महाराष्ट्र के पुणे स्थित पिंपरी चिंचवड़ इलाके में हाल ही में एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां 5 से 6 आवारा कुत्तों ने मिलकर एक 4 साल की मासूम बच्ची को जमीन पर गिरा दिया और काटकर बुरी तरह लहुलुहान कर दिया। देश भर के अलग-अलग शहरों से हर रोज कुत्ते के काटने और हमले की सैकड़ों खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें मासूम बच्चे सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं। जब कुत्ते हमलावर रुख अपनाते हैं तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे माहौल में यह समझना बेहद जरूरी हो गया है कि आखिर कुत्ते किन परिस्थितियों में आक्रामक होते हैं और उनसे बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
कुत्ते क्यों काटते हैं और इसके पीछे के मुख्य कारण
अमेरिकन वेटरिनरी मेडिकल एसोसिएशन की दिशा-निर्देशों के मुताबिक, किसी कुत्ते के काटने की संभावना उसकी नस्ल, आकार या उम्र से तय नहीं होती। चाहे कुत्ता बड़ा हो या छोटा, नर हो या मादा, जवान हो या बूढ़ा, किसी भी स्थिति में वह काट सकता है। यहां तक कि बहुत प्यारा और शांत दिखने वाला पालतू कुत्ता भी यदि उकसाया जाए तो आक्रामक हो सकता है।
कुत्ते के व्यवहार में आक्रामकता उसकी नस्ल पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसका पिछला अनुभव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, बीमारी या उसका माहौल इसके लिए जिम्मेदार होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कुत्ते आमतौर पर कुछ खास परिस्थितियों में ही हमला करते हैं
- जब कुत्ता रेबीज से पीड़ित हो या मानसिक रूप से अस्वस्थ हो।
- अपने रहने की जगह या अपने खास इलाके की सुरक्षा करने के लिए।
- अपने भोजन, बच्चों या खिलौनों जैसी पसंदीदा वस्तुओं को बचाने के प्रयास में।
- बीमार होने, शरीर में दर्द होने या चोट लगने की स्थिति में चिड़चिड़ा होकर।
बच्चों और बड़ों को डॉग बाइट से बचाने के 10 जरूरी नियम
अमेरिकन वेटरिनरी मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार, अनजान कुत्तों के पास जाते समय हमेशा अत्यधिक सतर्कता बरतनी चाहिए। साथ ही अपने घर के पालतू जानवरों के साथ भी सम्मानजनक और सावधान व्यवहार करना आवश्यक है। बच्चों को कुत्ते के हमले का सबसे ज्यादा जोखिम रहता है, इसलिए अभिभावकों को इन 10 सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए
- बच्चों की निगरानी: छोटे बच्चों या शिशुओं को कभी भी कुत्ते के साथ अकेला न छोड़ें। यदि कुत्ता अजीब या आक्रामक व्यवहार के संकेत दे, तो स्थिति बिगड़ने से पहले तुरंत कदम उठाएं।
- पालतू जानवरों का सम्मान: बच्चों को सिखाएं कि जानवरों के साथ नम्रता से पेश आएं। किसी भी अनजान पालतू कुत्ते को छूने से पहले हमेशा उसके मालिक से अनुमति लें।
- बाड़ या जाली से दूर रहें: बच्चों को समझाएं कि किसी बाड़, गेट या जाली के बीच से हाथ डालकर अंदर मौजूद कुत्ते को छूने की कोशिश न करें। कुत्ते अपनी सीमा को लेकर बेहद संवेदनशील होते हैं और इसे खतरे के रूप में देख सकते हैं।
- शांत तरीके से पास जाएं: जब पहली बार किसी कुत्ते से मिलना हो, तो बहुत धीरे और शांत भाव से आगे बढ़ें। कुत्ते के ऊपर झुकने या डराने वाली शारीरिक मुद्रा बनाने से बचें।
- सीधी नजर मिलाने से बचें: अनजान कुत्ते की आंखों में सीधे न देखें और न ही उसके एकदम सामने से सीधे उसकी तरफ बढ़ें, क्योंकि वह इसे चुनौती या हमला समझ सकता है।
- भागने के बजाय स्थिर रहें: अगर कोई कुत्ता पास आ जाए, तो जब तक वह चला न जाए शांत खड़े रहें। यदि हटना जरूरी हो, तो धीरे-धीरे पीछे की ओर कदम बढ़ाएं। कभी भी मुड़कर भागने की गलती न करें।
- तेजी से न दौड़ें: कुत्तों में तेजी से भागती वस्तुओं का पीछा करने की प्राकृतिक प्रवृत्ति होती है। आपके दौड़ने से उनकी आक्रामकता बढ़ सकती है और वे काट सकते हैं।
- गतिविधियों में खलल न डालें: जब कुत्ता सो रहा हो, खाना खा रहा हो या अपने छोटे बच्चों की देखभाल कर रहा हो, तो उसे बिल्कुल परेशान न करें। उसकी चीजों को न छुएं।
- सूंघने की प्रक्रिया में शांत रहें: यदि कोई कुत्ता आपको सूंघने के लिए पास आता है, तो बिना हिले-डुले शांत खड़े रहें। जब उसे अहसास होगा कि आप कोई खतरा नहीं हैं, तो वह खुद आगे बढ़ जाएगा।
- खतरे के समय आवाज नियंत्रित रखें: यदि आपको कुत्ते से खतरा महसूस हो, तो घबराएं नहीं और न ही चिल्लाएं। अगर बोलना पड़े, तो धीमी लेकिन स्पष्ट और दृढ़ आवाज का इस्तेमाल करें।
कुत्ते के काटने पर तुरंत क्या करें और प्राथमिक उपचार
चाहे कुत्ता हल्का सा ही क्यों न काटे, उसकी लार में मौजूद खतरनाक वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है। यही कारण है कि मामूली खरोंच या काटने पर भी एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना अनिवार्य होता है। यदि कुत्ते का हमला हो जाए, तो तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए
यदि काटने वाला कुत्ता पालतू है और उसका मालिक वहां मौजूद है, तो तुरंत उसके रेबीज टीकाकरण का प्रमाण पत्र मांगें। मालिक का नाम और फोन नंबर जरूर नोट कर लें। यदि कुत्ता आवारा हो या पालतू, घाव को तुरंत बहते हुए साफ पानी और साबुन से लगातार कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। यह प्रक्रिया वायरस के असर को काफी हद तक कम कर देती है। घाव धोने के बाद बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। यदि क्लिनिक बंद हो, तो पास के अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जाएं और डॉक्टर के परामर्श के अनुसार रेबीज का टीका लगवाएं।



















