ऋषिकेश में बाल झड़ना एक आम समस्या बनती जा रही है। रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़े बहुत बाल टूटना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन यदि अचानक बालों का गिरना सामान्य से ज्यादा बढ़ जाए, कंघी करते समय या सुबह उठने पर तकिए पर बालों का गुच्छा मिलने लगे अथवा नहाते वक्त हाथों में ढेरों बाल आने लगें, तो इस स्थिति को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने पर अक्सर लोग तुरंत अपना शैंपू, तेल या हेयर सीरम बदलना शुरू कर देते हैं।
शैंपू बदलने से क्यों नहीं रुकता हेयर फॉल
हर बार बालों के झड़ने की जड़ कोई खराब हेयर प्रोडक्ट नहीं होता है। कई बार हमारे शरीर के भीतर चल रही किसी अंदरूनी कमी, बीमारी, मानसिक तनाव या हार्मोनल असंतुलन का सीधा असर बालों की सेहत पर पड़ता है। इसलिए अगर आपके बाल लगातार और अधिक मात्रा में गिर रहे हैं, तो केवल बाहरी प्रोडक्ट्स बदलने के बजाय इसके मूल कारणों को समझना और पहचानना बेहद आवश्यक हो जाता है।
पोषण की कमी और थायरॉइड का असर
ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार के अनुसार, बालों को स्वस्थ रखने, उन्हें बढ़ाने और मजबूत बनाए रखने के लिए शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, आयरन, विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। यदि खानपान में इन तत्वों की कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो बाल कमजोर होकर तेजी से टूटने लगते हैं। खासकर शरीर में आयरन की कमी को हेयर फॉल का एक बड़ा कारण माना गया है। महिलाओं में माहवारी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने पर भी आयरन की कमी हो सकती है। इसके अलावा, विटामिन डी और विटामिन बी12 की कमी भी कुछ लोगों में बालों से जुड़ी समस्याओं को जन्म दे सकती है। थायरॉइड की गड़बड़ी भी बालों के अत्यधिक झड़ने की एक मुख्य वजह होती है, क्योंकि थायरॉइड हार्मोन शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करते हैं। यदि बालों के झड़ने के साथ-साथ लगातार थकान महसूस होना, वजन का अचानक घटना या बढ़ना, तथा अत्यधिक ठंड या गर्मी लगना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से परामर्श करना सबसे उचित रहता है।
हार्मोनल बदलाव और तनाव की भूमिका
डॉ. राजकुमार बताते हैं कि महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों का स्पष्ट असर उनके बालों पर भी पड़ता है। माहवारी में अनियमितता, गर्भावस्था के दौरान या बच्चे के जन्म के बाद होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों के कारण कुछ समय के लिए बाल ज्यादा गिर सकते हैं। इसके अलावा, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम जैसी समस्याओं से पीड़ित कुछ महिलाओं को भी बाल पतले होने या सिर के खास हिस्सों में बालों की कमी की शिकायत हो सकती है। मानसिक तनाव भी हेयर फॉल का एक बहुत बड़ा कारक साबित होता है। अत्यधिक तनाव रहना, नींद पूरी न होना, काम का भारी दबाव या किसी गंभीर बीमारी से उबरने के बाद कुछ हफ्तों या महीनों तक बाल ज्यादा झड़ सकते हैं। कई बार यह असर तुरंत नहीं दिखता, बल्कि तनाव या बीमारी के कुछ समय बाद नजर आता है। इसलिए यदि अचानक बाल झड़ने लगें, तो पिछले कुछ महीनों के दौरान हुए तेज बुखार, तनाव या वजन में बदलाव पर भी गौर करना चाहिए।
डाइटिंग और गलत हेयर केयर की आदतें
डॉ. राजकुमार का यह भी कहना है कि बहुत अधिक क्रैश डाइटिंग करना या तेजी से वजन घटाने के चक्कर में भोजन कम कर देना भी बालों को भारी नुकसान पहुंचाता है। जब शरीर को पर्याप्त खाना और उचित मात्रा में प्रोटीन नहीं मिल पाता, तो शरीर अन्य जरूरी अंगों को प्राथमिकता देता है और बालों की ग्रोथ प्रभावित हो जाती है। इसलिए वजन कम करते समय भोजन की मात्रा अत्यधिक घटा देना सही तरीका नहीं माना जाता है। अपनी डाइट में दाल, चना, राजमा, पनीर, अंडा, दूध, दही, सोया या अपनी पसंद के अन्य प्रोटीन स्रोतों को शामिल करना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही बालों की देखभाल का तरीका भी बहुत मायने रखता है। अत्यधिक हीट स्टाइलिंग टूल्स का इस्तेमाल, बार-बार बालों को कलर करना या केमिकल ट्रीटमेंट लेना, बालों को बहुत कसकर बांधना और गीले बालों में जोर से कंघी चलाना उन्हें कमजोर बना सकता है। यदि बाल जड़ों से ही उखड़ रहे हैं, तो सिर्फ हेयर केयर प्रोडक्ट बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। ऐसी स्थिति में, यदि बाल लंबे समय से झड़ रहे हैं, सिर पर जगह-जगह गंजापन दिख रहा है, बाल बहुत पतले हो रहे हैं या गुच्छों में निकल रहे हैं, तो तुरंत किसी योग्य चिकित्सक या त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।



















