ऋषिकेश में मानसून की दस्तक के साथ ही भीषण गर्मी से लोगों को बड़ी राहत मिल जाती है और मौसम काफी खुशनुमा हो जाता है। हालांकि, सुहाने मौसम के साथ-साथ यह अवधि स्वास्थ्य से जुड़ी कई प्रकार की चुनौतियां और परेशानियां भी अपने साथ लेकर आती है। लगातार बारिश में भीगना, ज्यादा देर तक नम कपड़ों में रहना, जलभराव वाले गंदे रास्तों से गुजरना या फिर भीगने के बाद शरीर को ठीक से न सुखाना कई गंभीर बीमारियों को न्यौता दे सकता है। विशेष तौर पर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले व्यक्तियों को इस सीजन में अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है।
गीले कपड़ों में ज्यादा देर रहने से बढ़ता है फंगल इंफेक्शन का खतरा
स्थानीय स्तर पर चर्चा के दौरान डॉ राजकुमार ने बताया कि मानसून के दिनों में बारिश में भीगने के बाद सबसे बड़ी और आम गलती लोग यह करते हैं कि वे लंबे समय तक गीले कपड़ों में ही बने रहते हैं। अक्सर लोग अपने दफ्तर या घर पहुंचने के बाद भी कपड़े बदलने में टालमटोल करते हैं। शरीर से चिपके हुए गीले और ठंडे कपड़े लंबे समय तक रहने से शारीरिक असहजता तो पैदा करते ही हैं, साथ ही त्वचा पर नमी बरकरार रहने के कारण फंगल इंफेक्शन और रैशेज का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि बारिश में भीगने के तुरंत बाद उन कपड़ों को बदलकर पूरी तरह सूखे और साफ वस्त्र धारण किए जाएं।
शरीर को ठीक से सुखाना और ठंड से बचाव है जरूरी
सिर्फ कपड़े बदलना ही काफी नहीं है, बल्कि भीगने के बाद अपने पूरे शरीर को अच्छी तरह से तौलिए से सुखाना भी उतना ही आवश्यक है। विशेष तौर पर सिर के बाल, पैरों की उंगलियों के बीच की जगह और शरीर के वे अंग जहां नमी लंबे समय तक बनी रह सकती है, उन्हें पूरी तरह सूखा लेना चाहिए। अपने बालों को गीला रखकर सीधे एसी या तेज पंखे के सामने बैठने की भूल बिल्कुल न करें। यदि आप बारिश में बहुत ज्यादा देर तक भीग चुके हैं और आपको ठंड का अहसास हो रहा है, तो शरीर के तापमान को सामान्य स्थिति में लाने के लिए फौरन सूखे कपड़े पहनकर कुछ देर आराम करना चाहिए।
सड़क पर भरे गंदे पानी से दूरी और साफ-सफाई का रखें ध्यान
बारिश के इस मौसम में सड़कों पर जमा होने वाले गंदे पानी से खुद को बचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। रास्तों पर भरा हुआ पानी भले ही सामान्य या साफ नजर आए, लेकिन असल में उसमें तमाम तरह की गंदगी और खतरनाक कीटाणु छिपे होते हैं। ऐसे दूषित पानी में चलने से पैरों में गंभीर संक्रमण, तेज खुजली और त्वचा संबंधी अन्य फंगल बीमारियां हो सकती हैं। यदि किसी मजबूरीवश आपको गंदे पानी से होकर गुजरना ही पड़े, तो घर लौटते ही अपने पैरों को स्वच्छ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोना न भूलें। इसके अलावा, मानसून के दिनों में आसपास की साफ-सफाई का खास ध्यान रखना भी अनिवार्य है क्योंकि जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है।
वायरल संक्रमण और सर्दी-जुकाम से बचाव के उपाय
बरसात के मौसम में अक्सर कई लोगों को भीगने के तुरंत बाद सर्दी, जुकाम, खांसी या फिर बुखार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि, केवल बारिश में भीग जाना ही हर बीमारी की अकेली सीधी वजह नहीं होती है, बल्कि इस पूरे सीजन में हवा में वायरस और अन्य संक्रामक तत्व काफी सक्रिय हो जाते हैं। यही वजह है कि अपने हाथों को साबुन से बार-बार धोते रहना, हमेशा शुद्ध और साफ पानी पीना तथा अपने आस-पास के परिवेश को स्वच्छ बनाए रखना इस दौरान बेहद आवश्यक हो जाता है ताकि आप पूरी तरह स्वस्थ रह सकें।



















