स्पॉट मार्केट में हिचकिचाहट के बीच इथेरियम में संस्थागत पूंजी की वापसी, 100-दिन EMA बना बड़ा रोड़ागोंडा के गांवों और खेतों में मिलने वाला गम्हार का पेड़ आयुर्वेद में क्यों माना जाता है बेहद खासमूलांक 8 अंकराशि 19 अगस्त 2026: शनि की स्थिरता और मूलांक 1 की ऊर्जा से सुधरेंगे रिश्ते और काम, जानें अपना राशिफलमौसम प्रणालियों के असर से 19 अगस्त को 23 भारतीय राज्यों में तेज आंधी और बारिश का संकट, यूपी और बिहार अलर्ट परबलिया की आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. वंदना तिवारी ने बताए आंखों के काले घेरे मिटाने के असरदार उपाय और लाइफस्टाइल बदलावदिल्ली जल बोर्ड टेंडर घोटाला: 669 दिन की रिहाई के बाद एसीबी ने सत्येंद्र जैन को फिर किया गिरफ्तारमिर्जापुर के विंध्य कॉरिडोर से बदला श्रद्धालुओं का अनुभव, 5 मिनट में मिल रहे मां विंध्यवासिनी के दर्शनपान मसाला विज्ञापनों पर नैतिक स्टैंड लेने के बाद घिरे सनी देओल, सोशल मीडिया पर निकला पुराना कमर्शियलपहले गेम में पिछड़ने के बाद लक्ष्य सेन ने की ज़ोरदार वापसी, ऑस्ट्रिया के खिलाड़ी को हराकर बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के दूसरे दौर में पहुंचेकश्मीर में लश्कर के 10 हजार आतंकी भेजने का दावा, पाकिस्तानी मौलवी नसीर मदनी के बयान से उभरे गंभीर सवाल
गोंडा के गांवों और खेतों में मिलने वाला गम्हार का पेड़ आयुर्वेद में क्यों माना जाता है बेहद खासस्वास्थ्य
19 अग॰ 2026, 6:47 am (1 घंटे पहले)· 4

गोंडा के गांवों और खेतों में मिलने वाला गम्हार का पेड़ आयुर्वेद में क्यों माना जाता है बेहद खास

गोंडा जिले में पाए जाने वाले गम्हार (ग्मेलिना अर्बोरिया) के पेड़ का उपयोग आयुर्वेद में पाचन, सूजन, कमजोरी और बुखार के इलाज में पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के ग्रामीण इलाकों और खेतों के आसपास उगने वाला गम्हार का पेड़ अपनी विविध उपयोगिता के लिए जाना जाता है। वानस्पतिक जगत में इसे ग्मेलिना अर्बोरिया (Gmelina arborea) के नाम से पहचाना जाता है, जबकि स्थानीय बोलचाल और लोक परंपराओं में इसे गम्भारी या गम्हारी भी कहा जाता है। यह तेजी से विकसित होने वाला एक विशाल पेड़ है, जिसकी लकड़ी का उपयोग न केवल निर्माण कार्यों में होता है, बल्कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेद में भी इसके विभिन्न हिस्सों का अत्यधिक महत्व माना गया है। ग्रामीण परिवेश में सदियों से इस औषधीय पौधे की पत्तियां, छाल और जड़ें विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के निवारण के लिए प्रयोग में लाई जाती रही हैं।

गम्हार के पेड़ की पहचान और वानस्पतिक महत्व

गम्हार एक बहुउपयोगी और तीव्र गति से बढ़ने वाला वृक्ष है। गोंडा के स्थानीय इलाकों में यह प्राकृतिक रूप से बहुतायत में पाया जाता है। इसके वैज्ञानिक नाम ग्मेलिना अर्बोरिया के तहत वानस्पतिक अध्ययनों में भी इसके औषधीय गुणों की पुष्टि की गई है। प्राचीन काल से ही इस पेड़ की छाल, फल, फूल और जड़ों को सुखाकर या उनका काढ़ा बनाकर विभिन्न बीमारियों के इलाज में उपयोग करने की परंपरा रही है। वैद्यकीय दृष्टिकोण से इस वृक्ष के विभिन्न अंग शरीर के दोषों को संतुलित करने में सक्षम माने जाते हैं।

ये भी पढ़ें

पाचन क्रिया और पेट की समस्याओं में उपयोग

आयुर्वेदिक वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति के अनुसार, गम्हार के पेड़ का पारंपरिक उपयोग मुख्य रूप से पाचन तंत्र को सुचारू बनाने के लिए किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार कब्ज, अपच, पेट में गैस बनने या पेट दर्द की शिकायत रहती है, तो आयुर्वेद में गम्हार से तैयार नुस्खों को कारगर माना गया है। इसके अतिरिक्त, जिन लोगों को भूख कम लगने की समस्या होती है, उनके लिए भी इसके प्राकृतिक घटक फायदेमंद साबित हो सकते हैं। गम्हार के भीतर पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्व आंतों की कार्यप्रणाली को सामान्य रखने और जठराग्नि को प्रदीप्त करने में सहायता करते हैं।

जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत देने के गुण

शरीर में होने वाली सूजन और जोड़ों की पीड़ा से राहत दिलाने में गम्हार की छाल और जड़ों का विशेष महत्व है। गठिया अथवा अन्य कारणों से जब जोड़ों में गंभीर दर्द, सूजन और अकड़न की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, तब पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में गम्हार के अर्क या लेप का प्रयोग किया जाता है। इसके एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण शरीर के प्रभावित हिस्सों में सूजन को कम करने में मदद करते हैं। हालांकि, वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति यह भी स्पष्ट करते हैं कि यदि जोड़ों में लंबे समय से दर्द बना हुआ हो या चलने-फिरने में अत्यधिक कठिनाई हो रही हो, तो केवल घरेलू उपचार पर निर्भर न रहकर योग्य चिकित्सक से परामर्श करना अनिवार्य है।

शारीरिक कमजोरी और थकावट को दूर करने में मददगार

गम्हार को आयुर्वेद में शरीर को पोषण प्रदान करने वाले और ताकत बढ़ाने वाले पौधों की श्रेणी में रखा गया है। पुरानी थकावट और शारीरिक कमजोरी से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए इसका पारंपरिक उपयोग बेहद लाभदायक माना गया है। इसके प्राकृतिक तत्व शरीर की ऊर्जा दर को सुधारने और सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने में योगदान देते हैं। हालांकि, लगातार महसूस होने वाली कमजोरी के पीछे कई चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं, जैसे कि शरीर में रक्त की कमी (एनीमिया), आवश्यक पोषक तत्वों का अभाव, अपर्याप्त नींद या कोई अन्य आंतरिक बीमारी। इसलिए थकावट के मूल कारण की पहचान करना बेहद आवश्यक है।

बुखार, बेचैनी और रक्तस्राव की स्थिति में पारंपरिक उपचार

पारंपरिक औषधीय ज्ञान में गम्हार का उपयोग बुखार और शरीर की बेचैनी को शांत करने के लिए भी बताया गया है। इसके अलावा, शरीर के विभिन्न हिस्सों से होने वाले असामान्य रक्तस्राव को नियंत्रित करने में भी इसके हिस्सों का उल्लेख मिलता है। उदाहरण के लिए, नाक से खून बहने यानी नकसीर की समस्या और महिलाओं में अत्यधिक मासिक धर्म के दौरान होने वाले रक्तस्राव को कम करने के लिए पारंपरिक तौर पर गम्हार का इस्तेमाल किया जाता रहा है। किंतु, बार-बार नकसीर आना या अनियंत्रित मासिक रक्तस्राव होना किसी गंभीर अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है, जिसकी तुरंत चिकित्सकीय जांच कराई जानी चाहिए।

चिकित्सीय जांच और विशेषज्ञ परामर्श की आवश्यकता

हालांकि गम्हार के औषधीय गुणों का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और कुछ आधुनिक वैज्ञानिक शोधों में भी इसके गुणों का अध्ययन किया गया है, फिर भी इसे आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा का पूर्ण विकल्प नहीं माना जा सकता। यदि कोई व्यक्ति किसी स्वास्थ्य समस्या के उपचार हेतु गम्हार का प्रयोग करना चाहता है, तो उसे अनिवार्य रूप से किसी योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ या पंजीकृत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। विशेषज्ञ मरीज की आयु, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और बीमारी की गंभीरता के आधार पर ही इसकी सही मात्रा और सेवन की विधि का निर्धारण कर सकते हैं। बिना डॉक्टरी सलाह के अत्यधिक या गलत तरीके से किया गया सेवन हानिकारक भी साबित हो सकता है।

सवाल-जवाब

गम्हार के पेड़ का वैज्ञानिक नाम क्या है?
गम्हार के पेड़ का वैज्ञानिक नाम ग्मेलिना अर्बोरिया (Gmelina arborea) है, जिसे स्थानीय स्तर पर गम्भारी या गम्हारी भी कहा जाता है।
पाचन संबंधी किन समस्याओं में गम्हार मददगार माना जाता है?
आयुर्वेदिक परंपरा के अनुसार गम्हार का उपयोग कब्ज, पेट में गैस, अपच, पेट दर्द और भूख न लगने जैसी समस्याओं में राहत देने के लिए किया जाता है।
जोड़ों के दर्द और सूजन के लिए गम्हार का कौन सा भाग इस्तेमाल होता है?
जोड़ों के दर्द, गठिया और सूजन की परेशानी में पारंपरिक रूप से गम्हार की जड़ और छाल का उपयोग लेप या काढ़े के रूप में किया जाता है।
क्या गम्हार का उपयोग बिना डॉक्टरी सलाह के करना सुरक्षित है?
नहीं, किसी भी बीमारी के उपचार के लिए गम्हार का प्रयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ या डॉक्टर से उचित सलाह और सही खुराक जानना आवश्यक है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR