गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित दातून डेंटल की वरिष्ठ डेंटिस्ट डॉ. शालिनी गौतम के अनुसार, दांतों पर जमी पीली परत को देखकर तुरंत घरेलू नुस्खे आजमाना गंभीर समस्याओं को न्योता दे सकता है। अधिकांश लोग अपने दांतों को चमकदार और सफेद बनाने की चाह में नींबू, बेकिंग सोडा या नमक जैसे एसिडिक और खुरदुरे पदार्थों से दांतों को जोर-जोर से रगड़ना शुरू कर देते हैं। पहली नजर में भले ही लोगों को लगे कि इससे दांत साफ हो रहे हैं, लेकिन हकीकत में यह तरीका दांतों की कुदरती सुरक्षा प्रणाली को हमेशा के लिए तबाह कर देता है। डेंटिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि गलत तरीकों से दांत साफ करने पर इनेमल घिस जाता है और दांतों में तेज झनझनाहट की समस्या पैदा हो जाती है।
घरेलू नुस्खों से इनेमल और दांतों की सुरक्षा परत को नुकसान
अक्सर देखा जाता है कि लोग इंटरनेट या अन्य जगहों से सुनकर नींबू का रस और बेकिंग सोडा मिलाकर दांतों पर लगाते हैं। डॉ. शालिनी गौतम बताती हैं कि नींबू में अत्यधिक अम्लीय तत्व यानी साइट्रिक एसिड पाया जाता है, जो दांतों के इनेमल को धीरे-धीरे कमजोर और पतला बना देता है। दूसरी ओर, बेकिंग सोडा का खुरदुरा कण दांतों की सतह पर तेज घर्षण पैदा करता है। जब बेकिंग सोडा को दबाव डालकर दांतों पर रगड़ा जाता है, तो यह दांतों की ऊपरी चमकदार परत को छील देता है। इसके बार-बार इस्तेमाल से इनेमल पूरी तरह नष्ट हो सकता है, जिससे ठंडा-गर्म खाने या पीने पर दांतों में तेज सेंसिटिविटी महसूस होने लगती है।
प्राकृतिक रंग और कठोर पीली परत में फर्क समझना जरूरी
बहुत से लोगों को यह गलतफहमी होती है कि स्वस्थ दांत पूरी तरह से दूध जैसे सफेद होने चाहिए। विशेषज्ञ का कहना है कि दांतों का प्राकृतिक रंग थोड़ा पीला या हल्का ऑफ-व्हाइट भी हो सकता है, इसलिए हर तरह के पीलेपन को बीमारी, गंदगी या लापरवाही का नतीजा मानना गलत है। अगर दांतों पर लंबे समय से पीली, भूरी या कठोर परत जम चुकी है, तो उसे घरेलू नुस्खों या नुकीली चीजों से हटाने का प्रयास बिल्कुल नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में केवल डेंटिस्ट से संपर्क करना सही रहता है। डॉक्टर आपकी स्थिति का आकलन करके जरूरत के अनुसार प्रोफेशनल स्केलिंग या क्लीनिंग करते हैं, जिससे दांतों और मसूड़ों को बिना नुकसान पहुंचाए गंदगी साफ की जाती है।
दांतों की सही देखभाल और रोजमर्रा की आदतें
दांतों और मसूड़ों को लंबे समय तक सेहतमंद रखने के लिए सही ओरल केयर रूटीन का पालन करना बेहद जरूरी है। डेंटिस्ट के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति को दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना चाहिए और हर बार कम से कम दो मिनट का समय देना चाहिए। दांतों की मजबूती के लिए फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, दांतों के बीच फंसे खाने के महीन कणों और प्लाक को निकालने के लिए डेंटल फ्लॉस या इंटरडेंटल ब्रश का नियमित प्रयोग करना चाहिए। बिना डेंटिस्ट की सलाह के बाजार में मिलने वाले विभिन्न प्रकार के व्हाइटनिंग प्रोडक्ट्स, केमिकल स्ट्रिप्स या स्पेशल टूथपेस्ट का लगातार इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि वे इनेमल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
डेंटिस्ट की सलाह कब लें और शुरुआती लक्षणों की पहचान
डॉ. शालिनी गौतम का कहना है कि अगर आपके दांतों में लंबे समय से ठंडा या गरम लगने पर झनझनाहट बनी हुई है, मसूड़ों से खून निकलता है या दांतों पर बार-बार कठोर परत जमा हो रही है, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण मसूड़ों की बीमारी या इनेमल के क्षरण का संकेत हो सकते हैं। नियमित अंतराल पर डेंटिस्ट के पास जाकर जांच कराने से शुरुआती दौर में ही समस्याओं की पहचान हो जाती है और समय पर उपचार संभव हो पाता है। दांतों के पीलेपन को सिर्फ एक खूबसूरती की समस्या मानकर घर पर रगड़ने के बजाय, इसके असली कारण को समझना और वैज्ञानिक डेंटल केयर अपनाना ही समझदारी है।



















