अक्सर लोगों के मन में यह उलझन रहती है कि शराब पीने के बाद उसका असर शरीर से पूरी तरह गायब होने में आखिर कितना वक्त लगता है। बहुत से लोग मान लेते हैं कि एक-दो घंटे बाद नशा उतर जाने का मतलब है कि शराब शरीर से बाहर निकल गई, लेकिन हकीकत इससे कहीं अलग है। अल्कोहल सिर्फ दिमाग पर असर डालने या नशा चढ़ाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह खून, सांस, यूरिन और बालों जैसी जगहों में भी लंबे समय तक अपने निशान छोड़ जाती है। यही वजह है कि नशे में गाड़ी चलाने या टेस्ट में पकड़े जाने के मामलों में यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर शरीर के भीतर अल्कोहल का सफर कैसा होता है।
पीते ही 30 सेकंड में दिमाग तक पहुंच जाती है शराब
हेल्थलाइन के मुताबिक, शराब पीने के करीब 30 सेकंड के भीतर ही यह ब्लड स्ट्रीम में शामिल हो जाती है और दिमाग को प्रभावित करना शुरू कर देती है। इसके बाद महज 5 मिनट में यह पेट तक पहुंच जाती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि 20 मिनट के भीतर करीब 90 प्रतिशत अल्कोहल छोटी आंत, पैंक्रियाज और लिवर तक पहुंच जाती है। यानी गिलास खत्म करने के आधे घंटे के भीतर ही शराब शरीर के ज्यादातर अहम हिस्सों में फैल चुकी होती है।
लिवर कैसे तोड़ता है अल्कोहल को
शरीर में पहुंची अल्कोहल को बाहर निकालने का सबसे बड़ा जिम्मा लिवर के कंधों पर होता है। लिवर के भीतर मौजूद कई एंजाइम मिलकर सबसे पहले अल्कोहल को एसीटैल्डिहाइड में और फिर उसे एसीटेट में बदल देते हैं। इसके बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है और अल्कोहल कार्बन डाइऑक्साइड और पानी में तब्दील हो जाती है, जो धीरे-धीरे पसीने और पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाती है। सामान्य तौर पर लिवर एक घंटे में लगभग एक ड्रिंक यानी एक गिलास अल्कोहल को प्रोसेस कर पाता है। मगर यह समय हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता, यह उम्र, वजन, लिंग और मेटाबॉलिज्म के हिसाब से बदलता रहता है।
महिलाओं पर ज्यादा भारी क्यों पड़ती है शराब
रिसर्च बताती है कि समान मात्रा में शराब पीने के बावजूद महिलाओं का ब्लड अल्कोहल कंसंट्रेशन यानी बीएसी पुरुषों की तुलना में ज्यादा हो सकता है। इसी वजह से एक जैसी मात्रा पीने पर भी महिलाओं पर इसका असर कहीं ज्यादा गहरा दिखता है। इसके अलावा कुछ शोध यह भी संकेत देते हैं कि मध्यम आयु वर्ग के लोगों में अल्कोहल का मेटाबॉलिज्म युवाओं के मुकाबले धीमी गति से होता है, यानी उनके शरीर से अल्कोहल निकलने में तुलनात्मक रूप से ज्यादा वक्त लग सकता है।
खाली पेट शराब पीना कैसे बन जाता है खतरे की वजह
जब शराब खाली पेट पी जाती है तो वह बहुत तेजी से खून में घुल जाती है, जिससे बीएसी अचानक बढ़ जाता है। इसके विपरीत, शराब पीने से पहले कुछ खा लेने पर इसका अवशोषण धीमा पड़ जाता है और शरीर पर एक झटके में इतना ज्यादा असर नहीं होता। विशेषज्ञों की सलाह है कि शराब पीते वक्त पर्याप्त मात्रा में पानी भी पिया जाए, ताकि डिहाइड्रेशन का खतरा कम रहे। एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि दिन की शुरुआत के मुकाबले दिन ढलने के बाद शरीर अल्कोहल को कहीं तेजी से मेटाबोलाइज करता है।
अलग-अलग टेस्ट में कितने वक्त तक पकड़ी जा सकती है शराब
हेल्थलाइन के अनुसार, जांच के तरीके के हिसाब से शराब का पता लगाए जाने का समय भी अलग-अलग होता है। ब्रीथ यानी सांस के टेस्ट में यह करीब 12 से 24 घंटे तक पता चल सकती है। सामान्य यूरिन टेस्ट में भी यह 12 से 24 घंटे तक पकड़ में आती है। लेकिन EtG यूरिन टेस्ट कहीं ज्यादा संवेदनशील है और इसमें अल्कोहल के निशान 72 घंटे या उससे भी ज्यादा वक्त तक मिल सकते हैं। सबसे लंबी अवधि बालों की जांच में सामने आती है, जिसमें शराब के सेवन के संकेत करीब 90 दिनों तक मिलते रह सकते हैं।
शराब पीकर वाहन चलाना क्यों है इतना जोखिम भरा
अक्सर लोग यह सोचकर गाड़ी चला लेते हैं कि उन्हें नशा महसूस नहीं हो रहा, लेकिन असल खतरा इससे कहीं ज्यादा गहरा है। जब तक शरीर में अल्कोहल मौजूद रहती है, तब तक निर्णय लेने की क्षमता, प्रतिक्रिया देने की रफ्तार और शारीरिक संतुलन प्रभावित हो सकता है, चाहे नशा हल्का ही क्यों न महसूस हो रहा हो। इसीलिए शराब पीने के बाद कभी भी खुद गाड़ी चलाने की गलती नहीं करनी चाहिए। सुरक्षित विकल्प जैसे कैब या किसी और से गाड़ी चलवाना अपनाना चाहिए, ताकि खुद की और सड़क पर मौजूद दूसरे लोगों की जान भी सुरक्षित रहे।
तो आखिर शरीर से पूरी तरह कब निकलती है शराब
जैसे ही शराब शरीर में जाती है, पाचन तंत्र उसे तोड़ने का काम शुरू कर देता है और धीरे-धीरे यह पसीने और पेशाब के जरिए बाहर निकलने लगती है। लिवर को एक गिलास अल्कोहल को पूरी तरह पचाने में करीब 1 घंटे का वक्त लगता है। हालांकि यह अनुपात हर किसी के लिए एक जैसा नहीं रहता, यह व्यक्ति के लिंग, वजन और बेसल मेटाबॉलिक रेट के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए अगली बार जब भी शराब पीने का मन बने, यह जरूर याद रखें कि उसका असर सिर्फ अगली सुबह तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर के भीतर इसके निशान कहीं ज्यादा देर तक बने रह सकते हैं।











