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बच्चों को बार-बार बुखार की दवा देना पड़ सकता है भारी, डॉक्टर ने बताया सही तरीकास्वास्थ्य
4 जुल॰ 2026, 6:34 am (45 दिन पहले)· 2

बच्चों को बार-बार बुखार की दवा देना पड़ सकता है भारी, डॉक्टर ने बताया सही तरीका

जौनपुर की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन पटेल ने चेताया है कि बच्चों को बार-बार बुखार की दवा देना खतरनाक हो सकता है, सही खुराक और सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।

मौसम बदलने के इस दौर में बच्चों में बुखार के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और जौनपुर में कई अभिभावक ऐसे में बिना डॉक्टर से पूछे बच्चों को बार-बार बुखार की दवा पिला दे रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन पटेल का कहना है कि यही जल्दबाज़ी बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। उनकी सलाह है कि बुखार देखकर घबराने के बजाय सही वक्त पर डॉक्टर से संपर्क करें और खुद से दवा देने से परहेज़ करें।

बुखार बीमारी नहीं, शरीर का इशारा है

डॉ. पटेल के मुताबिक बुखार खुद में कोई बीमारी नहीं होता, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से जूझ रही है। मुश्किल तब खड़ी होती है जब मामूली बुखार आते ही अभिभावक हर दो-तीन घंटे में दवा पिलाना शुरू कर देते हैं। यह तरीका बिल्कुल गलत है क्योंकि इससे दवा की ओवरडोज़ होने का डर रहता है, और ओवरडोज़ बच्चे के लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।

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कब भागकर जाना चाहिए डॉक्टर के पास

डॉ. पटेल ने साफ किया कि कुछ हालात में देरी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। अगर बच्चे का तापमान बहुत ज़्यादा है, वह लगातार सुस्त बना हुआ है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है, बार-बार उल्टियां आ रही हैं या दौरे पड़ रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। उनका कहना है कि केवल बुखार को नीचे लाने के लिए बार-बार दवा देते रहना कोई हल नहीं है।

दवा की मात्रा अंदाज़े से नहीं, डॉक्टर की सलाह से तय हो

डॉ. पटेल के अनुसार दवा हमेशा उतनी ही मात्रा और उतने ही अंतराल पर दी जानी चाहिए जितना डॉक्टर ने बताया है। बच्चे की उम्र और वज़न के हिसाब से ही दवा की खुराक तय होती है, इसलिए अंदाज़ा लगाकर दवा देना खतरे से खाली नहीं है।

बुखार के दौरान इन बातों का ध्यान रखें

डॉ. पटेल ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बुखार के दौरान बच्चे को पानी, ओआरएस, नारियल पानी जैसे तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में देते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। बच्चे को हल्के और आरामदायक कपड़े पहनाएं और कमरे का तापमान सामान्य बनाए रखें। अगर बुखार बहुत तेज़ हो, तो डॉक्टर की सलाह पर गुनगुने पानी की पट्टियां भी रखी जा सकती हैं।

वायरल बुखार में एंटीबायोटिक से दूरी बनाएं

बाल रोग विशेषज्ञ ने यह भी चेताया कि वायरल संक्रमण होने पर अपनी मर्ज़ी से एंटीबायोटिक दवाएं बिल्कुल न दें। एंटीबायोटिक सिर्फ तभी दी जानी चाहिए जब डॉक्टर उसकी सलाह दें, क्योंकि गलत दवा भविष्य में गंभीर परेशानियां खड़ी कर सकती है।

थोड़ी सी सतर्कता बचा सकती है बड़ी मुसीबत से

डॉ. गुंजन पटेल का कहना है कि अभिभावकों की थोड़ी सी सजगता बच्चों को बड़ी परेशानी से बचा सकती है। अगर बुखार दो से तीन दिन तक लगातार बना रहे या बच्चे की हालत बिगड़ती नज़र आए, तो बिना देर किए नज़दीकी अस्पताल या बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। समय पर सही इलाज ही बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रखने का सबसे असरदार तरीका है।

सवाल-जवाब

बुखार आते ही बच्चे को दवा क्यों नहीं देनी चाहिए?
क्योंकि बुखार खुद बीमारी नहीं बल्कि शरीर के संक्रमण से लड़ने का संकेत है, और बार-बार दवा देने से ओवरडोज़ का खतरा बढ़ जाता है।
किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
अगर तापमान बहुत ज़्यादा हो, बच्चा लगातार सुस्त रहे, सांस लेने में दिक्कत हो, बार-बार उल्टी हो या दौरे पड़ें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बच्चे को दवा की सही खुराक कैसे तय होती है?
डॉ. गुंजन पटेल के अनुसार खुराक बच्चे की उम्र और वज़न के हिसाब से डॉक्टर तय करते हैं, अंदाज़े से दवा देना खतरनाक हो सकता है।
बुखार के दौरान बच्चे की देखभाल कैसे करें?
पर्याप्त पानी, ओआरएस या नारियल पानी दें, हल्के कपड़े पहनाएं, कमरे का तापमान सामान्य रखें और बहुत तेज़ बुखार में डॉक्टर की सलाह से गुनगुने पानी की पट्टियां रखें।
क्या वायरल बुखार में एंटीबायोटिक दी जा सकती है?
नहीं, एंटीबायोटिक सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही दी जानी चाहिए, अपनी मर्ज़ी से देना भविष्य में गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
यह सलाह किसने दी है?
जौनपुर की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन पटेल ने अभिभावकों को यह सलाह दी है।
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