12 अगस्त 2026 का राशिफल: सूर्य ग्रहण के प्रभाव से चमकेगी इन राशियों की किस्मत, जानें मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का सटीक भविष्यफलकुंभ राशिफल 12 अगस्त 2026: राहु के असर में रहेगा मन, उधार देने से पहले सोच लेंतुला राशिफल 12 अगस्त 2026: सूर्य, बुध, गुरु और चंद्रमा का कर्मक्षेत्र पर प्रभाव, मेहनत से संवरेगी आपकी राहकन्या राशिफल 12 अगस्त 2026: मंगल के प्रभाव से बढ़ेगा करियर, रिश्तों और धन मामलों में रखें धैर्य12 अगस्त को रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन में शामिल होंगे नरेंद्र मोदीमकर राशिफल 12 अगस्त: सूर्य, बुध, गुरु और चंद्रमा संवारेंगे रिश्ते, जानें करियर और आर्थिक स्थिति का हालमीन राशिफल 12 अगस्त 2026: शनि के प्रभाव से कार्यक्षेत्र में बढ़ेगी चमक, अनुशासन से मिलेंगे नतीजेआवारापन 2 रिव्यू (2026): 19 साल पुरानी डिजास्टर फिल्म का सीक्वल, इमरान हाशमी की वापसी और मेकर्स का बड़ा दांवकोलंबिया में भूकंप से तबाही, जयशंकर ने जताया दुख और मदद की पेशकशमिथुन राशिफल 12 अगस्त: वाणी पर संयम रखें और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें, जानें करियर व सेहत का हाल
गुजरात में बच्चों को अपनी चपेट में ले रही रेत मक्खी, डॉक्टर ने बताए कालाजार के लक्षण और बचाव के तरीकेस्वास्थ्य
28 जुल॰ 2026, 1:04 pm (15 दिन पहले)· 0

गुजरात में बच्चों को अपनी चपेट में ले रही रेत मक्खी, डॉक्टर ने बताए कालाजार के लक्षण और बचाव के तरीके

गुजरात के कई जिलों में सैंड फ्लाई के काटने से बच्चों में कालाजार जैसे संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं, डॉक्टर नेहा गर्ग ने लक्षण और बचाव के तरीके बताए हैं।

मानसून के मौसम में कीड़े-मकौड़ों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा हर साल बढ़ जाता है, लेकिन इस बार निशाने पर छोटे बच्चे आ गए हैं। मच्छर से भी छोटे आकार वाली रेत मक्खी, यानी सैंड फ्लाई के काटने से गुजरात के कई इलाकों में बच्चे बीमार पड़ रहे हैं और डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि समय पर पहचान न हुई तो यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

सैंड फ्लाई आमतौर पर नमी वाली जगहों, झाड़ियों, पशुओं के बाड़ों, मिट्टी की दरारों और गंदगी वाले इलाकों में पाई जाती है। यह कीट दिनभर छिपा रहता है और शाम व रात के समय ज्यादा सक्रिय हो जाता है, यही वजह है कि इसके काटने के मामले अक्सर रात के वक्त सामने आते हैं।

ये भी पढ़ें

हाल ही में गुजरात के गांधीनगर, साबरकांठा, खेड़ा, अरावली और पंचमहाल जिलों में सैंड फ्लाई से पीड़ित बच्चों के मामले सामने आए हैं। खास बात यह है कि यह संक्रमण 15 साल से कम उम्र के बच्चों में ज्यादा तेजी से फैल रहा है, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।

आखिर सैंड फ्लाई है क्या बला

यथार्थ अस्पताल, आगरा की नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नेहा गर्ग बताती हैं कि सैंड फ्लाई सिर्फ खुजली या जलन तक सीमित नहीं है, यह लीशमैनियासिस यानी कालाजार जैसी गंभीर बीमारी की वजह भी बन सकती है। यह बीमारी लीशमैनिया नाम के परजीवी से होती है, जो संक्रमित सैंड फ्लाई के काटने पर शरीर में घुस जाता है। दिलचस्प बात यह है कि सैंड फ्लाई पहले किसी संक्रमित इंसान या जानवर का खून चूसती है और उसके बाद जब वह किसी दूसरे व्यक्ति को काटती है, तभी संक्रमण एक से दूसरे तक पहुंचता है। डॉक्टर नेहा गर्ग के मुताबिक यह बीमारी आम संपर्क, हाथ मिलाने, साथ बैठने या खाना साझा करने से बिल्कुल नहीं फैलती, यानी सिर्फ काटने से ही यह इंसान से इंसान तक पहुंच सकती है।

शुरुआती खुजली से लेकर बुखार और कमजोरी तक, ये हैं लक्षण

सैंड फ्लाई के काटने के बाद शुरुआत में त्वचा पर लाल दाने निकल आते हैं, साथ ही खुजली, जलन या हल्की सूजन भी दिखाई दे सकती है। ज्यादातर मामलों में यह यहीं तक सीमित रहता है, लेकिन अगर संक्रमण भीतर तक फैल जाए तो तस्वीर बदल जाती है। ऐसे में लगातार कई दिनों तक बुखार बना रहता है, शरीर में जबरदस्त कमजोरी महसूस होती है, वजन तेजी से घटने लगता है और भूख भी कम हो जाती है। इसके अलावा एनीमिया की शिकायत हो सकती है और तिल्ली व लीवर के आकार में बढ़ोतरी भी देखी जा सकती है। डॉक्टर नेहा गर्ग के मुताबिक कुछ मरीजों की त्वचा पर ऐसे घाव या अल्सर बन जाते हैं जो लंबे समय तक नहीं भरते, और यही संकेत सबसे ज्यादा गंभीरता से लेने वाला है क्योंकि इसे मामूली जख्म समझकर टाला नहीं जाना चाहिए।

बचाव के लिए क्या करें, डॉक्टर की सलाह

डॉक्टर नेहा गर्ग का कहना है कि घर और आसपास की साफ-सफाई पर लगातार ध्यान देना सबसे जरूरी कदम है। कचरा जमा न होने दें और आसपास नमी बिल्कुल न रहने दें, क्योंकि यही सैंड फ्लाई के पनपने की मुख्य वजह बनती है। रात के समय पूरी बाजू के कपड़े पहनना, कीटनाशक युक्त मच्छरदानी का इस्तेमाल करना और कीट भगाने वाली क्रीम या स्प्रे लगाना भी संक्रमण से बचाव में काफी मददगार साबित होता है। डॉक्टर नेहा गर्ग ने साफ कहा है कि अगर किसी को लंबे समय तक बुखार रहे, त्वचा पर घाव दिखें या कोई भी असामान्य लक्षण नजर आए तो देर किए बिना डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। उनके मुताबिक अगर बीमारी की पहचान समय पर हो जाए और सही इलाज मिले तो इस पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है, इसलिए लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए, खासकर तब जब घर में छोटे बच्चे हों।

सवाल-जवाब

सैंड फ्लाई क्या होती है?
सैंड फ्लाई मच्छर से भी छोटा एक कीट है जो नमी वाली जगहों, झाड़ियों, पशुओं के बाड़ों और गंदगी वाले इलाकों में पाया जाता है और शाम-रात में ज्यादा सक्रिय रहता है।
यह बीमारी कैसे फैलती है?
संक्रमित सैंड फ्लाई पहले किसी बीमार इंसान या जानवर का खून चूसती है, फिर जब वह किसी और को काटती है तो लीशमैनिया परजीवी उसके शरीर में पहुंचकर संक्रमण फैला देता है।
गुजरात के किन जिलों में मामले सामने आए हैं?
गांधीनगर, साबरकांठा, खेड़ा, अरावली और पंचमहाल जिलों में सैंड फ्लाई से पीड़ित बच्चों के मामले देखे गए हैं।
यह संक्रमण किसे सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है?
डॉक्टर नेहा गर्ग के मुताबिक यह 15 साल से कम उम्र के बच्चों में ज्यादा तेजी से फैल रहा है।
इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं?
शुरुआत में त्वचा पर लाल दाने, खुजली, जलन या हल्की सूजन दिखाई देती है।
गंभीर स्थिति में क्या लक्षण दिखते हैं?
लगातार बुखार, अत्यधिक कमजोरी, वजन घटना, भूख कम लगना, एनीमिया और तिल्ली-लीवर का बढ़ जाना जैसे लक्षण दिख सकते हैं, साथ ही त्वचा पर न भरने वाले घाव भी बन सकते हैं।
क्या यह बीमारी हाथ मिलाने या साथ बैठने से फैलती है?
नहीं, डॉक्टर नेहा गर्ग के मुताबिक यह सामान्य संपर्क, हाथ मिलाने, साथ बैठने या खाना साझा करने से नहीं फैलती।
बचाव के लिए क्या करना चाहिए?
घर के आसपास सफाई रखें, नमी न जमा होने दें, रात में पूरी बाजू के कपड़े पहनें और कीटनाशक युक्त मच्छरदानी व कीट भगाने वाली क्रीम या स्प्रे का इस्तेमाल करें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR