मौलवी नसीर मदनी के एक हालिया सार्वजनिक वक्तव्य ने सीमा पार आतंकी नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर नया मोड़ ला दिया है। पाकिस्तान के बहावलनगर में 14 अगस्त को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मौलवी ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद ने 10 हजार से अधिक आतंकवादियों को कश्मीर घाटी में भेजा था। इस स्वीकारोक्ति के बाद भारतीय क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में पाकिस्तान आधारित संगठनों की सीधी संलिप्तता का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।
पाकिस्तानी मौलवी के भाषण से हुआ बड़ा खुलासा
सार्वजनिक मंचों पर उपदेश देने वाले पाकिस्तानी मौलवी नसीर मदनी को इस महीने की शुरुआत में एक धार्मिक सभा को संबोधित करते समय गंभीर दिल का दौरा पड़ा था। स्वास्थ्य में सुधार के बाद उन्होंने फिर से सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू किया है। 14 अगस्त को बहावलनगर में एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन से जुड़े कार्यक्रम में बोलते हुए नसीर मदनी ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद के संदर्भ में यह टिप्पणी की। उन्होंने सभा में उपस्थित लोगों के सामने यह बात रखी कि हाफिज सईद ने घाटी के भीतर 10 हजार से ज्यादा उपद्रवियों और आतंकियों की घुसपैठ कराई थी।
लश्कर-ए-तैयबा का इतिहास और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध
लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक हाफिज सईद लंबे समय से भारत में हुई कई प्रमुख आतंकवादी घटनाओं का मुख्य साजिशकर्ता रहा है। वह वर्तमान में पाकिस्तान में छिपा हुआ है। अल-कायदा और तालिबान जैसे खतरनाक संगठनों के साथ संबंध उजागर होने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2005 में लश्कर-ए-तैयबा को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया था। इसके बाद वर्ष 2008 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने हाफिज सईद को विशेष रूप से वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था। भारत की सुरक्षा एजेंसियों की जांच में भी उसके खिलाफ मजबूत साक्ष्य सामने आते रहे हैं।
26/11 मुंबई आतंकी हमले और कानूनी शिकंजा
हाफिज सईद का नाम भारत के सबसे भीषण आतंकी हमलों में से एक 26/11 मुंबई हमले से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। 26 नवंबर 2008 की रात को 10 आतंकवादी समुद्री मार्ग से मुंबई शहर में घुसे थे। अगले चार दिनों तक उन्होंने शहर के कई व्यस्त और प्रमुख स्थलों को निशाना बनाकर अंधाधुंध हमले किए। इन घटनाओं में 166 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी, जबकि लगभग 300 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में मुंबई पुलिस ने हाल ही में फरार चल रहे छह पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ उनकी गैर-मौजूदगी यानी 'इन एब्सेंटिया' में मुकदमा चलाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की है। यदि अदालत इन्हें दोषी मानकर सजा सुनाती है, तो भारत प्रत्यर्पित किए जाने पर उन्हें उस दंड को भुगतना होगा।
पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिन्दूर की कार्रवाई
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले की जांच में भी हाफिज सईद का नाम मुख्य आरोपी के रूप में उभरा था। उस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें अधिकांश आम नागरिक शामिल थे। इस घटना के जवाब में भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए 'ऑपरेशन सिन्दूर' को अंजाम दिया था। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान सीमा पार मौजूद कई आतंकवादी ठिकाने पूरी तरह ध्वस्त कर दिए गए थे और बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए थे, जिसमें हाफिज सईद के कुनबे के लोग भी ढेर हुए थे। इसी कड़ी में इसी साल जुलाई में जम्मू की एक अदालत ने पहलगाम हमले के संबंध में हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।



















