आमतौर पर यह माना जाता है कि ऐसी बीमारियां केवल बुजुर्गों को ही अपना शिकार बनाती हैं, मगर हकीकत यह है कि युवा भी इसके खतरे से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। सितंबर का महीना दुनियाभर में ब्रेन एन्यूरिज्म जागरूकता के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोग इसके छिपे हुए खतरों और चेतावनी संकेतों को समय रहते पहचान सकें।
ब्रेन एन्यूरिज्म उस जटिल स्थिति को कहते हैं जब मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली किसी धमनी या रक्त वाहिका की दीवार कमजोर पड़ जाती है। रक्त के निरंतर दबाव के कारण यह कमजोर हिस्सा बाहर की तरफ फूलकर एक छोटे गुब्बारे या थैली जैसा आकार ले लेता है। जब तक यह उभार शांत रहता है और फटता नहीं, तब तक अधिकांश मरीजों को इसका कोई अहसास तक नहीं होता। यह स्थिति बिना किसी बदलाव या परेशानी के सालों तक शरीर में बनी रह सकती है। हालांकि, जब किसी वजह से यह एन्यूरिज्म अचानक फट जाता है, तो दिमाग के आसपास के हिस्से में तेजी से रक्तस्राव होने लगता है। चिकित्सा विज्ञान में इस आंतरिक रक्तस्राव को सबरैक्नॉइड हेमरेज कहा जाता है, जो कुछ ही मिनटों में मरीज के लिए एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा आपात स्थिति पैदा कर देता है।
युवाओं में जोखिम और डॉक्टर की चेतावनी
डॉक्टर विपुल गुप्ता (डायरेक्टर, न्यूरोइंटरवेंशनल सर्जरी, सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल, मुंबई) के अनुसार, कम उम्र के लोगों में ब्रेन एन्यूरिज्म के मामले अपेक्षाकृत कम जरूर होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि युवा इससे पूरी तरह सुरक्षित हैं। यह विकार कम उम्र में भी विकसित हो सकता है और लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के शांत रह सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई मरीजों में इसका पहला प्रत्यक्ष संकेत ही एन्यूरिज्म का अचानक फटना और मस्तिष्क में होने वाला भारी रक्तस्राव होता है। ऐसी स्थिति में मरीज को संभलने का बहुत कम समय मिलता है, इसलिए समय पर सतर्कता बरतना आवश्यक है।
चेतावनी संकेत और एन्यूरिज्म फटने के लक्षण
ब्रेन एन्यूरिज्म के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि नस केवल फूली हुई है या वह फट चुकी है। जब एन्यूरिज्म फटता है, तो उसका सबसे प्रमुख और विशिष्ट लक्षण होता है अचानक से उठने वाला असहनीय और तीव्र सिरदर्द। यह दर्द इतना भीषण होता है कि महज कुछ सेकंड या मिनटों के भीतर अपनी चरम तीव्रता तक पहुंच जाता है। इसे अक्सर जीवन का सबसे भयानक सिरदर्द माना जाता है। इस तीव्र दर्द के साथ मरीज को लगातार उल्टी होना, गर्दन में तेज अकड़न, अचानक चक्कर खाकर बेहोश हो जाना, मिर्गी जैसे दौरे पड़ना, शरीर के किसी एक हिस्से या अंग में कमजोरी महसूस होना, बोलने में लड़खड़ाहट, धुंधला या दोहरा दिखाई देना और मानसिक भ्रम जैसी गंभीर समस्याएं घेर सकती हैं।
कुछ मामलों में एन्यूरिज्म के फटने से पहले भी शरीर चेतावनी संकेत देने लगता है। ऐसा तब होता है जब रक्त वाहिका का उभार आकार में बड़ा होने लगता है और मस्तिष्क की आसपास की संवेदनशील नसों पर सीधा दबाव डालने लगता है। इस स्थिति में मरीज को एक आंख के ठीक पीछे या आसपास लगातार चुभने वाला दर्द महसूस हो सकता है। इसके अलावा अचानक सब कुछ दोहरा दिखाई देने लगना, आंख की ऊपरी पलक का अस्वाभाविक रूप से नीचे झुक जाना, आंखों की रोशनी कमजोर पड़ना या पुतलियों की सामान्य गतिविधियों में अचानक बदलाव आना इसके प्रमुख संकेत हैं। लोग अक्सर इन लक्षणों को साधारण नजर की कमजोरी, आंखों की थकान या माइग्रेन समझकर टाल देते हैं। लेकिन अचानक प्रकट होने वाले किसी भी असामान्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण की तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से जांच कराई जानी चाहिए।
आनुवंशिकी, जीवनशैली और अन्य जोखिम कारक
