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देहरादून के डॉक्टर की चेतावनी, मानसून में भीगना इन गंभीर बीमारियों के मरीजों को पड़ सकता है भारीस्वास्थ्य
11 जुल॰ 2026, 7:04 pm (17 दिन पहले)· 2

देहरादून के डॉक्टर की चेतावनी, मानसून में भीगना इन गंभीर बीमारियों के मरीजों को पड़ सकता है भारी

बरसात के मौसम में भीगने से तापमान गिरने और फेफड़ों की नलियों में सिकुड़न का खतरा रहता है, जिससे अस्थमा, डायबिटीज और दिल के मरीजों को गंभीर संक्रमण हो सकता है।

मानसून की फुहारें जहां तपती गर्मी से राहत देती हैं, वहीं कुछ लोगों के लिए यह मौसम जानलेवा साबित हो सकता है। शारीरिक रूप से कमजोर लोगों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए बारिश का पानी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। अक्सर लोग मौसम का आनंद लेने के लिए बारिश में भीगने निकल पड़ते हैं, लेकिन यह लापरवाही सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, अचानक भीगने से शरीर के तापमान में भारी गिरावट आती है, जिसके कारण फेफड़ों की नलियों में सिकुड़न पैदा हो सकती है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी के चलते हवा में तैर रहे खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस शरीर पर तुरंत हमला कर देते हैं। इस वजह से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी COPD समेत कई पुरानी बीमारियों के मरीजों को भारी जोखिम का सामना करना पड़ता है।

इन गंभीर बीमारियों के मरीजों को बरतनी होगी विशेष सावधानी

बारिश के मौसम में भीगने का सबसे बुरा असर उन लोगों पर पड़ता है जो पहले से ही किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। देहरादून के दून अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. के सी पंत ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर रोगों से ग्रस्त मरीजों को इस मौसम में बहुत अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। विशेष रूप से डायबिटीज, COPD, अस्थमा, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, साइनस, लिवर, किडनी और हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को बारिश के पानी से पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए। इन मरीजों के लिए बारिश में भीगना किसी गंभीर खतरे को निमंत्रण देने जैसा है।

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निमोनिया और सेकेंडरी इन्फेक्शन का बढ़ता खतरा

डॉ. के सी पंत ने चेतावनी दी है कि डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए बारिश का पानी विशेष रूप से घातक हो सकता है। ऐसे मरीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से वे बहुत जल्द गंभीर निमोनिया की चपेट में आ सकते हैं। जो मरीज पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे हैं, वे भीगने के कारण आसानी से सेकेंडरी इन्फेक्शन यानी दूसरे संक्रमण का शिकार हो जाते हैं। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि ऐसे लोग अपनी शुगर को पूरी तरह नियंत्रित रखें और किसी भी हाल में भीगने से बचें। इसके अलावा, यदि भीगने के बाद किसी भी व्यक्ति को छाती में संक्रमण यानी चेस्ट इन्फेक्शन या बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें बिना किसी देरी के तुरंत योग्य डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से दवाइयों के जरिए बीमारी पर काबू पाया जा सकता है, अन्यथा स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती होने तक की नौबत आ सकती है।

खान-पान में सुधार और पाचन तंत्र की सुरक्षा

मानसून के दौरान केवल बाहरी संक्रमण ही नहीं, बल्कि खान-पान की आदतें भी बीमार बना सकती हैं। इस मौसम में उमस और नमी के कारण बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं, जिससे भोजन जल्दी खराब हो जाता है। डॉ. पंत ने सलाह दी है कि बरसात के दिनों में लोगों को बासी भोजन करने से पूरी तरह बचना चाहिए। इसके बजाय ताजा, हल्का और सुपाच्य भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। ऐसा करने से पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करता है और पेट से जुड़ी गड़बड़ियों या संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। सेहतमंद रहने के लिए अपनी दिनचर्या में इन छोटी-छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बातों को शामिल करना जरूरी है।

सवाल-जवाब

बारिश में भीगने से फेफड़ों पर क्या असर पड़ता है?
भीगने से शरीर का तापमान अचानक गिर जाता है, जिससे फेफड़ों की नलियां सिकुड़ सकती हैं और बैक्टीरिया-वायरस का हमला आसान हो जाता है।
किन मरीजों को बारिश में भीगने से बचना चाहिए?
अस्थमा, COPD, डायबिटीज, साइनस, दिल, लिवर और किडनी की बीमारियों से पीड़ित लोगों को भीगने से पूरी तरह बचना चाहिए।
डायबिटीज के मरीजों को बारिश के पानी से क्या खतरा है?
डायबिटीज के मरीज भीगने के कारण गंभीर निमोनिया और अन्य सेकेंडरी इन्फेक्शन की चपेट में आसानी से आ सकते हैं।
मानसून के दौरान पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए क्या सलाह दी गई है?
बरसत में बासी भोजन करने से बचें और हल्का तथा आसानी से पचने वाला भोजन ही खाएं ताकि पाचन क्रिया ठीक रहे।
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