डेंगू की दस्तक के साथ ही अक्सर मरीज और उनके परिवार वाले प्लेटलेट्स घटने की खबर से घबरा जाते हैं। ऐसे में इंटरनेट से लेकर आस-पड़ोस तक हर जगह एक ही सवाल पूछा जाता है कि गिरते प्लेटलेट्स को रातों-रात कैसे बढ़ाया जाए। कोई पपीते के पत्तों के रस का सुझाव देता है, तो कोई बकरी का दूध और कीवी की तलाश में भटकने लगता है। लेकिन डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया में ऐसा कोई सुपरफूड, फल या ड्रिंक नहीं है जो जादू की तरह प्लेटलेट्स बढ़ा दे। दरअसल, डेंगू वायरस की वजह से शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटती है। जब संक्रमण धीरे-धीरे खत्म होता है और शरीर का बोन मैरो यानी अस्थि मज्जा अपनी सामान्य कार्यप्रणाली में लौटता है, तब प्लेटलेट्स की संख्या अपने आप सुधरने लगती है। इस दौरान सही आहार का काम मरीज के शरीर को हाइड्रेटेड रखना और जरूरी पोषण देना है ताकि रिकवरी में मदद मिल सके।
पपीते के पत्ते, कीवी और बकरी के दूध का डॉक्टरी सच
भारत में डेंगू के इलाज के तौर पर पपीते के पत्तों का रस सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला नुस्खा माना जाता है। हैदराबाद स्थित विवेकानंद अस्पताल के डॉक्टर के मुताबिक, कुछ छोटे अध्ययनों में यह देखा गया है कि पपीते के पत्ते का रस प्लेटलेट्स की रिकवरी प्रक्रिया में थोड़ी मदद कर सकता है। हालांकि, इसे डेंगू की अचूक दवा या कोई जादुई इलाज नहीं माना जा सकता। इसे सिर्फ एक सहयोगात्मक यानी सपोर्टिव उपाय के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
इसी तरह कीवी और बकरी के दूध को भी प्लेटलेट्स बढ़ाने वाले चमत्कारी खाद्य पदार्थों के रूप में प्रचारित किया जाता है। सच यह है कि कीवी से शरीर को जरूरी विटामिन और बकरी के दूध से पोषण तथा ऊर्जा तो मिलती है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि ये सीधे तौर पर प्लेटलेट्स बढ़ाते हैं। इनका सेवन मरीज को सामान्य पोषण देने के लिए ठीक है, लेकिन इलाज के विकल्प के तौर पर इन पर निर्भर रहना सही नहीं है।
डेंगू रिकवरी के दौरान सही न्यूट्रिशन और डाइट प्लान
डेंगू के मरीजों की देखभाल में सबसे पहली और महत्वपूर्ण प्राथमिकता शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखना है। इसके साथ ही मरीज को ऐसा भोजन देना चाहिए जो पचने में आसान और पौष्टिक हो।
- तरल पदार्थ और हाइड्रेशन: डिहाइड्रेशन से बचना डेंगू के इलाज का सबसे अहम हिस्सा है। मरीज को नियमित अंतराल पर सादा पानी और ORS का घोल पिलाते रहना चाहिए। इसके अलावा नारियल पानी, पतली छाछ, सब्जियों का सूप और अनार या आंवले का ताजा जूस देने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी नहीं होती।
- विटामिन सी और आयरन: रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए डाइट में विटामिन सी और आयरन से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए। नींबू, आंवला, अमरूद, पालक और चुकंदर का सेवन शरीर में पोषक तत्वों की भरपाई करने में मदद करता है।
- हल्का और सुपाच्य भोजन: बीमारी के दौरान शरीर की ताकत काफी घट जाती है। इसलिए दालें, उबला हुआ अंडा, दलिया, खिचड़ी और उबले चावल जैसे हल्के खाद्य पदार्थ दिए जाने चाहिए। ये भोजन पाचन तंत्र पर बिना दबाव डाले मरीज को तुरंत ऊर्जा देते हैं।
बीमारी में किन चीजों से परहेज करना बेहद जरूरी है?
डेंगू संक्रमण के दौरान मरीज का पाचन तंत्र काफी कमजोर हो जाता है। ऐसे में गलत खान-पान स्थिति को गंभीर बना सकता है।
- तली-भुनी और मसालेदार चीजें: अत्यधिक तेल और गरम मसालों से बना भोजन पचने में कठिन होता है और इससे पेट में जलन या उल्टी की समस्या हो सकती है।
- कैफीन वाले पेय: चाय, कॉफी और कोला जैसे कैफीन युक्त पेयों से परहेज करना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन के खतरे को बढ़ा देते हैं।
बच्चों की देखभाल और आपातकालीन मेडिकल चेतावनी
छोटे बच्चों में डिहाइड्रेशन की समस्या बहुत तेजी से बढ़ती है। इसलिए बच्चों को जबरदस्ती ठोस खाना खिलाने के बजाय थोड़ी-थोड़ी देर में ORS, नारियल पानी और पतला सूप देते रहना चाहिए ताकि उनके शरीर में तरल पदार्थों का स्तर बना रहे।
विशेषज्ञों का साफ कहना है कि सही खान-पान केवल मरीज के शरीर को सहारा देता है, यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प बिल्कुल नहीं है। यदि मरीज को लगातार उल्टियां हो रही हों, पेट में तेज दर्द की शिकायत हो, पेशाब बहुत कम आ रहा हो, अत्यधिक सुस्ती छा रही हो या शरीर में मसूड़ों, नाक या त्वचा से ब्लीडिंग के लक्षण दिखें, तो केवल डाइट के भरोसे न रहें। ऐसी स्थिति में बिना किसी देरी के तुरंत नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करें।


















