भोजन तैयार करने में काम आने वाला तेल केवल खाने का जायका ही नहीं संवारता, बल्कि हमारे शरीर की सेहत पर भी सीधा प्रभाव डालता है। एक सही तेल का चयन करने से दिल को दुरुस्त रखने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को काबू में रखने और शरीर को जरूरी फैटी एसिड पहुंचाने में मदद मिलती है। हालांकि बाजार में कोई एक ऐसा तेल मौजूद नहीं है जिसे हर किसी के लिए एकमात्र सबसे अच्छा विकल्प कहा जा सके, फिर भी कई ऐसे तेल हैं जो पोषण के मानदंडों पर खरे उतरते हैं और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहतरीन माने जाते हैं।
सरसों और मूंगफली के तेल के खास गुण
भारतीय घरों की रसोई में सरसों के तेल का इस्तेमाल बहुत आम है और यह काफी पसंद किया जाता है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं। इसके अलावा इसमें मिलने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल की सेहत के लिए काफी गुणकारी माने गए हैं। यह तेल घर में बनने वाली सब्जियों, अचार और दाल या सब्जी में तड़का लगाने के लिए एक शानदार विकल्प साबित होता है। दूसरी ओर, मूंगफली के तेल का स्मोक पॉइंट बहुत अधिक होता है, जिसकी वजह से यह सामग्री को डीप फ्राई करने और भूनने के कामों के लिए बहुत उपयुक्त माना जाता है। इस तेल में विटामिन ई और सेहतमंद फैट पाए जाते हैं जो शरीर को सक्रिय रखने के लिए ऊर्जा देते हैं।
ऑलिव ऑयल और तिल के तेल के फायदे
जैतून के तेल यानी ऑलिव ऑयल को वैश्विक स्तर पर सबसे स्वास्थ्यवर्धक तेलों में शुमार किया जाता है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं। खासतौर पर सलाद में डालने, हल्की आंच पर खाना पकाने और ड्रेसिंग तैयार करने के लिए एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल को सबसे अच्छा माना जाता है। इसी तरह, तिल के तेल में भी एंटीऑक्सीडेंट और हेल्दी फैट की मौजूदगी होती है। यह दिल की सेहत को संवारने में मददगार होने के साथ-साथ भोजन को एक अलग और सोंधा स्वाद देता है। देश के दक्षिण भारतीय खान-पान में इस तेल का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है।
राइस ब्रान ऑयल और तेल बदलने का सही तरीका
राइस ब्रान ऑयल में ओरिजानॉल नाम का एक विशेष घटक पाया जाता है, जो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को घटाने में सहायता कर सकता है। इसका स्वाद बहुत हल्का होता है और यह रोजमर्रा की सामान्य कुकिंग के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो हमेशा एक ही तरह के तेल का लगातार उपयोग करते रहने के बजाय अलग-अलग तेलों को रोटेट करके इस्तेमाल करना शरीर के लिए ज्यादा लाभदायक साबित हो सकता है। इससे शरीर को विभिन्न स्रोतों से अलग-अलग प्रकार के फैटी एसिड मिलते रहते हैं। उदाहरण के तौर पर, रसोई में सरसों, मूंगफली और राइस ब्रान ऑयल का संतुलित तालमेल बिठाकर इस्तेमाल किया जा सकता है।
कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल करते वक्त इन बातों का रखें ध्यान
रसोई में तेल का उपयोग करते समय कुछ खास सावधानियां बरतना बहुत जरूरी होता है ताकि सेहत पर कोई बुरा असर न पड़े। दिनभर में कुल मिलाकर तेल की खपत की मात्रा को हमेशा सीमित ही रखना चाहिए। कभी भी एक ही तेल को बार-बार दोबारा गर्म नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है। बाजार मिलने वाले ट्रांस फैट और अत्यधिक रूप से प्रोसेस्ड किए गए तेलों के सेवन से हमेशा बचना चाहिए। हमेशा अपने खान-पान में संतुलित आहार को शामिल करें और नियमित रूप से व्यायाम के साथ तेल का सीमित सेवन करें।



