चिकित्सकों का स्पष्ट मानना है कि ब्रेन एन्यूरिज्म के खतरे को केवल बढ़ती उम्र के दायरे में सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। कई अन्य महत्वपूर्ण कारक भी इसके जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं। यदि परिवार के किसी करीबी रक्त संबंधी को ब्रेन एन्यूरिज्म या ब्रेन हेमरेज की समस्या रही हो, तो अन्य सदस्यों में इसका खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कुछ आनुवंशिक बीमारियां भी नसों की दीवारों को स्वाभाविक रूप से कमजोर बना देती हैं।
जीवनशैली से जुड़े कारक भी इसमें बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर धमनियों की दीवारों पर लगातार अतिरिक्त दबाव बनाता है, जिससे कमजोर हिस्से के उभरने और फटने की संभावना बढ़ जाती है। तंबाकू और धूम्रपान का सेवन भी रक्त वाहिकाओं को अंदर से क्षतिग्रस्त करता है। इसलिए जिन परिवारों में इस बीमारी का पुराना इतिहास रहा है, उन्हें डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक स्क्रीनिंग करानी चाहिए। युवाओं को भी अपनी दिनचर्या में नियमित ब्लड प्रेशर जांच, सक्रिय शारीरिक व्यायाम और तंबाकू उत्पादों से पूरी तरह दूर रहने का संकल्प लेना चाहिए।
जांच के आधुनिक तरीके और उपलब्ध उपचार
यदि किसी व्यक्ति में ब्रेन एन्यूरिज्म के लक्षण दिखाई देते हैं या पारिवारिक इतिहास के कारण इसका संदेह होता है, तो उन्नत इमेजिंग तकनीकों की मदद से इसका सटीक पता लगाया जा सकता है। इसके लिए सीटी एंजियोग्राफी या एमआर एंजियोग्राफी की जाती है, जिससे दिमाग की नसों की विस्तृत और स्पष्ट तस्वीर मिल जाती है। कुछ जटिल मामलों में रक्त वाहिकाओं की सूक्ष्म संरचना को और गहराई से समझने के लिए डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (डीएसए) कराने की सलाह दी जाती है।
जांच में एन्यूरिज्म की पुष्टि होने के बाद डॉक्टर उसके आकार, सटीक स्थान, संरचना, मरीज की आयु, पुरानी बीमारियों और पारिवारिक इतिहास का संपूर्ण विश्लेषण करते हैं। कम उम्र के मरीजों में सटीक जांच और निगरानी इसलिए भी बेहद जरूरी हो जाती है क्योंकि उन्हें इस स्थिति के साथ जीवन का एक लंबा सफर तय करना होता है। यदि एन्यूरिज्म बहुत छोटा है और फटने का जोखिम नगण्य है, तो नियमित अंतराल पर इमेजिंग के जरिए उसकी निगरानी की जा सकती है।
लेकिन यदि एन्यूरिज्म का आकार बड़ा है या उसके फटने का खतरा अधिक है, तो भविष्य में होने वाले रक्तस्राव को रोकने के लिए चिकित्सीय प्रक्रिया अपनाई जाती है। एन्यूरिज्म के स्थान के आधार पर मुख्यतः दो तरह के उपचार विकल्प मौजूद हैं: एंडोवैस्कुलर प्रक्रिया और सर्जिकल क्लिपिंग। एंडोवैस्कुलर तकनीक एक न्यूनतम चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया है, जिसमें पैर या हाथ की रक्त वाहिकाओं के जरिए सूक्ष्म कैथेटर को दिमाग तक पहुंचाया जाता है और एन्यूरिज्म को भीतर से सुरक्षित रूप से सील कर दिया जाता है, जबकि सर्जिकल क्लिपिंग में सर्जरी के जरिए एन्यूरिज्म की गर्दन पर एक छोटा धातु का क्लिप लगाकर रक्त प्रवाह को रोक दिया जाता है।
जागरूकता जरूरी है, डरना समाधान नहीं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने का मकसद लोगों के मन में खौफ पैदा करना या हर सामान्य सिरदर्द में ब्रेन स्कैन कराने की होड़ लगाना नहीं है। बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य यह है कि लोग उन गंभीर और असामान्य लक्षणों को पहचानना सीखें जिन्हें कतई नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। युवाओं में भले ही यह समस्या बुजुर्गों की तुलना में कम देखने को मिलती हो, लेकिन केवल कम उम्र के आधार पर खतरे को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। यदि सिर में कभी ऐसा अचानक और असहनीय दर्द उठे जो पहले कभी महसूस न हुआ हो, या आंखों और शरीर में कोई असामान्य न्यूरोलॉजिकल बदलाव दिखे, तो बिना समय गंवाए तत्काल नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।



















