अक्सर घरों की छतों, बालकनी और बगीचों में सिर्फ सजावट की चीज़ समझकर लगाई जाने वाली नागफनी असल में सेहत का एक भरपूर खजाना है। काँटेदार और बिल्कुल नाग के फन जैसी दिखने वाली यह वनौषधी सदियों से आयुर्वेद का हिस्सा रही है, मगर बहुत कम लोग जानते हैं कि यही पौधा कई बीमारियों में कारगर साबित हो सकता है। पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इसका खास स्थान रहा है।
पोषक तत्वों से भरा एक साधारण-सा पौधा
शांति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, जनपद बलिया के प्रो. डॉ. आर.वी.एन पांडेय बताते हैं कि नागफनी में Vitamin A, B-6, C और K के साथ-साथ कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मैंगनीज जैसे कई ज़रूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे स्वास्थ्य के लिहाज़ से बेहद फायदेमंद पौधों में गिना जाता है।
किन रोगों में काम आती है नागफनी
शास्त्रों में इस पौधे के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग तरीके से, अलग-अलग रोगों के उपचार में इस्तेमाल करने की बात कही गई है। बताया जाता है कि इसके प्रयोग से श्वास संबंधी दिक्कतों, पुरानी खांसी, बुखार, पेट के विकार, भूख न लगने तथा जोड़ों के दर्द और सूजन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
इतना ही नहीं, त्वचा के रोग, घाव, जलन और आंखों की लाली जैसी कई परेशानियों को दूर करने की क्षमता भी इसमें मानी जाती है। इसके पत्ते, फूल और फल — तीनों ही उपयोगी समझे जाते हैं। कई आयुर्वेदिक तैयारियों में इसे चूर्ण, रस और दूसरे रूपों में इस्तेमाल किया जाता है।
फायदे के साथ सावधानी भी ज़रूरी
हर औषधीय पौधे की तरह नागफनी के इस्तेमाल में भी सतर्कता बरतनी चाहिए। इसका हद से ज़्यादा सेवन ब्लड शुगर को बहुत कम कर सकता है, जिससे हाइपोग्लाइसीमिया यानी शुगर के अचानक गिर जाने का खतरा बन सकता है। कुछ लोगों में इसके कारण एलर्जी, उल्टी-दस्त या दूसरे दुष्प्रभाव भी सामने आ सकते हैं। जिन लोगों की सर्जरी होने वाली हो, उन्हें इसका सेवन रोकना पड़ सकता है।
डॉक्टर की सलाह के बिना न लें
नागफनी भले ही औषधीय गुणों से भरी हो, लेकिन इसका सही फायदा तभी मिलता है जब इसे उचित मात्रा और सही तरीके से लिया जाए। इसीलिए किसी भी तरह के सेवन या उपचार में इसे शामिल करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श ज़रूर करें। बिना विशेषज्ञ की राय के इसका प्रयोग नुकसानदेह साबित हो सकता है।













