आधुनिक दिनचर्या में सामाजिक मेलजोल या वीकेंड पार्टियों के दौरान अल्कोहल का सेवन एक आम चलन बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भले ही किसी भी मात्रा में शराब को सेहत के लिए नुकसानदेह बताते हों, लेकिन अक्सर लोग इसके दुष्प्रभावों से बचने के लिए अजीबोगरीब उपाय आजमाते हैं। कई लोगों के बीच यह गलत धारणा घर कर चुकी है कि रात को जाम छलकाने के बाद अगर अगली सुबह जिम में कड़ा वर्कआउट कर लिया जाए या जमकर पसीना बहा दिया जाए, तो शरीर से शराब का बुरा असर धुल जाता है। लोगों को लगता है कि ऐसा करने से फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव है, हालांकि चिकित्सा विज्ञान इस सोच को सिरे से नकारता है।
वर्कआउट से नहीं धुलता शराब का जहरीला असर
रेडक्लिफ लैब्स में क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट और वेलनेस कोच दीपिका लालवानी के अनुसार, शारीरिक व्यायाम सेहत के लिए बेहद मुफीद है, मगर इसे शराब से होने वाली शारीरिक क्षति की भरपाई का जरिया नहीं बनाया जा सकता। रात के समय पी गई अल्कोहल का असर सुबह केवल कसरत करने से समाप्त नहीं होता। लिवर पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों को मात्र एक दिन के वर्कआउट से बेअसर करना नामुमकिन है।
जब कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता है, तो शरीर में पहुंचने के बाद उसका अधिकांश हिस्सा सीधे लिवर द्वारा प्रोसेस किया जाता है। यदि कोई इंसान नियमित तौर पर अथवा तय सीमा से अधिक मात्रा में शराब पीता है, तो उसके लिवर की कोशिकाओं में फैट जमा होने की आशंका बेतहाशा बढ़ जाती है। लंबे समय तक यह सिलसिला जारी रहने पर लिवर में सूजन पैदा होती है और आगे चलकर यह अंग से जुड़े अन्य गंभीर विकारों का रूप ले लेती है। रात में सेवन की गई शराब को अगले दिन कसरत के जरिए पसीने के रास्ते बाहर निकालना जैविक रूप से संभव नहीं है। यहां तक कि अत्यधिक पानी पीने या पसीना बहाने से भी शराब शरीर से तेजी से बाहर नहीं निकलती।
फैटी लिवर के अन्य बड़े चिकित्सकीय कारण
दीपिका लालवानी ने इस बात को भी स्पष्ट किया कि फैटी लिवर की समस्या केवल मदिरापान तक ही सीमित नहीं है। शरीर में अत्यधिक मोटापा, डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस तथा खून में कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड के असामान्य स्तर भी इस बीमारी को जन्म देने वाले प्रमुख कारक हैं। यदि किसी व्यक्ति के शरीर में पहले से ये मेटाबॉलिक समस्याएं मौजूद हैं और वह ऊपर से शराब का भी सेवन करता है, तो लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
जोखिम घटाने के लिए अपनाएं 2-2-2 का नियम
स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से तो शराब का पूरी तरह त्याग करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। इसके बावजूद, जो लोग तुरंत इस आदत को छोड़ने में असमर्थ हैं, वे नुकसान को कुछ हद तक सीमित रखने के लिए 2-2-2 का व्यावहारिक नियम अपना सकते हैं।
- एक बार में दो ड्रिंक: किसी भी एक मौके पर दो ड्रिंक से अधिक का सेवन बिल्कुल न करें।
- सप्ताह में दो दिन: पूरे हफ्ते के दौरान दो दिन से ज्यादा मदिरापान न करें।
- लगातार पीने से परहेज: सप्ताह में कभी भी लगातार दो दिन शराब पीने की भूल न करें ताकि लिवर को संभलने का मौका मिले।
हैंगओवर के दौरान भारी वर्कआउट से क्यों बचें
अल्कोहल के सेवन के पश्चात शरीर में अक्सर गंभीर डिहाइड्रेशन, अत्यधिक थकान, शारीरिक कमजोरी और चक्कर आने जैसी दिक्कतें उभरती हैं। ऐसी स्थिति में भारी वजन उठाना या थका देने वाली एक्सरसाइज करना शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जो नुकसानदेह साबित हो सकता है। हैंगओवर के वक्त शरीर को पर्याप्त आराम देना, भरपूर मात्रा में पानी पीना और एक संतुलित जीवनशैली का पालन करना ही सबसे उचित कदम है। अपने लिवर को लंबे समय तक सेहतमंद बनाए रखने के लिए शराब की मात्रा को नियंत्रित करना, पौष्टिक आहार ग्रहण करना और निरंतर सामान्य शारीरिक गतिविधि बनाए रखना अनिवार्य है।



















