ऋषिकेश में भांग का नाम आते ही आमतौर पर लोगों के जेहन में नशे की बात आती है, लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ी अंचलों में इसकी कहानी बिल्कुल अलग है। यहां के स्थानीय खानपान में भांग के बीजों का इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है। पहाड़ी बस्तियों और घरों में इन बीजों से खास तरह की चटनी और नमक तैयार किया जाता है। इसके अलावा कई ग्रामीण इलाकों में लोग इसे सब्जियों की ग्रेवी का स्वाद बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। खासतौर पर ठंडी के मौसम में भांग के बीजों से बने व्यंजन स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। इस चलन के पीछे सिर्फ इसका अलग और अनूठा स्वाद ही नहीं है, बल्कि इसके भीतर छिपे हुए कई जरूरी पोषक तत्व भी हैं जो शरीर को फायदा पहुंचाते हैं।
पोषण से भरपूर छोटे बीज
आयुष विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार ने बातचीत के दौरान बताया कि आकार में भले ही भांग के बीज छोटे होते हैं, लेकिन इनमें कई तरह के अहम पोषक तत्वों का खजाना छिपा होता है। इनमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, सेहत के लिए फायदेमंद फैट और कई खनिज पदार्थ शामिल होते हैं। यही कारण है कि इन्हें अपनी डेली डाइट में शामिल करने से भोजन का पोषण स्तर काफी हद तक बढ़ जाता है। इन बीजों में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड भी पाए जाते हैं, जो शरीर की बुनियादी जरूरतों का हिस्सा हैं और सामान्य शारीरिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं। चूंकि मानव शरीर इन फैटी एसिड का निर्माण खुद पर्याप्त मात्रा में नहीं कर पाता है, इसलिए इन्हें खानपान के जरिए ही शरीर के भीतर पहुंचाना जरूरी होता है।
मांसपेशियों की मजबूती और पाचन में सुधार
इन छोटे बीजों में प्रोटीन की मौजूदगी भी बहुत अच्छी मात्रा में होती है, जो हमारे शरीर के विकास के लिए बेहद आवश्यक है। प्रोटीन हमारी मांसपेशियों को मेंटेन रखने और शरीर में होने वाली टूट-फूट की मरम्मत करने का काम करता है। यही वजह है कि अगर आप भांग के बीजों को अपनी दाल, सब्जी या अन्य भोज्य पदार्थों में थोड़ी मात्रा के साथ मिलाते हैं, तो खाने की पोषण वैल्यू स्वतः बढ़ जाती है। इसके अलावा, साबुत भांग के बीजों में डाइटरी फाइबर भी पाया जाता है, जिसे पेट की सेहत और बेहतर पाचन क्रिया के लिए काफी अहम माना जाता है.
खनिजों का खजाना और पारंपरिक इस्तेमाल का तरीका
पोषक तत्वों की इस कड़ी में भांग के बीजों के भीतर मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, आयरन और जिंक जैसे कई महत्वपूर्ण खनिज भी मौजूद होते हैं। इसके साथ ही इसमें विटामिन ई जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स भी मिलते हैं, जो शरीर की विभिन्न आंतरिक कार्यप्रणालियों को सही बनाए रखने में मददगार साबित होते हैं। उत्तराखंड के पहाड़ों में इनका उपयोग केवल चटनी या नमक तक ही सीमित नहीं रहता है, बल्कि कई घरों में इसे पारंपरिक सब्जियों की रेसिपी का हिस्सा बनाया जाता है। इसके लिए सबसे पहले भांग के बीजों को धीमी आंच पर हल्का सा भून लिया जाता है और फिर उन्हें पीसकर पाउडर तैयार किया जाता है। इसके बाद इस पिसे हुए मिश्रण को मसालों के साथ सब्जी की ग्रेवी में मिला दिया जाता है, जिससे सब्जी का स्वाद काफी बढ़ जाता है और उसमें हल्का सा दरदरापन आ जाता है। इस विधि से रोजमर्रा के खाने में अनजाने ही सही, सेहतमंद प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट आसानी से जुड़ जाते हैं।



















