दफ्तरों में घंटों कुर्सी पर टिके रहने और घर से काम करने के बढ़ते चलन ने लोगों की रीढ़ की सेहत पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। दिल्ली एनसीआर जैसे बड़े कॉरपोरेट केंद्रों में कामकाजी युवाओं के भीतर गर्दन, कमर, कंधे और पीठ दर्द की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। परेशानी सिर्फ वयस्क कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय शोध से यह भी उजागर हुआ है कि स्कूल जाने वाले बच्चों में मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं पहले ही एक बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। पढ़ाई के दौरान शरीर के वजन से ज्यादा भारी बस्ता उठाना बच्चों में इन शारीरिक विकारों का एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है।
पीठ दर्द अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं
इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स के प्रेसिडेंट और वर्ल्ड फिजियोथेरेपी एशिया वेस्टर्न पैसिफिक रीजनल कॉन्फ्रेंस के ऑर्गनाइजिंग चेयर प्रोफेसर डॉ. संजीव के. झा के अनुसार, रीढ़ और कमर का दर्द अब केवल उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रहा है। फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में मस्कुलोस्केलेटल दिक्कतों का दायरा तेजी से फैल रहा है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। शारीरिक समस्याओं और उनके उपचार से जुड़े इन अहम विषयों पर 26 और 27 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में वर्ल्ड फिजियोथेरेपी एशिया वेस्टर्न पैसिफिक रीजनल कॉन्फ्रेंस 2026 आयोजित होने जा रही है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित 32 अन्य देशों के 10,000 से अधिक फिजियोथेरेपी प्रोफेशनल्स हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं।
कुर्सी पर बैठने का सही पोस्चर क्या होना चाहिए
शरीर को दर्दरहित रखने के लिए सही पोस्चर का ध्यान रखना सबसे ज्यादा आवश्यक है। डॉ. संजीव के. झा ने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति कुर्सी पर बैठता है, तो उसकी कमर और शरीर का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह सीधा रहना चाहिए। अक्सर लोग कुर्सी पर बैठते समय कमर पीछे की ओर ढीली छोड़ देते हैं और ऊपरी धड़ को आगे झुका लेते हैं। बैठने का यह झुका हुआ ढंग सबसे खराब तरीका माना जाता है, क्योंकि यहीं से कंधे, गर्दन और निचली कमर में खिंचाव और दर्द शुरू होता है। इसलिए जब भी काम के लिए बैठें, ध्यान रखें कि पीठ और धड़ बिल्कुल सीधे संरेखित रहें।
विशेषज्ञों ने रेखांकित किया है कि देशभर में फिजियोथेरेपिस्टों के पास कमर, गर्दन, कलाई और कोहनी के दर्द के मरीज तेजी से पहुंच रहे हैं। इस गंभीर परेशानी की एक अन्य बड़ी वजह घंटों तक मोबाइल स्क्रीन पर गलत स्थिति में झुककर काम करना या स्क्रॉल करना है। अनुचित मुद्रा में देर तक फोन चलाने से रीढ़ और जोड़ों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे नसों में सूजन और दर्द की समस्या पनपने लगती है।
काम के बीच में ब्रेक और नियमित स्ट्रेचिंग बेहद जरूरी
सम्मेलन की ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. रुचि वार्ष्णेय के अनुसार, चाहे स्कूल जाने वाले छात्र हों या दफ्तर में काम करने वाले पेशेवर, सभी को सुबह उठने के बाद सबसे पहले गर्दन, कंधे और कमर की हल्की एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक घर से काम कर रहा है या कॉरपोरेट ऑफिस में डेस्क पर बैठा है, तो उसे लगातार कुर्सी पर टिके रहने से बचना चाहिए। काम के बीच-बीच में थोड़े-थोड़े अंतराल पर ब्रेक लेना और हाथ-पैरों को खींचकर सामान्य व्यायाम करना अत्यंत जरूरी है। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी अपने बैठने और उठने के पोस्चर का खास ख्याल रखना चाहिए ताकि रीढ़ पर अतिरिक्त भार न पड़े।
साल 2025 की एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-एनालिसिस में, जिसमें 129 अलग-अलग रिपोर्ट शामिल की गई थीं, यह सामने आया कि लगातार लंबे समय तक बैठे रहने या शारीरिक रूप से सुस्त जीवनशैली अपनाने और रीढ़ की हड्डी के दर्द के बीच एक निश्चित जुड़ाव मौजूद है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि स्कूल इस दिशा में सबसे प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। स्कूलों के जरिए बच्चों को शारीरिक गतिविधि, नियमित व्यायाम, सही पोस्चर की जानकारी, शारीरिक फिटनेस, खेलकूद के दौरान चोटों से बचाव, एर्गोनॉमिक्स, प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच और जीवनशैली में सुधार सिखाया जा सकता है।



















